“गुरु” तंबाकू की बिना बिल सप्लाई का भंडाफोड़, MP में GST इतिहास की सबसे बड़ी कार्यवाई, भोपाल फैक्ट्री पर छापा,100 करोड़ टैक्स चोरी
भोपाल | मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बीते दो दिनों तक चली GST इंटेलिजेंस की कार्यवाई ने तंबाकू और गुटका कारोबार के भीतर चल रहे एक बड़े नेटवर्क का पर्दा खोल दिया है। नवीबाग इलाके के न्यू चौकसे नगर में संचालित “गुरु” ब्रांड की तंबाकू फैक्ट्री पर केंद्रीय GST इंटेलिजेंस की टीम ने छापा मारा और जांच में जो कुछ सामने आया उसने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। शुरुआती आकलन में करीब 30 करोड़ रुपए की GST चोरी पकड़ी गई थी, लेकिन जैसे-जैसे दस्तावेज और मशीनों की पड़ताल आगे बढ़ी ये आंकड़ा 60 करोड़ के पार गया और अब विभाग का दावा है कि अंतिम जांच के बाद ये रकम 100 करोड़ रुपए से भी ज्यादा तक पहुंच सकती है।
कार्रवाई दो दिन तक चली। GST इंटेलिजेंस की कई टीमें सुबह-सुबह फैक्ट्री में पहुंची थीं। फैक्ट्री के बाहर पुलिस का पहरा लगा दिया गया था ताकि कोई सबूत नष्ट न कर सके। अंदर घुसते ही अधिकारियों को बड़े-बड़े हॉपर, मिक्सिंग मशीन, पैकिंग मशीन और कच्चे तंबाकू के बोरों का जखीरा मिला। एक तरफ कच्चा माल रखा था तो दूसरी तरफ “गुरु” ब्रांड के नाम से तैयार पाउच और डिब्बे। टीम ने उत्पादन रजिस्टर, बिक्री के बिल, खरीद के वाउचर और बैंक स्टेटमेंट सब अपने कब्जे में ले लिए। फैक्ट्री के कंप्यूटर और हार्ड डिस्क भी सीज की गई हैं ताकि डिजिटल रिकॉर्ड खंगाला जा सके। अधिकारियों के मुताबिक फैक्ट्री में “गुरु” नाम से तंबाकू और गुटखा तैयार किया जा रहा था और उसे भोपाल के साथ-साथ आसपास के जिलों और अन्य राज्यों में सप्लाई किया जाता था। फैक्ट्री का संचालन सुरेश सिंह नामक व्यक्ति करता था। छापे के दौरान सुरेश सिंह मौके पर मौजूद थे। पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और अब उन्हें जेल भेज दिया गया है। GST विभाग का कहना है कि सुरेश सिंह से लंबी पूछताछ की जाएगी और ये भी पता लगाया जाएगा कि इस पूरे कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि जांच केवल एक फैक्ट्री में रखे तैयार माल या मशीनों तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्पादन, खरीद, बिक्री और पूरे सप्लाई नेटवर्क की पड़ताल तक पहुंच चुकी है। रिपोर्टों के अनुसार फैक्ट्री में ‘गुरु’ नाम से तंबाकू उत्पाद बनाए जा रहे थे और परिसर में उत्पादन से जुड़ी मशीनरी और कच्चा माल मिला। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि मशीनरी को परिसर में छिपाकर रखा गया था और उत्पादन गतिविधियां आधिकारिक रिकॉर्ड में दिखाई जा रही मात्रा से काफी अलग हो सकती थीं।
शुरुआत में जब टीम ने स्टॉक और उत्पादन का मिलान किया तो पाया कि फैक्ट्री में जितना माल बन रहा था उसका बहुत कम हिस्सा GST रिटर्न में दिखाया जा रहा था। मशीनों की क्षमता और कच्चे माल की खपत को देखकर अंदाजा लगाया गया कि हर महीने करोड़ों रुपए का माल बिना बिल के बाजार में उतारा जा रहा था। इसी आधार पर पहले 30 करोड़ रुपए की चोरी का अनुमान लगाया गया। लेकिन जब अधिकारियों ने पुराने रिकॉर्ड, सप्लायरों के बिल और थोक विक्रेताओं के लेनदेन खंगाले तो तस्वीर और बड़ी निकली। अब विभाग का मानना है कि पिछले दो-तीन साल में 60 से 100 करोड़ रुपए तक की GST चोरी हुई होगी। कुछ रिपोर्टों में तो ये भी कहा जा रहा है कि अंतिम देनदारी 100 करोड़ के पार भी जा सकती है। हालांकि GST विभाग ने साफ किया है कि अंतिम आंकड़ा तभी तय होगा जब सभी दस्तावेजों की फॉरेंसिक ऑडिट पूरी हो जाएगी।
GST इंटेलिजेंस की ये कार्रवाई सिर्फ फैक्ट्री तक सीमित नहीं है। विभाग अब पूरे सप्लाई नेटवर्क को खंगाल रहा है। सवाल ये है कि “गुरु” ब्रांड का माल किन थोक व्यापारियों को जाता था, वो आगे किन दुकानदारों को बेचते थे और बिक्री का हिसाब कैसे रखा जाता था। अधिकारियों को शक है कि बिक्री को कम दिखाने के लिए डमी बिल, फर्जी कंपनियों और नकद लेनदेन का सहारा लिया गया होगा। इसी वजह से टीम ने फैक्ट्री से मिले लेजर, बिल बुक और मोबाइल फोन भी जब्त किए जांच का एक बड़ा हिस्सा अब फैक्ट्री से बाहर निकलकर उस नेटवर्क तक पहुंच सकता है जहां तैयार तंबाकू उत्पाद बेचे जाते थे। किसी भी बड़े तंबाकू कारोबार में केवल उत्पादन ही पूरी कहानी नहीं बताता। कच्चा तंबाकू, सुपारी और दूसरे सामान कहां से खरीदे गए, किसके नाम पर खरीदे गए, भुगतान बैंक से हुआ या नकद, तैयार माल किन व्यापारियों को गया, दुकानदारों तक किस माध्यम से पहुंचा और बिक्री का हिसाब किस तरह रखा गया—इन सभी सवालों के जवाब जांच का हिस्सा बन सकते हैं।
उत्पादन रजिस्टर से यह पता चल सकता है कि रोज या महीने में कितना माल बनाया गया। खरीद रिकॉर्ड से कच्चे माल की वास्तविक मात्रा का पता लगाया जा सकता है। बिक्री बिल यह बता सकते हैं कि माल किन लोगों को बेचा गया। बैंक रिकॉर्ड से भुगतान का रास्ता सामने आ सकता है। वहीं मोबाइल फोन, कंप्यूटर और डिजिटल स्टोरेज डिवाइस से ऐसे रिकॉर्ड मिल सकते हैं जो कागजी दस्तावेजों में नहीं दिखाई देते।अगर विभाग को यह पता चलता है कि किसी कारोबारी ने बिक्री को कम दिखाया था, तो जांच अधिकारी वास्तविक बिक्री का अनुमान लगाने के लिए अलग-अलग स्रोतों का मिलान कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर कच्चे माल की खरीद और तैयार माल की बिक्री के बीच संबंध देखा जा सकता है। अगर फैक्ट्री ने बड़ी मात्रा में कच्चा माल खरीदा, लेकिन उसी अनुपात में उत्पादन और बिक्री रिकॉर्ड में नहीं दिखाया, तो वह अंतर जांच का विषय बन सकता है।
इस कार्रवाई को सिर्फ एक फैक्ट्री पर हुई GST रेड के रूप में देखने के बजाय टैक्स अनुपालन और अवैध उत्पादन की जांच के तौर पर समझना ज्यादा सही होगा। अभी सबसे अहम चीज विभाग की अंतिम जांच रिपोर्ट होगी। उसी के आधार पर तय होगा कि वास्तविक टैक्स चोरी कितनी हुई, कौन-कौन से कानून लागू होते हैं और आगे किन लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि भोपाल की ‘गुरु’ तंबाकू फैक्ट्री पर हुई कार्रवाई में बड़े पैमाने पर कथित कर अनियमितताएं सामने आई हैं और जांच का दायरा फैक्ट्री से आगे बढ़कर पूरे कारोबारी नेटवर्क तक जा सकता है।