सुप्रीम कोर्ट ने बचाई राजस्थान की जोजारी नदी , दोनों तरफ 500 मीटर तक पाबंदी लगा दी
राजस्थान की जीवनदायिनी जोजारी नदी को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि जोजारी नदी के दोनों किनारों से 500 मीटर तक के दायरे में किसी भी तरह का निर्माण, फैक्ट्री या विकास कार्य नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि नदी का इकोसिस्टम बुरी तरह खराब हो चुका है। अवैध खन, कचरा डालना और किनारों पर होटल-रिसॉर्ट बनाने से नदी का प्राकृतिक प्रवाह रुक गया है। अब इसे बचाना जरूरी है। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।
क्या है पूरा मामला ?
सोमवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता के बेंच ने राजस्थान सरकार को निर्देश दिया की जोजारी नदी के किनारे से 100 मीटर के दायरे में अभी कोई भी निर्माण कार्य नही किया जायगा ये रोक तब तक रहेगी जब तक नदी की हाई फ्लड लाइन और इकोलॉजीकल बफर जोन वैज्ञानिक तरीके से तय नही हो जाते और उनकी सीमा तय नही हो जाती | कोर्ट ने कहा की नदी को हो रहा नुकसान बहुत गंभीर है | इसलिए पहले इसे बचाना जरुरी है फिर आगे का काम की प्रक्रिया शुरू होंगी |जोजारी नदी राजस्थान के उदयपुर और राजसमंद जिलों से होकर बहती है। इसे स्थानीय लोग “उदयपुर की जीवनरेखा” कहते हैं। ये नदी पिछोला झील, फतेहसागर और उदयसागर को पानी देती है। इन्हीं झीलों से उदयपुर शहर को पीने का पानी मिलता है।
जोजारी का उद्गम गोगुंदा की पहाड़ियों से होता है। करीब 80 किलोमीटर बहकर ये बंगाल की खाड़ी में जाकर मिलती है। नदी के किनारे आदिवासी गांव, खेत और जंगल हैं। यहां का जैव विविधता बहुत समृद्ध है। मगरमच्छ, कछुए और सैकड़ों तरह के पक्षी यहां पाए जाते हैं।Vलेकिन पिछले 10-15 साल में हालत बिगड़ गई
500 मीटर तक कोई इंडस्ट्री नही
सिर्फ 100 मीटर ही नही कोर्ट ने एक बड़ा आदेश दिया है | जहां- जहां नदी की फ्लड लाइन पहचानी जा चुकी है वहां फ्लड लाइन की दोनों तरफ 500 मीटर तक किसी भी तरह की इंडस्ट्री या ऐसी एक्टिविटी की इजाजत नही होगी जिससे नदी में प्रदुषण गंदगी या नुकसान हो और जंहा फ्लड लाइन अभी तह नही हुई है , वंहा नदी के मोजुदा बहाब के दोनों तरफ 500 मीटर तक यही नियम लागु होगा | सीधे शब्दों में नदी के आसपास 500 मीटर तक फेक्ट्री , कचरा , मेडिकल वाला काम बिलकुल बंद |
जोजारी-बांडी-लूनी सिस्टम को ठीक करने की योजना
सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ जोजारी नदी को ही नही , बल्कि जोजारी-बांडी-लूनी नदी सिस्टम को फिर से ठीक करने की बात की | इसके लिए पहले से बनी हाई-लेवल इकोसिस्टम ओवरसाइट कमिटी के साथ अब एक नई इंटीग्रेटेड कोआर्डिनेशन ग्रुप भी कम करेगी ये दोनों मिलकर नदी को बचाने के लिए एक पूरी कार्य-योजना बनाएंगी |
नदी आयोग बनाने का आदेश
कोर्ट ने राजस्थान सरकार से ये भी कहा की राज्य में नदिया और नदी बेसिन के संरक्षण के लिए एक अलग नदी आयोग या नदी कायाकल्प प्राधिकरण बनाया जाए इस आयोग का काम होगा नदियों को साफ़ रखना , उनका कायाकल्प करना और हाई फ्लड लाइन का वैज्ञानिक सर्वे कराना कोर्ट ने नोट किया की अभी कमेटी और ग्रुप में कई अधिकारी एक जेसे है इससे कम में दिक्कत आ सकती है इसलिए दोनों की भूमिका अलग-अलग साफ की जाये ताकि काम टकराव के बिना चले कमेडी के चेयरपर्सन को ये अधिकार भी दिया गया की वो जरूरत पड़ने पर अपने स्तर पर निर्देश जारी क्र सके ताकि कोर्ट के आदेश जल्दी लागू हो
जोजारी नहीं कहा से आती है ?
जोजारी को स्थानीय लोग जोजड़ी नदी भी कहते है ( उंदम ) राजस्थान के नागोर जिले के पुंदुलू गाँव की पहाड़ी से ( रास्ता ) नागोद से होते हुए जोधपुर फिर बालोतरा निकलता है ( मिलन ) मजल धुधाड़ा के पास जाकर ये लूनी नदी में मिल जाती है ( लंबाई ) करीब 150 किलोमीटर लम्बाई बताई जाती है ( ख़ास बात लूनी की सबसे लंबी सहायक नदी यही है माना जाता है की ये प्राचीन सरस्वती नदी की एक धारा थी )पुराने समय में इस नदी के किनारे गन्ना , चावल और कपास की खेती होती थी इलाका हरा भरा था |
अब नदी की हालत क्यों खराब है ?
समस्या तब शुरू होई जब जोधपुर की फेक्ट्रियो का गंदा और केमिकल वाला पानी इसी नदी में छोड़ दिया जाने लगा नतीजा यह उया की धीरे धीरे धवा , डोली जेसे गाँव के लोगो की जिन्दगी ख़राब हो गई खेती की जमीन बंजर हो गई पानी जहरीला हो गया पेड़ पोधे सूख गये और जंगली जानवर गायब होने लगे लोगो ने कई बार आवाज उठाई लेकिन कुछ नही हुआ अब जाकर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है |
अगली सुनवाई कब होगी ?
इस पुरे मामले की अलगी सुनवाई 22 सितम्बर को होगी तब तक सरकार को ये बताना होगा की हाई फ्लड लाइन और बफर जोन कितना तय हुआ है और 100 मीटर और 500 मीटर की पाबंदी पर कितना अमल हुए है और कास बात यह की नदी आयोग बना या नही |
इस फेसले का असर क्या होगा
एक्सपर्टस का कहना है की ये आदेश राजस्थान की नदियो क लिए मिसाल बनेगा अगर जोजारी बच गई तो लूनी और दूसरी नदियो को भी बचाया जा सकेगा पर्यावरण कार्यकर्ताओ ने कोर्ट के इस फेसले का स्वागत किया है उनका कहना है की पहले नदी बचेगी तभी इंसान बचेगा |
कोर्ट ने क्यों उठाया इतना सख्त कदम
बेंच ने कहा “नदियां सिर्फ पानी का स्रोत नहीं हैं। वो इकोसिस्टम, संस्कृति और जीवन का हिस्सा हैं। अगर आज जोजारी को नहीं बचाया तो कल उदयपुर प्यासा रह जाएगा।” जजों ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 में “स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार” मौलिक अधिकार है। सरकार का काम है उसे बचाना। कोर्ट ने उत्तराखंड की गंगा और यमुना वाले फैसले का हवाला भी दिया। कहा “नदियों को भी कानूनी व्यक्ति का दर्जा मिलना चाहिए ताकि उनका शोषण न हो।”
आखिर में
एक समय था जब जोजारी नदी के किनारे खेत लहराते थे आज वही नदी फेक्ट्रीयो के कचरे से दम तोड़ रही ही सुप्रिम कोर्ट का ये आदेश उम्मीद की किरण है 100 मीटर की रोक और 500 मीटर तक इंडस्ट्री बैन नदी को साँस लेने का मोका मिलेगा अब देखना ये है की 22 सितम्बर तक सरकार और प्रशासन इस आदेश को जमीन पर कितना उतार पाते है |