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देश में चीनी के दाम बड़े !

भारत में त्योहारी सीजन की शुरुआत ओर बड़े शक्कर के दाम 60 से 65 प्रति किलो तक पहुंचा। थोक बाजारों इसे दिल्ली बाजार ओर कानपुर में चीनी के दाम तेजी से बड़े । पिछले कुछ साल में  चीनी में रिकार्ड तेजी आई है । साल 2015 में खुदरा बाजार में चीनी का भाव लगभग 36 रूपये प्रति किया था जो अब बढ़कर लगभग दो गुना हो गया है।

मुख्य बाजार ओर बड़े दाम

भारत देश में पिछले कुछ हफ्तों में त्योहारी मांग और एथेनॉल उत्पादन  के लिए गन्ने डायवजन के कारण शक्कर के दाम बड़े है  उत्तर प्रदेश, ओडिसा ओर मध्यप्रदेश सामेद देश के अधिकांश खुदाय व थोक व्यापारियों ने  कीमतें बढ़कर 55 से 65 रूपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। त्योहारी सीजन से पहले भारत में चीनी के खुदरा दामों में लगभग 6 से 9% तक की तेजी आ चुकी है। 

मुख्य वजह : गन्ने का एथेनॉल में डाइवर्जन के कारण देश भर के खुदरा और थोक बाजारों में चीनी के दाम तेजी से बढ़ रहे है ।गन्ने के रस का इस्तेमाल पेट्रोल के साथ इथेनॉल मिलने के लिए ज्यादा होने से चीनी का उत्पादन प्रभावित किया जाता है ।गन्ने के रस का एथेनॉल बनाने में किया जा रहा है मगर देश में त्योहारी मांग और आपूर्ति में कमी दिखाई जा रही है ।

सरकारी कार्रवाई : स्टॉक लिमिट कटौती में  1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक बड़े त्यापोरिया ओर थोक उपभोक्ता ( जैसे मिठाई , कोल्ड डिंक और फूड कंपनिया ) के लिए स्टॉक सीमा को 30 दिन से घटाकर 15 दिन किया गया है। जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने चीनी मिलों की बिक्री के रिकॉर्ड पर कड़ी नजर रखनी शुरू कर दी है। त्योहारों के मौसम से पहले उठाए गए इन कदमों का उद्देश्य बाजार में चीनी की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और आम जनता को महंगाई से’ राहत दिलाना है।

घरेलू उत्पादन में कमी: अनुमान है कि 2025-26 सीजन में चीनी का उत्पादन लगभग 279 लाख टन रह सकता है, जबकि खपत इससे अधिक (लगभग 285 लाख टन) है। कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने लगभग एक दशक बाद टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दी है। घरेलू बाजार में गन्ने के रस व सिरप को इथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ने, मौसम की अनिश्चितता और सीमित स्टॉक के चलते चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई है।

अंतर्राष्ट्रीय बाजार: वैश्विक स्तर पर उत्पादन को लेकर अनिश्चितता ओर कम बारिश के कारण विदेशी बाजारों में भी कीमतें उच्च स्तर पर हैं। अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में चीनी का माहौल तेजी का बना हुआ है। ब्राजील और अन्य प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में मौसम संबंधी अनिश्चितताओं व अल नीनो के प्रभाव से वैश्विक आपूर्ति पर मिला-जुला असर और जोखिम बना हुआ है। भारत द्वारा 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी का ड्यूटी-फ्री आयात किए जाने से वैश्विक स्तर पर लंदन और अन्य अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों पर असर पड़ा है।

गन्ने की पैदावार : भारत में 1 एकड़ खेत में गन्ने का औसत उत्पादन सामान्यतः 300 से 400 क्विंटल (30 से 40 टन) होता है। हालांकि, अच्छी उपजाऊ मिट्टी, उन्नत बीज, और सही खाद-पानी के प्रबंधन से आधुनिक तरीकों द्वारा यह पैदावार बढ़कर 500 से 800 क्विंटल या उससे भी अधिक हो सकती है। उन्नत और प्रमाणित किस्मों का चयन करने से पैदावार अच्छी होती है। दोमट या चिकनी उपजाऊ मिट्टी गन्ने के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है। खाद और  उर्वरकों समय पर नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और जैविक खाद का सही इस्तेमाल। सिंचाई फसल की जरूरत के हिसाब से पर्याप्त और समय पर पानी देना। 

विभिन्न क्षेत्रों में चीनी के अनुमानित भाव

पूरी रसोई पर ही असर ….. तीन माह में चीनी के दाम 19 तो गुड़ के 15 रुपए तक बढ़ चुके हैं थोक बाजार (होलसेल) पंजाब और अन्य प्रमुख थोक बाजारों में भाव करीब ₹60 प्रति किलो तक चल रहे हैं।

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