गांधी परिवार की बहु ने तोड़ी चुप्पी !: 10 नवंबर को आएगी आत्मकथा तो सियासत में आएगा भूचाल?”
देश की राजनीति में नेहरु-गांधी परिवार को हमेशा सबसे ताकतवर राजनीतिक परिवार कहा जाता है। अब इस परिवार की सबसे लंबी पारी खेलने वाली सोनिया गांधी खुद अपनी कहानी बता रही हैं। भारतीय राजनीति में नेहरू-गांधी परिवार को देश के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में गिना जाता है। अब इसी परिवार की सबसे लंबी और बेहद चर्चित राजनीतिक पारी खेलने वाली सोनिया गांधी अपनी जिंदगी की कहानी खुद दुनिया के सामने रखने जा रही हैं। सोनिया गांधी की संस्मरणात्मक किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ 10 नवंबर 2026 को प्रकाशित होने वाली है। किताब को अमेरिका में अल्फ्रेड ए. नॉफ प्रकाशित कर रहा है। ये किताब इसलिए भी खास है क्योंकि सोनिया गांधी ने सार्वजनिक जीवन में लंबे समय तक अपनी निजी जिंदगी को लेकर बेहद कम बात की है। अब पहली बार उनके जीवन के कई महत्वपूर्ण पड़ाव उनकी अपनी आवाज और नजरिए से सामने आने वाले हैं।
किताब में क्या होगा खास ?
किताब की शुरूआत 1965, कैंब्रिज से होती है। उस वक्त 19 साल की सोनिया मैनो इटली के एक छोटे शहर से पढ़ने कैंब्रिज आई थीं। यही उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई। प्रकाशकों का कहना है कि किताब का पहला हिस्सा काफी गर्मजोशी और बेबाकी से लिखा गया है। नेहरू-गांधी परिवार से जुड़े हुए थे। ये मुलाकात आगे चलकर प्रेम और फिर विवाह में बदल गई। एक छोटे इतालवी शहर से निकली 19 साल की युवती की जिंदगी इसके बाद पूरी तरह बदल गई। वो भारत आईं और देश के सबसे चर्चित राजनीतिक परिवार का हिस्सा बन गईं। यही वजह है कि किताब का शुरुआती हिस्सा सिर्फ राजनीति की कहानी नहीं बल्कि एक प्रेम कहानी और एक युवा महिला के जीवन में आए बड़े बदलाव की कहानी भी है। प्रकाशक ने किताब को व्यक्तिगत और राजनीतिक जीवन के मेल के रूप में पेश किया है।
प्रकाशक अल्फ्रेड ए. नॉफ ने किताब के बारे में कहा “ये सिर्फ एक राजनेता की आत्मकथा नहीं है। ये एक महिला की कहानी है जो इटली के ओरबासानो से निकलकर भारत के सबसे जटिल परिवार में आई, प्यार किया, दर्द सहा, और एक राष्ट्र की राजनीति को आकार दिया।” किताब के कवर पर सोनिया गांधी की एक सादी सफेद साड़ी वाली तस्वीर है। बैकग्राउंड में हल्का तिरंगा।
इटली से भारत तक का सफर
सोनिया गांधी का बचपन युद्ध के बाद के इटली में बीता। इसके बाद उन्होंने भाषाओं की पढ़ाई की और अंग्रेजी सीखने के लिए इंग्लैंड पहुंचीं। किताब में उनके शुरुआती जीवन से लेकर भारत आने तक के अनुभवों को जगह दी गई है।
भारत आने के बाद सोनिया के सामने एक बिल्कुल अलग दुनिया थी। नई भाषा, नई संस्कृति और एक ऐसा परिवार जिसका देश की राजनीति में बेहद बड़ा स्थान था। किताब में बताया गया है कि राजीव गांधी के साथ रहते हुए सोनिया ने धीरे-धीरे हिंदी सीखी, साड़ी पहनना और भारतीय खान-पान को अपनाना शुरू किया। Penguin Random House यह हिस्सा इसलिए दिलचस्प माना जा रहा है क्योंकि इसमें सोनिया गांधी के नजरिए से उस दौर को समझने का मौका मिलेगा, जब वह एक विदेशी युवती से भारतीय राजनीतिक परिवार की बहू बनने की यात्रा तय कर रही थीं। सबसे ज्यादा चर्चा उस चैप्टर की है जिसका नाम है “The Offer I Refused”। सूत्रों के मुताबिक इसमें सोनिया पहली बार बता रही हैं कि 2004 में प्रधानमंत्री बनने से उन्होंने क्यों मना किया। उन्होंने लिखा है “सत्ता नहीं, देश चाहिए था। मुझे डर था कि अगर मैं पीएम बनी तो लोग कहेंगे विदेशी बहू ने देश चलाया।”
एक और चैप्टर “Letters from Rajiv” है। इसमें राजीव गांधी के वो पत्र शामिल हैं जो उन्होंने 1966 से 1968 के बीच लिखे थे। प्रकाशक ने 3 पत्रों के अंश रिलीज किए हैं। एक में राजीव लिखते हैं “तुम्हारे बिना कैंब्रिज सूना लगता है। जल्दी भारत आओ।” राजनीतिक गलियारों में हलचल है। भाजपा ने कहा “आत्मकथा से सच्चाई सामने आएगी तो अच्छा है।” कांग्रेस ने कहा “ये एक महिला की हिम्मत की कहानी है।” राजनीतिक विश्लेषक का कहना है “ये किताब 2027 के चुनाव से पहले आएगी। इसका असर पड़ेगा।” सोनिया ने किताब लिखने में 3 साल लगाए। वो सुबह 5 बजे उठकर लिखती थीं। हिंदी और अंग्रेजी दोनों में ड्राफ्ट तैयार हुआ। अनुवाद टीम ने 6 महीने काम किया। किताब पहले अंग्रेजी में आएगी। फिर हिंदी, मराठी, तमिल, बंगाली में अनुवाद।
किताब 3 हिस्सों में बटी गई है
पहला हिस्सा “Orbassano to Cambridge”। इसमें सोनिया का बचपन है। पिता स्टेफानो मैनो एक बिल्डर थे। मां पाओला हाउसवाइफ। दो बहनें। कैथोलिक स्कूल। 1965 में वो अंग्रेजी सीखने कैंब्रिज गईं। वहीं हॉस्पिटैलिटी कोर्स के दौरान राजीव गांधी से मुलाकात। राजीव उस समय ट्रिनिटी कॉलेज में इंजीनियरिंग पढ़ रहे थे। किताब में सोनिया लिखती हैं “मैं एक आम लड़की थी। मुझे नहीं पता था कि जिस लड़के से मैं कॉफी पी रही हूं उसका दादा देश का प्रधानमंत्री है।” पहली मुलाकात, पहली डेट, और वो चिट्ठियां जो राजीव ने इटली भेजीं। प्रकाशक का कहना है कि ये हिस्सा “सबसे गर्मजोशी भरा” है।
दूसरा हिस्सा “New Delhi to 10 Janpath”। 1968 में शादी। भारत आना। इंदिरा गांधी के साथ रिश्ते। सास-बहू की डायनामिक्स। 1980 में संजय गांधी की मौत। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या। राजीव का प्रधानमंत्री बनना। और 1991 में राजीव की हत्या। सोनिया लिखती हैं “उस रात के बाद लगा जिंदगी खत्म। लेकिन बेटे-बेटी के लिए जीना था।” इस हिस्से में वो बताती हैं कि कैसे उन्होंने राजनीति से दूरी बनाई। कैसे 1997 में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के दबाव में पार्टी जॉइन की। 1998 में कांग्रेस अध्यक्ष बनीं। और 2004 में प्रधानमंत्री पद ठुकराकर यूपीए सरकार बनवाई।
तीसरा हिस्सा “Power to Reflection”। 2004 से 2014 तक यूपीए सरकार। मनमोहन सिंह के साथ काम। आरटीआई, मनरेगा, फूड सिक्योरिटी बिल के पीछे की कहानी। पार्टी के अंदर की उठापटक। राहुल और प्रियंका की राजनीति में एंट्री। 2017 में अध्यक्ष पद छोड़ना। और 2024 तक का सफर। आखिरी अध्याय का नाम है “Belonging”। इसमें वो लिखती हैं “मैं इटली में पैदा हुई, लेकिन भारत में मुझे अपनापन मिला। यहीं मेरा घर है।”
क्यों चर्चा में रहा एक चैप्टर की?
जिसका नाम है “The Offer I Refused”। सूत्रों के मुताबिक इसमें सोनिया पहली बार बता रही हैं कि 2004 में प्रधानमंत्री बनने से उन्होंने क्यों मना किया। उन्होंने लिखा है “सत्ता नहीं, देश चाहिए था। मुझे डर था कि अगर मैं पीएम बनी तो लोग कहेंगे विदेशी बहू ने देश चलाया।” एक और चैप्टर “Letters from Rajiv” है। इसमें राजीव गांधी के वो पत्र शामिल हैं जो उन्होंने 1966 से 1968 के बीच लिखे थे। प्रकाशक ने 3 पत्रों के अंश रिलीज किए हैं। एक में राजीव लिखते हैं “तुम्हारे बिना कैंब्रिज सूना लगता है। जल्दी भारत आओ।” राजनीतिक गलियारों में हलचल है। भाजपा ने कहा “आत्मकथा से सच्चाई सामने आएगी तो अच्छा है।” कांग्रेस ने कहा “ये एक महिला की हिम्मत की कहानी है।” राजनीतिक विश्लेषक का कहना है “ये किताब 2027 के चुनाव से पहले आएगी। इसका असर पड़ेगा।” सोनिया ने किताब लिखने में 3 साल लगाए। वो सुबह 5 बजे उठकर लिखती थीं। हिंदी और अंग्रेजी दोनों में ड्राफ्ट तैयार हुआ। अनुवाद टीम ने 6 महीने काम किया। किताब पहले अंग्रेजी में आएगी। फिर हिंदी, मराठी, तमिल, बंगाली में अनुवाद।
किताब क्या खुलासे हुए?
किताब में कुछ खुलासे भी हैं। जैसे 1991 के बाद उन्हें कितनी बार सुरक्षा धमकी मिली। कैसे उन्होंने राहुल को राजनीति में आने से रोका। प्रियंका के साथ उनका रिश्ता। और 10 जनपथ में रहने के 30 साल। सोनिया ने प्रस्तावना में लिखा है “मैं लेखक नहीं हूं। मैं सिर्फ अपनी कहानी बता रही हूं। गलतियां भी होंगी, अफसोस भी। लेकिन ये मेरी सच है।” 10 नवंबर को किताब लॉन्च के दिन दिल्ली में बड़ा इवेंट होगा। मनमोहन सिंह, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी मौजूद रहेंगे। प्रकाशक ने पहले प्रिंट में 5 लाख कॉपी छपवाई है। अमेजन पर प्री-बुकिंग 48 घंटे में 1 लाख क्रॉस कर गई।
आलोचक पूछ रहे हैं “क्या ये आत्मकथा है या राजनीतिक बयान?” समर्थक कह रहे हैं “50 साल की चुप्पी के बाद आवाज है।” सच क्या है ये 10 नवंबर को पता चलेगा। लेकिन एक बात तय है। गांधी परिवार की बहू ने चुप्पी तोड़ी है। और जब सोनिया गांधी बोलती हैं तो देश सुनता है। इटली के एक छोटे शहर से निकली लड़की से लेकर भारत की सबसे ताकतवर राजनेता तक का सफर अब किताब के पन्नों में है। नाम है “Belonging: A Journey of Love”। क्योंकि आखिर में सवाल यही है – अपनापन कहां मिलता है? सोनिया का जवाब किताब में है।