बैतूल में गणेश विसर्जन के दौरान तेज शोर से छात्रा बेहोश, अस्पताल में तोड़ा दम|
बैतूल। गणेश विसर्जन का जश्न एक परिवार के लिए मातम में बदल गया। शुक्रवार रात बैतूल के जेएच कॉलेज परिसर में 17 साल की छात्रा प्रतीक्षा वर्मा की अचानक तबीयत बिगड़ी और अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया। परिजनों का आरोप है कि जुलूस में बज रहे तेज डीजे की आवाज ही मौत की वजह बनी। छात्रा की बहन वेदिका ने बताया कि डीजे का बेस इतना तेज था कि खड़े रहना मुश्किल हो रहा था। इसी दौरान प्रतीक्षा को चक्कर आया और वो बेहोश हो गई। अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक लाए जाने पर उसकी पल्स नहीं मिल रही थी और ECG फ्लैट था। पुलिस ने बताया कि प्रतीक्षा को बचपन से दिल की हल्की समस्या थी।
इस घटना के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या वाकई तेज आवाज से मौत हो सकती है? किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा है? आज के इस एक्सप्लेनर में हम 7 सवालों के जरिए समझेंगे।
DJ की तेज आवाज का दिल पर क्या असर होता है|
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आशुतोष प्रसाद त्रिपाठी बताते हैं कि तेज आवाज शरीर पर 4 तरीके से हमला करती है।
पहला: स्ट्रेस हार्मोन का बम|
जब 100 डेसिबल से ज्यादा तेज आवाज, खासकर डीजे का हैवी बेस, कान के पर्दे से टकराती है तो दिमाग उसे खतरे का सिग्नल मान लेता है। तुरंत “फाइट और फ्लाइट” मोड एक्टिव हो जाता है। शरीर में एड्रिनेलिन और कोर्टिसोल हार्मोन 2 से 3 गुना तक बढ़ जाते हैं। इससे खून की नसें सिकुड़ जाती हैं। ब्लड प्रेशर अचानक 140/90 से 180/110 तक पहुंच सकता है। धड़कन 70 से 120-130 तक चली जाती है।
दूसरा: धड़कन का बिगड़ना|
डीजे के बेस की फ्रीक्वेंसी 20 से 100 हर्ट्ज होती है। ये लो-फ्रीक्वेंसी तरंगें हवा में नहीं, शरीर में कंपन पैदा करती हैं। छाती, पेट और दिल तक वाइब्रेशन पहुंचता है। दिल का अपना इलेक्ट्रिकल सिस्टम होता है जो धड़कन को कंट्रोल करता है। तेज कंपन से ये सिस्टम डिस्टर्ब हो जाता है। धड़कन कभी बहुत तेज, कभी बहुत धीमी, कभी अनियमित हो जाती है। इसे अरिदमिया कहते हैं। अगर पूरी तरह बिगड़ जाए तो दिल एक सेकंड में काम करना बंद कर देता है। इसे सडन कार्डियक अरेस्ट कहते हैं।
तीसरा: साइलेंट ब्लॉकेज का फटना|
30 साल से कम उम्र के कई युवाओं की धमनियों में हल्का फैट जमा होता है। उन्हें पता भी नहीं होता। BP अचानक बढ़ने पर ये फैट की परत फट जाती है। शरीर उसे घाव समझकर तुरंत खून का थक्का बना देता है। ये थक्का धमनी को ब्लॉक कर देता है। 5 मिनट में दिल को खून नहीं मिलेगा तो मांसपेशी मरने लगती है। यही हार्ट अटैक है।
चौथा: ऑक्सीजन की कमी|
जुलूस में भीड़, गर्मी, धक्का-मुक्की और शोर के कारण सांस तेज हो जाती है। शरीर को ज्यादा ऑक्सीजन चाहिए। लेकिन दिल अगर पहले से कमजोर है तो वो सप्लाई नहीं कर पाता। ऑक्सीजन कम होते ही चक्कर, बेहोशी और कार्डियक अरेस्ट हो सकता है।
बैतूल में प्रतीक्षा के साथ असल में क्या हुआ था|
घटना 26 सितंबर 2026, शुक्रवार रात करीब 10 बजे की है। जेएच कॉलेज बैतूल में गणेश प्रतिमा का विसर्जन जुलूस निकला था। कॉलेज परिसर में 4 बड़े-बड़े डीजे और साउंड बॉक्स लगे थे।
बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा प्रतीक्षा वर्मा अपनी 14 साल की बहन वेदिका के साथ दर्शन करने आई थी। प्रतीक्षा SSC GD की तैयारी भी कर रही थी। वेदिका ने बताया कि डीजे इतना तेज था कि बात करना भी मुश्किल था। बेस की वजह से सीने में कंपन महसूस हो रहा था। करीब 10:15 बजे प्रतीक्षा को अचानक चक्कर आया। वो लड़खड़ाकर बैठ गई। दोस्तों ने उसे भीड़ से अलग बेंच पर लिटाया। पानी पिलाया। 2-3 मिनट में वो बेहोश हो गई। तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया। इमरजेंसी में ड्यूटी पर मौजूद डॉ. निशांत यादव ने बताया, “जब बच्ची आई तो उसकी कैरोटिड पल्स नहीं थी। ECG में फ्लैट लाइन थी। हमने CPR शुरू किया लेकिन रिस्पॉन्स नहीं मिला। शुरुआती लक्षण सडन कार्डियक अरेस्ट के थे।”
पुलिस जांच में सामने आया कि प्रतीक्षा को बचपन से दिल में हल्का छेद यानी ASD की शिकायत थी। परिवार इसका इलाज करवा रहा था। ये एक “साइलेंट रिस्क” था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी बाकी है। पुलिस ने डीजे की साउंड लेवल की भी जांच शुरू कर दी है। नियम के अनुसार सार्वजनिक जगह पर 55 डेसिबल से ज्यादा आवाज नहीं होनी चाहिए।
कितनी तेज आवाज खतरनाक है, नियम क्या कहता है
WHO के अनुसार इंसान के कान 85 डेसिबल तक 8 घंटे सहन कर सकते हैं। इससे ऊपर हर 3 डेसिबल बढ़ने पर सुरक्षित समय आधा हो जाता है।
100 डेसिबल – सिर्फ 15 मिनट
110 डेसिबल – 1.5 मिनट
120 डेसिबल – तुरंत नुकसान
डीजे का बेस अक्सर 110 से 130 डेसिबल तक पहुंच जाता है। यानी 1 मिनट में भी नुकसान। भारत में “Noise Pollution Rules 2000” के अनुसार दिन में रिहायशी इलाके में 55 डेसिबल और रात में 45 डेसिबल की लिमिट है। धार्मिक जुलूस के लिए विशेष अनुमति लेनी होती है। लेकिन जमीनी हकीकत में इसका पालन कम होता है। बैतूल पुलिस अब जुलूस वाले DJ का साउंड मीटर से टेस्ट करवा रही है।
बचाव कैसे करें, जुलूस और कार्यक्रम में क्या सावधानी रखें
डॉक्टरों की 7 सलाह:
- दूरी बनाएं: DJ के स्पीकर से कम से कम 50 मीटर दूर रहें। बेस का असर पास में सबसे ज्यादा होता है।
- ईयर प्लग लगाएं: बाजार में 20 रुपये के फोम वाले ईयर प्लग मिलते हैं। 30 डेसिबल तक आवाज कम कर देते हैं।
- पानी पीते रहें: डिहाइड्रेशन से BP और बढ़ता है। हर 15 मिनट में पानी पिएं।
- भीड़ से बचें: गर्मी और धक्का दिल पर दबाव बढ़ाता है। किनारे खड़े हों।
- दवा साथ रखें: BP और दिल के मरीज अपनी दवा साथ रखें।
- अगर दिक्कत लगे तो निकल जाएं: “शर्म” की वजह से रुके नहीं। जान जरूरी है।
- आयोजकों की जिम्मेदारी: 55 डेसिबल से ऊपर साउंड न बजाएं। हर 30 मिनट में 5 मिनट का ब्रेक दें।
प्रतीक्षा की मौत एक चेतावनी है। त्योहार मनाना गलत नहीं, लेकिन शोर की आड़ में जहर न घोला जाए। प्रशासन, आयोजक और जनता तीनों को मिलकर तय करना होगा कि जश्न की आवाज किसी की सांस न छीन ले।
परिवार और प्रशासन की प्रतिक्रिया, आगे क्या होगा
प्रतीक्षा के पिता ने कहा “हमारी बेटी शांत थी। उसे शोर बिल्कुल पसंद नहीं था। DJ वाले इतना तेज क्यों बजाते हैं? कोई रोकता क्यों नहीं?” परिवार ने DJ संचालक और आयोजकों के खिलाफ शिकायत दी है। कलेक्टर ने आदेश दिया है कि जिले में अब बिना अनुमति के तेज DJ नहीं बजेगा। स्कूल-कॉलेज के कार्यक्रम में साउंड लिमिटर लगाना अनिवार्य होगा। पुलिस ने कहा कि पोस्टमार्टम और साउंड रिपोर्ट के बाद BNS की धारा 106 और 287 के तहत केस दर्ज होगा।
प्रतीक्षा जैसी और कोई बेटी न जाए, इसके लिए अब नियम सख्त होने चाहिए।