उज्जैन में शाही मस्जिद का हिस्सा हटाने पर बवाल: सिंहस्थ चौड़ीकरण में आई बाधा, ओवैसी बोले- मस्जिदों को इस तरह शहीद नहीं कर सकते, हाईकोर्ट में फिर पहुंचा मामला
उज्जैन। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन में रविवार को तनाव का माहौल रहा। गोपाल मंदिर मार्ग के चौड़ीकरण की जद में आ रही 635 साल पुरानी शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने की प्रशासनिक तैयारी के खिलाफ मुस्लिम समाज सड़कों पर उतर आया। शनिवार रात से ही बड़ी संख्या में लोग मस्जिद के अंदर और बाहर जमा हो गए और नारेबाजी करने लगे। रविवार दोपहर तक विरोध जारी रहा। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने मस्जिद के सामने बैरिकेड लगा दिए हैं और RAF की टुकड़ी के साथ अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।इसी बीच AIMIM प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा “आप इस तरीके से मस्जिदों को शहीद नहीं कर सकते। नए वक्फ अमेंडमेंट एक्ट का मकसद ही मस्जिदों, दरगाहों और कब्रिस्तानों को मुसलमानों से छीनना है।” उधर मुस्लिम समाज ने हाईकोर्ट की युगलपीठ में फिर अपील लगा दी है। सोमवार को इस मामले में सुनवाई होनी है।
पूरा मामला क्या है, क्यों हो रहा विरोध
उज्जैन में 2028 में सिंहस्थ का आयोजन होना है। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए प्रशासन ने शहर के प्रमुख मार्गों का चौड़ीकरण तय किया है। इसमें कंठाल से गोपाल मंदिर तक जाने वाला रास्ता भी शामिल है। ये रास्ता बेहद सकरा है और सिंहस्थ के दौरान यहां सबसे ज्यादा भीड़ रहती है।
चौड़ीकरण के नक्शे में गोपाल मंदिर रोड पर पड़ने वाली शाही मस्जिद का करीब 8 से 10 फीट का हिस्सा बाधा बन रहा है। नगर निगम और प्रशासन ने नोटिस जारी कर कहा कि मास्टर प्लान और नियमों के तहत इस हिस्से को हटाया जाएगा। जैसे ही ये खबर मुस्लिम समाज तक पहुंची, विरोध शुरू हो गया। शनिवार रात से ही लोग शाही मस्जिद में इकट्ठा होने लगे। उनका कहना है कि मस्जिद 1390 में बनी है और ये शहर की सबसे पुरानी धार्मिक इमारतों में से एक है। अगर इसके स्ट्रक्चर से छेड़छाड़ की गई तो पूरी इमारत गिर सकती है।
ओवैसी का बयान, वक्फ एक्ट को बताया वजह
रविवार को AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक्स पर पोस्ट कर इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “उज्जैन में शाही मस्जिद के साथ जो हो रहा है वो गलत है। आप इस तरीके से मस्जिदों को शहीद नहीं कर सकते।”
ओवैसी ने आगे कहा कि संसद में मैंने पहले ही कहा था कि नए वक्फ अमेंडमेंट एक्ट के जरिए कलेक्टर और सरकार को जो अधिकार दिए गए हैं, उनका इस्तेमाल मस्जिदों, दरगाहों, खानकाहों और कब्रिस्तानों को निशाना बनाने के लिए होगा। “आज उज्जैन में वही हो रहा है। ये एक्ट का असली मकसद अब सबके सामने है।” ओवैसी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। उनके समर्थकों ने #SaveShahiMasjid ट्रेंड कराया।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, RAF तैनात
प्रशासन ने किसी भी तरह के टकराव से बचने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी है। शाही मस्जिद के चारों तरफ बैरिकेड लगा दिए गए हैं। सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। ड्रोन से निगरानी की जा रही है। कलेक्टर और एसपी ने रविवार को मौके का दौरा किया। उन्होंने समाज के लोगों से बातचीत कर शांति बनाए रखने की अपील की। अतिरिक्त पुलिस बल के साथ RAF की एक टुकड़ी भी तैनात की गई है। आसपास के इलाकों में धारा 163 लागू करने पर भी विचार चल रहा है।
हाईकोर्ट में पहुंचा मामला, सोमवार को सुनवाई
मुस्लिम समाज ने पहले इंदौर हाईकोर्ट की एकलपीठ में याचिका लगाई थी कि धार्मिक स्थल को छोड़कर चौड़ीकरण किया जाए। लेकिन करीब 17 दिन पहले कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि जनहित और सिंहस्थ की तैयारी जरूरी है। इस फैसले के खिलाफ अब समाज ने युगलपीठ में अपील दायर की है। शुक्रवार को सुनवाई होनी थी लेकिन समय खत्म होने के कारण टल गई। अब सोमवार को इस मामले में सुनवाई होगी। समाज का कहना है कि जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता, तब तक कोई कार्रवाई न की जाए।
इमाम और समाज का पक्ष, “धार्मिक स्थल न टूटे”
शाही मस्जिद के इमाम मोहम्मद इब्राहिम ने कहा कि शहर में पहले भी सड़कें चौड़ी हुई हैं। तब धार्मिक स्थलों को छोड़कर काम हुआ था। “हम विकास के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन धार्मिक स्थल को बचाकर भी रास्ता निकाला जा सकता है।”
इमाम ने दावा किया कि मस्जिद की नींव 1390 की है। इसकी दीवारें और गुंबद पुराने तरीके से बने हैं। अगर एक ईंट भी हटाई गई तो पूरा स्ट्रक्चर कमजोर हो जाएगा। “हम प्रशासन से सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन मस्जिद को मत तोड़िए।” समाज के अन्य लोगों ने कहा कि ये आस्था का सवाल है। सरकार को कोई वैकल्पिक रास्ता निकालना चाहिए।
प्रशासन का तर्क, सिंहस्थ के लिए जरूरी है चौड़ीकरण
नगर निगम और जिला प्रशासन का कहना है कि सिंहस्थ 2028 में 5 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। गोपाल मंदिर मार्ग शहर का सबसे व्यस्त मार्ग है। अगर इसे चौड़ा नहीं किया गया तो भगदड़ और जाम की स्थिति बन सकती है।
अधिकारियों के मुताबिक चौड़ीकरण मास्टर प्लान 2021 के अनुसार हो रहा है। इसमें सभी वर्गों के धार्मिक स्थल चिन्हित किए गए हैं। जहां संभव हो वहां बचाने की कोशिश की गई है। लेकिन जहां टेक्निकल रूप से संभव नहीं है वहां हटाना पड़ेगा। एक अधिकारी ने कहा “हम किसी की भावना आहत नहीं करना चाहते। लेकिन 12 साल में एक बार आने वाले सिंहस्थ के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना भी जरूरी है।”
इतिहास क्या कहता है, कितनी पुरानी है शाही मस्जिद
स्थानीय इतिहासकारों के अनुसार शाही मस्जिद का निर्माण 1390 ईस्वी में हुआ था। ये मालवा सल्तनत के समय की इमारत मानी जाती है। मस्जिद में तीन गुंबद और दो मीनारें हैं। अंदर संगमरमर का मिहराब है।
इमाम का कहना है कि ये मस्जिद उज्जैन की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। यहां हर जुमे को सैकड़ों लोग नमाज पढ़ने आते हैं। मुहर्रम और ईद पर यहां बड़ा जमावड़ा होता है। वहीं कुछ जानकार कहते हैं कि शहर में सड़कें बनते समय पहले भी कई पुरानी इमारतों को नुकसान पहुंचा है। इस बार भी अगर संतुलन नहीं बना तो विवाद बढ़ सकता है
शहर में माहौल और आम लोगों की राय
उज्जैन में इस समय मिलाजुला माहौल है। कुछ लोग कह रहे हैं कि विकास के लिए थोड़ा समझौता करना पड़ेगा। कुछ कह रहे हैं कि आस्था से बड़ा कुछ नहीं। हिंदू संगठनों ने अभी आधिकारिक बयान नहीं दिया है लेकिन उनका कहना है कि कानून का पालन होना चाहिए। मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने सरकार से बीच का रास्ता निकालने की मांग की है। सोशल मीडिया पर दोनों तरफ से बयानबाजी चल रही है। पुलिस साइबर सेल अफवाहों पर नजर रख रही है। फिलहाल सबकी नजरें सोमवार की कोर्ट सुनवाई पर हैं। उसके बाद ही तय होगा कि शाही मस्जिद का हिस्सा बचेगा या सिंहस्थ के लिए रास्ता बनेगा। प्रशासन और समाज दोनों से अपील है कि शांति और कानून का सम्मान करते हुए समाधान निकाला जाए ताकि उज्जैन की गंगा-जमुनी तहजीब बनी रहे।