“जाली ITC का बड़ा खुलासा! UP-हरियाणा के 3 शहरों में 9 ठिकानों पर ED की ताबड़तोड़ छापेमारी, 20 करोड़ से ज्यादा का घोटाला”
नई दिल्ली/लखनऊ/फरीदाबाद। सोमवार सुबह सूरज की पहली किरण के साथ प्रवर्तन निदेशालय ED ने जाली ITC और GST घोटाले पर बड़ा एक्शन लिया। उत्तर प्रदेश और हरियाणा के तीन शहरों फरीदाबाद, मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद के 9 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। ये कार्रवाई जंबुद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स लिमिटेड से जुड़े जाली नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में की गई है।
GST अधिकारियों की शिकायत के बाद ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम PMLA के तहत केस दर्ज किया था। जांच में पता चला कि बिना एक भी सामान का असल में लेन-देन हुए, फर्जी इनवॉयस और ई-वे बिल बनाकर करीब 9.63 करोड़ रुपये का जाली ITC क्लेम किया गया। इसके अलावा 10.28 करोड़ रुपये से ज्यादा का टैक्स क्रेडिट आगे पास किया गया। यानी सरकारी खजाने को 20 करोड़ से ज्यादा का चूना लगा। ED के अधिकारी सुबह 5 बजे से ही फरीदाबाद के सेक्टर 15, मुजफ्फरनगर की मंडी और गाजियाबाद के कौशांबी स्थित दफ्तरों और गोदामों में पहुंच गए थे। लैपटॉप, हार्ड डिस्क, बैंक स्टेटमेंट और रजिस्टर जब्त किए गए।
पूरा मामला क्या है, कैसे हुआ घोटाला
ये पूरा खेल “सर्कुलर ट्रेडिंग” और “एंट्री ऑपरेटर” का है। जंबुद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स लिमिटेड नाम की कंपनी को मास्टर कंपनी बनाया गया। इसके नाम पर दर्जनों फर्जी फर्में खोली गईं। इन फर्मों का काम सिर्फ कागज पर सामान खरीदना और बेचना दिखाना था। हकीकत में न ट्रक चला, न गोदाम में सामान आया, न कोई पेमेंट असल में हुई।
तरीका बहुत सीधा था। पहले फर्जी कंपनी A ने कंपनी B को 1 करोड़ का माल बेचा। GST का 18% यानी 18 लाख रुपये का इनवॉयस बना। फिर कंपनी B ने वही माल कंपनी C को बेच दिया। ऐसे 4-5 लेयर बनाकर आखिर में जंबुद्वीप कंपनी ने ITC क्लेम कर लिया। GST पोर्टल पर रिटर्न भरते समय ये दिखाया गया कि हमने माल खरीदा और टैक्स दिया, इसलिए हमें ITC चाहिए। सरकार से पैसा वापस मांग लिया गया। ई-वे बिल भी फर्जी बनाए गए। बिना ट्रक चले ही सिस्टम में एंट्री कर दी गई कि माल फरीदाबाद से गाजियाबाद गया। ट्रांसपोर्टर के नाम भी नकली थे। ED की जांच में पता चला कि इसी नेटवर्क से 200 से ज्यादा फर्जी इनवॉयस काटे गए। एक ही पते पर 15-15 कंपनियां रजिस्टर थीं।
ED को शक कैसे हुआ, GST विभाग ने क्या पकड़ा
पिछले साल GST इंटेलिजेंस की लखनऊ जोनल यूनिट को शक हुआ। उन्होंने देखा कि जंबुद्वीप कंपनी हर महीने करोड़ों का ITC क्लेम कर रही है, लेकिन उसके बैंक अकाउंट में उतनी बिक्री नहीं दिख रही। जब फिजिकल वेरिफिकेशन किया गया तो कंपनी का पता फर्जी निकला। वहां सिर्फ एक ताला लगा था। न कोई कर्मचारी, न कोई सामान।
GST अधिकारियों ने 9.63 करोड़ के जाली ITC और 10.28 करोड़ के टैक्स क्रेडिट को ब्लॉक कर दिया। फिर केस ED को भेजा गया क्योंकि इसमें मनी लॉन्ड्रिंग का एंगल था। ED ने PMLA के तहत FIR दर्ज की। आरोप लगा कि जाली ITC से मिले पैसे को कैश में निकालकर हवाला के जरिए आगे भेजा गया।
सोमवार की रेड में क्या मिला
ED की 9 टीमों ने एक साथ तीनों शहरों में रेड मारी।
फरीदाबाद: यहां कंपनी का हेड ऑफिस बताया जा रहा था। यहां से 4 लैपटॉप, 2 सर्वर और फर्जी कंपनी की मोहरें मिलीं। एक अलमारी में 35 लाख रुपये कैश भी मिला। बैंक लॉकर की चाबियां भी मिली हैं।
गाजियाबाद: कौशांबी में एक CA का ऑफिस था। यहां से सर्कुलर ट्रांजेक्शन की पूरी कुंडली मिली। एक्सेल शीट में लिखा था कि किस कंपनी से कितना ITC पास कराना है। 3 हार्ड डिस्क जब्त हुईं।
मुजफ्फरनगर: यहां एक गोदाम था। कागज पर दिखाया गया था कि यहां से लाखों टन सामान जाता है। लेकिन गोदाम खाली था। सिर्फ धूल थी। यहां से ई-वे बिल बनाने वाला सॉफ्टवेयर और फर्जी ट्रांसपोर्ट बिल्टी मिलीं। ED अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों ने पैसे को कई लेयर में घुमाया। पहले कंपनी के खाते में, फिर दूसरे की फर्म में, फिर कैश निकालकर हवाला। इसका मकसद ट्रेल को तोड़ना था।
जंबुद्वीप एक्सपोर्ट्स के पीछे कौन लोग हैं
प्रारंभिक जांच में 3 लोगों के नाम सामने आए हैं। एक डायरेक्टर गाजियाबाद का रहने वाला है। दूसरा CA फरीदाबाद में ऑफिस चलाता है। तीसरा मुजफ्फरनगर का एंट्री ऑपरेटर है जो फर्जी फर्में बनवाता था।
ED को शक है कि इस नेटवर्क में 20 से ज्यादा लोग शामिल हैं। इनमें कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंट, कुछ ट्रांसपोर्टर और कुछ बैंक कर्मी भी हो सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि ये सिर्फ एक कंपनी नहीं है। पूरे उत्तर भारत में ऐसा नेटवर्क चल रहा है। जंबुद्वीप सिर्फ एक ब्रांच थी।
सरकार को कितना नुकसान, आम आदमी पर क्या असर
GST अधिकारियों के अनुसार सिर्फ इस एक केस में 20 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है। लेकिन ये टिप ऑफ आइसबर्ग है।
जाली ITC का मतलब है कि सरकार को टैक्स कम मिलता है। जब सरकार को कम टैक्स मिलेगा तो विकास के काम रुकेंगे। सड़क, स्कूल, अस्पताल सब पर असर पड़ेगा। इसके अलावा जो ईमानदार व्यापारी टैक्स देते हैं, उनका माल महंगा पड़ता है। क्योंकि जाली ITC वाले सस्ते में माल बेच देते हैं। इससे मार्केट खराब होता है। वित्त मंत्रालय ने पिछले साल कहा था कि पूरे देश में जाली ITC का घोटाला 50 हजार करोड़ से ज्यादा का है।
ED अब क्या करेगी, आगे की कार्रवाई
ED ने PMLA के तहत सभी 9 ठिकानों से दस्तावेज कब्जे में ले लिए हैं। अब इनकी फोरेंसिक जांच होगी। बैंक खातों को फ्रीज किया जाएगा।
जिन लोगों के नाम आएंगे उन्हें समन भेजकर पूछताछ होगी। अगर जरूरत पड़ी तो गिरफ्तारी भी होगी। ED ये भी पता लगाएगी कि जाली ITC से कमाया पैसा कहां गया। क्या प्रॉपर्टी खरीदी, क्या विदेश भेजा, क्या चुनाव में इस्तेमाल हुआ। सूत्रों के मुताबिक इस नेटवर्क का कनेक्शन दुबई और सिंगापुर तक भी हो सकता है। क्योंकि एक्सपोर्ट के नाम पर भी फर्जीवाड़ा किया गया था। GST विभाग ने भी समानांतर जांच शुरू की है। अब हर महीने रिटर्न भरने वाली कंपनियों का ऑडिट होगा।
एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं
टैक्स एक्सपर्ट राजीव मेहता कहते हैं “जाली ITC सबसे बड़ा GST फ्रॉड है। इसमें सरकार को डायरेक्ट नुकसान होता है। सरकार को अब AI बेस्ड सिस्टम लाना होगा जो फर्जी इनवॉयस को तुरंत पकड़े।” पूर्व IRS अधिकारी एस.के. गुप्ता कहते हैं “एंट्री ऑपरेटर की फैक्ट्रियां बंद करनी होंगी। जब तक फर्जी कंपनी बनाना आसान है, तब तक ये खेल चलता रहेगा।”
आम व्यापारी क्या सावधानी बरते
CA एसोसिएशन ने व्यापारियों को सलाह दी है कि वो किसी भी अनजान कंपनी से बिना वेरिफिकेशन माल न खरीदें। GST नंबर चेक करें। ई-वे बिल का फिजिकल वेरिफिकेशन करें। अगर कोई बहुत सस्ता माल दे और ITC का लालच दे तो समझ जाएं कि दाल में कुछ काला है। ED की ये रेड एक संदेश है। अब जाली ITC करके बचना मुश्किल है। सरकार, GST विभाग और ED तीनों मिलकर इस नेटवर्क को तोड़ने में लगे हैं।
जंबुद्वीप केस से साफ है कि घोटालेबाज कितने शातिर हैं। कागज पर सामान घुमाकर करोड़ों कमा लेते हैं। लेकिन कानून के हाथ उन तक भी पहुंच रहे हैं। अगले 15 दिन में ED कोर्ट में प्रोसिक्यूशन कम्प्लेंट फाइल करेगी। तब और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल 9 ठिकानों की तलाशी पूरी हो चुकी है। दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। और हां, सरकारी खजाने का पैसा अब आसानी से नहीं लूटा जा सकेगा।