“दिल्ली में CJP प्रोटेस्ट पर बवाल: 3000 प्रदर्शनकारी हिरासत में, UN ने जताई चिंता, CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के बाद सेंट्रल दिल्ली छावनी में तब्दील”
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के प्रस्तावित प्रोटेस्ट और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलकों में भारी हंगामा जारी है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP द्वारा बुलाए गए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने करीब 3000 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। इस बड़े पैमाने पर हुई गिरफ्तारी पर संयुक्त राष्ट्र यानी UN ने भी चिंता जताई है। वहीं CJP के शीर्ष नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को देर रात रिहा कर दिया गया है। इस बीच सेंट्रल दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम और ट्रैफिक डायवर्जन लागू हैं।
पूरा मामला क्या था?
कॉकरोच जनता पार्टी CJP ने 10 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर “चुनाव सुधार और EVM की पारदर्शिता” को लेकर बड़ा प्रदर्शन बुलाया था। पार्टी का आरोप था कि हाल के चुनावों में गड़बड़ी हुई है और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस पर चुप हैं। CJP के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने कहा था “जब तक CEC जवाब नहीं देंगे तब तक हम सड़क पर रहेंगे।” CJP ने दिल्ली पुलिस से प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी। लेकिन पुलिस ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए अनुमति देने से मना कर दिया। इसके बावजूद CJP ने कहा कि वो शांतिपूर्ण धरना करेंगे। 10 अक्टूबर की सुबह देशभर से करीब 5000 कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचे। इनमें महाराष्ट्र, गुजरात, यूपी, बिहार और झारखंड से आए लोग भी शामिल थे। पुलिस को इनपुट मिला था कि प्रदर्शन उग्र हो सकता है। इसलिए सुबह 6 बजे से ही जंतर-मंतर, इंडिया गेट और संसद मार्ग पर बैरिकेडिंग कर दी गई। मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए।
पुलिस की कार्रवाई और हंगामा
सुबह 9 बजे जैसे ही CJP के कार्यकर्ता जंतर-मंतर की तरफ बढ़े, पुलिस ने उन्हें रोक लिया। अभिजीत दीपके को सुबह 10:30 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर ही डिटेन किया गया। प्रवक्ता सौरव दास और युवा मोर्चा प्रमुख आशुतोष रांका को उनके घर से हिरासत में लिया गया। इसके बाद पुलिस ने बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी शुरू की। संसद मार्ग, कनॉट प्लेस और आईटीओ के पास से करीब 3000 प्रदर्शनकारियों को बसों में भरकर अलग-अलग थानों और हिरासत केंद्रों में ले जाया गया। इनमें महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल थे। पुलिस का कहना है कि ये कार्रवाई CrPC की धारा 144 और 151 के तहत “निवारक हिरासत” थी। डीसीपी सेंट्रल ने कहा “हमने पहले ही मना किया था। फिर भी जबरन प्रदर्शन करने की कोशिश हुई। इसलिए शांति बनाए रखने के लिए हिरासत में लिया गया।” CJP ने इस कार्रवाई को “तानाशाही” बताया। पार्टी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा “ये लोकतंत्र की हत्या है। सवाल पूछना जुर्म बन गया है।”
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और मानवाधिकार का मुद्दा
3000 लोगों की एक साथ गिरफ्तारी की खबर जैसे ही बाहर आई, संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय OHCHR ने बयान जारी किया। UN प्रवक्ता ने कहा “हम भारत में बड़े पैमाने पर हुई गिरफ्तारी से चिंतित हैं। शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार हर लोकतंत्र का आधार है। हम भारत सरकार से आग्रह करते हैं कि हिरासत में लिए गए लोगों के साथ मानवीय व्यवहार हो और उन्हें जल्द रिहा किया जाए।” UN के बयान के बाद विपक्ष ने भी सरकार को घेरा। कांग्रेस ने कहा “ये शर्मनाक है। दुनिया में भारत की छवि खराब हो रही है।” AAP ने कहा “दिल्ली पुलिस केंद्र के इशारे पर काम कर रही है।” विदेश मंत्रालय ने UN के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा “भारत एक लोकतांत्रिक देश है। कानून व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जा सकती।”
आगे की रणनीति
अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका रिहा देर रात करीब 11 बजे दिल्ली पुलिस ने CJP के 3 बड़े नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को रिहा कर दिया। रिहाई के बाद अभिजीत ने कहा “हमें 15 घंटे हिरासत में रखा गया। न कोई FIR, न कोई चार्ज। ये साफ है कि सरकार डर गई थी।” रिहा होने के बाद तीनों नेता सीधे प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहुंचे। उन्होंने ऐलान किया कि 15 अक्टूबर को “जेल भरो आंदोलन” किया जाएगा। “अगर सरकार हमारी मांग नहीं मानेगी तो हम हर जिले में गिरफ्तारियां देंगे।” सौरव दास ने कहा। CJP ने ये भी कहा कि वो सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे। वकीलों का कहना है कि बिना कारण 24 घंटे से ज्यादा हिरासत अवैध है।
आम लोगों पर असर
प्रोटेस्ट और गिरफ्तारी के बाद सेंट्रल दिल्ली को छावनी में तब्दील कर दिया गया। संसद, राष्ट्रपति भवन, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक के आसपास 5 लेयर की सुरक्षा है। RAF, CRPF और दिल्ली पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात हैं। ड्रोन से निगरानी हो रही है।
ट्रैफिक को लेकर भी बड़े बदलाव किए गए। कनॉट प्लेस, जनपथ, संसद मार्ग और इंडिया गेट की तरफ जाने वाले रास्ते बंद हैं। मेट्रो के राजीव चौक, पटेल चौक और केंद्रीय सचिवालय स्टेशन पर एंट्री-एग्जिट पर रोक है। इससे ऑफिस जाने वाले लोगों को भारी परेशानी हुई। स्कूल की बसें लेट हुईं। अस्पताल जाने वाले मरीजों को दिक्कत हुई। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने एडवाइजरी जारी कर लोगों से मेट्रो और वैकल्पिक रूट इस्तेमाल करने को कहा है। दुकानदारों का कहना है कि 2 दिन से कारोबार ठप है। “प्रदर्शन करो लेकिन आम आदमी को क्यों परेशान करो?” एक दुकानदार ने कहा।
चुनाव आयोग का पक्ष
CJP का विरोध मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ है। CJP का आरोप है कि CEC ने EVM की गड़बड़ी की शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की। “वो सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं।” अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया। चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है। आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा “CEC एक संवैधानिक पद है। आयोग निष्पक्षता से काम करता है। किसी भी शिकायत पर नियम के अनुसार कार्रवाई होती है। सड़क पर प्रदर्शन से चुनाव प्रक्रिया नहीं बदलेगी।” राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2024 के बाद विपक्ष EVM को मुद्दा बना रहा है। CJP इसी मुद्दे को भुनाना चाहती है।
अब आगे क्या?
अब मामला कोर्ट और सड़क दोनों जगह जाएगा। CJP ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है। 12 अक्टूबर को सुनवाई है। वहीं पार्टी ने 15 अक्टूबर को देशभर में जेल भरो आंदोलन का ऐलान किया है। सरकार की तरफ से गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को अलर्ट किया है। कहा गया है कि कानून व्यवस्था बनी रहे। जनता की राय बटी हुई है। कुछ लोग कह रहे हैं “प्रदर्शन करना हक है लेकिन नियम से होना चाहिए।” कुछ कह रहे हैं “3000 लोगों को पकड़ना ज्यादा है। बातचीत से हल निकल सकता था।” दिल्ली पुलिस ने कहा है कि हिरासत में लिए गए 3000 में से 2500 को मुचलके पर छोड़ दिया जाएगा। 500 पर IPC की धारा 188 और 145 के तहत केस चलेगा। फिलहाल सेंट्रल दिल्ली में तनाव है। लेकिन शांति है। अब सबकी नजर 12 अक्टूबर की कोर्ट सुनवाई और 15 अक्टूबर के आंदोलन पर है।CJP का कहना है “हम झुकेंगे नहीं।” सरकार का कहना है “कानून से ऊपर कोई नहीं।” और बीच में फंसी है दिल्ली की जनता और लोकतंत्र की परिभाषा।