रिजेक्शन के बाद निकली ‘लॉटरी’, गौरव तनेजा की कंपनी को मिली ₹300 करोड़ की वैल्यूएशन
टेलीविजन की दुनिया में किसी बिजनेस पिच का रिजेक्ट होना आमतौर पर असफलता के तौर पर देखा जाता है। खासकर तब, जब देश के बड़े निवेशकों के सामने कोई उद्यमी अपनी कंपनी में निवेश के लिए उम्मीद लेकर पहुंचे और उसे फंडिंग न मिले। लेकिन हर रिजेक्शन कहानी का अंत नहीं होता। कई बार वही रिजेक्शन किसी उद्यमी के लिए नए अवसरों का रास्ता खोल देता है। यूट्यूबर और एंटरप्रेन्योर गौरव तनेजा की कहानी कुछ ऐसी ही है। लोकप्रिय रियलिटी बिजनेस शो ‘Shark Tank India’ के सीजन 4 में अपने ब्रांड ‘Beast Life’ के साथ पहुंचे गौरव तनेजा को शो में शार्क्स से डील नहीं मिली। वह 1 फीसदी इक्विटी के बदले 1 करोड़ रुपये की फंडिंग मांगने पहुंचे थे। यानी उस समय उनके ब्रांड की प्रस्तावित वैल्यूएशन करीब 100 करोड़ रुपये थी। शो में डील न मिलने के बावजूद कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। शो से मिली जबरदस्त पब्लिसिटी ने उनके ब्रांड को बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचाया। इसके करीब चार महीने बाद उन्हें कंपनी के लिए 300 करोड़ रुपये की वैल्यूएशन पर फंडिंग मिली। इस बार उन्हें 1 फीसदी इक्विटी के बदले 3 करोड़ रुपये मिले। यानी जिस बिजनेस के लिए वह ‘Shark Tank India’ के मंच पर 1 फीसदी हिस्सेदारी के बदले 1 करोड़ रुपये मांग रहे थे, उसी कंपनी को कुछ समय बाद 1 फीसदी इक्विटी के लिए 3 करोड़ रुपये का निवेश मिला। इस तरह कंपनी की वैल्यूएशन 100 करोड़ रुपये से बढ़कर 300 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
कौन हैं गौरव तनेजा?
गौरव तनेजा को लोग “Flying Beast” के नाम से जानते हैं। वो पायलट, फिटनेस इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर हैं। उनका YouTube चैनल 3 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर का है। फिटनेस वीडियो, फैमिली व्लॉग और ईमानदार रिव्यू की वजह से ऑडियंस उन पर भरोसा करती है। 2022 में उन्होंने “Beast Life” ब्रांड लॉन्च किया। ये एक न्यूट्रिशन और वेलनेस ब्रांड है। प्रोटीन पाउडर, प्री-वर्कआउट, मल्टीविटामिन, वेट गेनर जैसे प्रोडक्ट। गौरव का आइडिया साफ था। मार्केट में बहुत सप्लीमेंट हैं लेकिन ज्यादातर में क्वालिटी और ट्रांसपेरेंसी की कमी है। वो एक ऐसा ब्रांड बनाना चाहते थे जहां लेबल पर जो लिखा है वही अंदर हो। तीसरे पक्ष से लैब टेस्ट, क्लीन इंग्रीडिएंट और अफोर्डेबल प्राइस। ब्रांड का नाम “Beast” इसलिए क्योंकि ये उनके यूट्यूब पर्सोना से जुड़ा है। टार्गेट ऑडियंस जिम जाने वाले यूथ, एथलीट और हेल्थ कॉन्शियस लोग। शुरुआत में टीम छोटी थी। मैन्युफैक्चरिंग थर्ड पार्टी से, मार्केटिंग खुद गौरव और उनकी पत्नी ऋतु तनेजा संभालती थीं। पहले 6 महीने में ही Beast Life ने 10 करोड़ का रेवेन्यू क्रॉस कर लिया। कारण था गौरव की ऑडियंस का ट्रस्ट। जब Flying Beast कोई प्रोडक्ट रिकमेंड करता है तो लोग खरीदते हैं। धीरे-धीरे रिटेल में भी एंट्री हुई। Amazon, Flipkart के साथ-साथ जिम सप्लीमेंट स्टोर्स में भी प्रोडक्ट आने लगे।
Shark Tank India सीजन 4 में क्या हुआ था
जनवरी 2025 में गौरव तनेजा Shark Tank India के मंच पर पहुंचे। उनके साथ को-फाउंडर और पत्नी ऋतु भी थीं। पिच सिंपल थी। 1 फीसदी इक्विटी के बदले 1 करोड़ रुपये। यानी 100 करोड़ की वैल्यूएशन। शार्क्स के सवाल तेज थे। “मार्जिन कितना है?” “CAC क्या है?” “रिटर्न रेट कितना?” “बड़े ब्रांड्स से कैसे कॉम्पीट करोगे?” गौरव ने नंबर रखे। पिछले साल 45 करोड़ का रेवेन्यू, 18% का EBITDA मार्जिन, 60% रिपीट कस्टमर। ब्रांड की ताकत उनका पर्सनल ब्रांड था। लेकिन शार्क्स कन्विंस नहीं हुए। एक शार्क ने कहा “आपका ब्रांड आप पर डिपेंडेंट है। कल को आप वीडियो बनाना बंद कर दें तो क्या होगा?” दूसरे ने कहा “न्यूट्रिशन स्पेस में कॉम्पीटिशन बहुत है। 100 करोड़ की वैल्यूएशन जस्टिफाई नहीं होती।” आखिर में कोई डील नहीं हुई। शो से बाहर निकलते समय गौरव ने कहा था “रिजेक्ट होना बुरा नहीं लगा। हमें फीडबैक मिला। अब और मेहनत करेंगे।” ये क्लिप वायरल हुई। कमेंट में लोग लिख रहे थे “Beast Life खरीदो, शार्क्स को गलत साबित करो।”
रिजेक्शन के बाद ब्रांड को मिली पब्लिसिटी का असर
यही वो टर्निंग पॉइंट था। Shark Tank भले ही डील न दे, लेकिन पब्लिसिटी दे देता है। एपिसोड टेलीकास्ट होने के 48 घंटे के अंदर Beast Life की वेबसाइट क्रैश हो गई। ट्रैफिक 10 गुना बढ़ गया। Instagram पर 5 लाख नए फॉलोवर। गौरव ने इसका फायदा उठाया। उन्होंने रोज लाइव आकर प्रोडक्ट के बारे में बताया। कस्टमर के सवालों के जवाब दिए। लैब रिपोर्ट दिखाई। “पारदर्शिता” को ब्रांड की USP बनाया। इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग पर पैसा खर्च नहीं किया। ऑर्गेनिक ग्रोथ हुई। मार्च से जून 2025 के बीच सेल 3 गुना बढ़ी। महीने का रेवेन्यू 4 करोड़ से 12 करोड़ पहुंच गया। नए प्रोडक्ट लॉन्च हुए। वीमेन न्यूट्रिशन लाइन, वेगन प्रोटीन। डिस्ट्रीब्यूशन 15 शहरों से 45 शहरों तक गया। निवेशक भी नोटिस करने लगे। जब कोई ब्रांड बिना VC फंडिंग के इतनी तेजी से बढ़े तो VC खुद अप्रोच करते हैं। गौरव को 7-8 VC फर्मों से कॉल आए।
300 करोड़ की वैल्यूएशन वाली डील कैसे हुई
मई 2025 में गौरव ने एक मुंबई बेस्ड VC फर्म के साथ बातचीत शुरू की। इस बार मांग अलग थी। 1 फीसदी के बदले 3 करोड़। यानी 300 करोड़ वैल्यूएशन। VC ने 3 महीने तक ड्यू डिलिजेंस की। फैक्ट्री विजिट, कस्टमर इंटरव्यू, फाइनेंस ऑडिट। जो नंबर गौरव ने Shark Tank में बताए थे वो अब और बेहतर थे। रेवेन्यू रन रेट 140 करोड़। ग्रॉस मार्जिन 55%। CAC 30% कम हुआ क्योंकि ब्रांड रिकॉल बढ़ गया था। डील जून 2025 में फाइनल हुई। 3 करोड़ के बदले 1% इक्विटी। लीड इन्वेस्टर ने कहा “हम Shark Tank वाला रिजेक्शन देख रहे थे। लेकिन 4 महीने में जो ग्रोथ दिखी वो बता रही थी कि ये ब्रांड स्केल करेगा। गौरव का कम्युनिटी ट्रस्ट सबसे बड़ा एसेट है।” इस फंडिंग से Beast Life ने 3 काम करने का प्लान बनाया। पहला मैन्युफैक्चरिंग में निवेश। अपना खुद का प्लांट। दूसरा R&D। स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन के लिए नए फॉर्मूले। तीसरा इंटरनेशनल एक्सपेंशन। दुबई और सिंगापुर में लॉन्च।
100 करोड़ से 300 करोड़ तक वैल्यूएशन जंप
पहला कारण ब्रांड इक्विटी। गौरव तनेजा का नाम ही भरोसा है। लोग उन्हें 10 साल से देख रहे हैं। जब वो कहते हैं “ये प्रोडक्ट मैं खुद लेता हूं” तो कन्वर्जन रेट हाई होता है। Shark Tank ने इस भरोसे को नेशनल लेवल पर पहुंचा दिया। दूसरा कारण यूनिट इकोनॉमिक्स। न्यूट्रिशन इंडस्ट्री में ज्यादातर ब्रांड मार्केटिंग पर बहुत खर्च करते हैं। Beast Life का 70% सेल डायरेक्ट टू कस्टमर है। इसलिए मार्जिन बेहतर है। रिपीट रेट भी ज्यादा क्योंकि क्वालिटी कंसिस्टेंट है। तीसरा कारण टाइमिंग। 2024-25 में इंडिया में फिटनेस मार्केट बूम कर रहा है। 20-35 साल के लोग हेल्थ पर खर्च कर रहे हैं। प्रोटीन अब “बॉडीबिल्डर” का प्रोडक्ट नहीं रहा। घर की महिलाएं, ऑफिस वर्कर भी ले रहे हैं। Beast Life ने इस वेव को पकड़ा।
आगे का रोडमैप और चैलेंज
अब चैलेंज बड़ा है। 300 करोड़ की वैल्यूएशन के साथ उम्मीदें भी बड़ी हैं। गौरव का प्लान 2026 तक 500 करोड़ रेवेन्यू का है। इसके लिए वो 3 चीजों पर फोकस कर रहे हैं। पहला प्रोडक्ट इनोवेशन। अभी 12 SKU हैं। 2026 तक 30 SKU करने का टार्गेट। स्पोर्ट्स एथलीट के लिए अलग लाइन, सीनियर सिटीजन के लिए अलग। दूसरा ऑफलाइन। अभी 80% सेल ऑनलाइन है। अगले साल 1000 जिम और 500 रिटेल स्टोर में एंट्री का प्लान। तीसरा टीम बिल्डिंग। फाउंडर डिपेंडेंसी कम करनी है। नए CMO, COO हायर हुए हैं। गौरव अब ब्रांड फेस और स्ट्रेटजी पर फोकस करेंगे। चैलेंज भी हैं। बड़े ब्रांड्स प्राइस वॉर कर सकते हैं। रेगुलेशन टाइट हो रहा है। FSSAI के नए नियम। लेकिन गौरव कॉन्फिडेंट हैं। “हमने बिना फंडिंग के 100 करोड़ तक का सफर किया। अब फंडिंग है तो 1000 करोड़ भी होगा।”
इस कहानी से स्टार्टअप फाउंडर्स क्या सीख सकते हैं
गौरव तनेजा की जर्नी हर फाउंडर के लिए केस स्टडी है। पहली सीख रिजेक्शन अंत नहीं है। Shark Tank में ना मिलने का मतलब बिजनेस खराब नहीं। कभी-कभी इन्वेस्टर का नजरिया और आपका टाइमिंग मैच नहीं करता। 4 महीने बाद उसी वैल्यूएशन का 3 गुना मिला। दूसरी सीख ऑडियंस बनाओ। गौरव के पास पहले से 3 करोड़ की ऑडियंस थी। इसलिए प्रोडक्ट लॉन्च होते ही सेल आई। मार्केटिंग पर 0 खर्च। आज के जमाने में कंटेंट सबसे बड़ा moat है। तीसरी सीख ट्रांसपेरेंसी। उन्होंने लैब रिपोर्ट, इनग्रेडिएंट सोर्स, मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस सब पब्लिक किया। कस्टमर को लगा “ये ब्रांड छिपा नहीं रहा।” ट्रस्ट बना तो रिपीट आया। चौथी सीख पर्सनल ब्रांड। लेकिन रिस्क भी। VC ने सवाल उठाया कि ब्रांड फाउंडर पर डिपेंड है। इसलिए अब गौरव टीम बना रहे हैं ताकि ब्रांड व्यक्ति से बड़ा हो। आखिर में गौरव ने एक इंटरव्यू में कहा “Shark Tank में डील नहीं मिली तो लगा फेल हो गए। लेकिन आज लगता है वही बेस्ट था। अगर उस दिन 100 करोड़ पर डील हो जाती तो आज 300 करोड़ की वैल्यूएशन नहीं मिलती। कभी-कभी ना सुनना हां से ज्यादा जरूरी होता है।” Beast Life की कहानी बताती है कि टीवी पर रिजेक्ट होना असफलता नहीं है। असली टेस्ट उसके बाद शुरू होता है। और गौरव तनेजा ने वो टेस्ट पास कर लिया। अब 300 करोड़ की वैल्यूएशन के साथ Beast Life अगले टार्गेट की तरफ दौड़ रहा है।