रोहिणी लैब का घटेगा बोझ! साउथ और सेंट्रल दिल्ली के केस अब जल्दी निपटेंगे, शेख सराय में 152 करोड़ की अत्याधुनिक FSL बनेगी
नई दिल्ली। दिल्ली में क्राइम की जांच अब तेज होगी। कोर्ट में केस भी जल्दी निपटेंगे। दिल्ली सरकार ने शेख सराय में 152 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक रीजनल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी बनाने को मंजूरी दे दी है। 840e8303 इस लैब के बनते ही रोहिणी वाली मुख्य FSL पर पड़ा 27 हजार केस का बोझ कम होगा और साउथ, साउथ-ईस्ट और सेंट्रल दिल्ली के लोगों को घर के पास ही फॉरेंसिक जांच की सुविधा मिल जाएगी। CM रेखा गुप्ता की अध्यक्षता वाली एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमेटी ने इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी है। PWD को 2 साल में यानी 2028 तक इसे बनाकर तैयार करने का टारगेट दिया गया है।
नतीजा क्या हुआ?
– जून 2025 में 27,585 केस पेंडिंग थे
– पुलिस को रिपोर्ट के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था
– कोर्ट में सुनवाई लटकती थी क्योंकि फॉरेंसिक रिपोर्ट नहीं आती थी
रोहिणी लैब के एक अधिकारी ने बताया – “पहले हम महीने में 1200 केस करते थे। अब स्टाफ और मशीन बढ़ने से 3200 केस कर रहे हैं”। लेकिन फिर भी बोझ कम नहीं हो रहा था। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी सरकार को फटकार लगाई थी – “आपकी लापरवाही की वजह से कोर्ट केस नहीं निपटा पा रहे”।
शेख सराय वाली नई FSL – क्या खास होगा?
1. लोकेशन और एरिया :ये लैब साउथ दिल्ली के शेख सराय में 6,300 वर्ग मीटर जमीन पर बनेगी। कुल बिल्टअप एरिया 18,300 वर्ग मीटर होगा।
2. किसको फायदा? :ये लैब मुख्य रूप से साउथ, साउथ-ईस्ट और सेंट्रल दिल्ली के जिलों को सर्विस देगी। पहले इन इलाकों की पुलिस को सैंपल लेकर रोहिणी जाना पड़ता था। अब 1-2 घंटे का सफर और लॉजिस्टिक की दिक्कत खत्म।
3. बजट और टाइमलाइन :कुल लागत 151.81 करोड़ रुपये। 2026-27 के बजट में इसके लिए 2 करोड़ रुपये भी रखे गए हैं। PWD को 2 साल में बनाने का निर्देश है।
4. अत्याधुनिक और एकीकृत सुविधा CM रेखा गुप्ता ने कहा – “ये इंटीग्रेटेड फॉरेंसिक सुविधा होगी जो साक्ष्यों के विश्लेषण और रिपोर्ट बनाने की प्रक्रिया को सटीक और तेज बनाएगी”।
नए कानूनों के हिसाब से क्यों जरूरी थी ये लैब?
गृह मंत्री आशीष सूद और CM रेखा गुप्ता ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू होने के बाद फॉरेंसिक जांच की मांग बहुत बढ़ गई है। अब 6 साल से ज्यादा की सजा वाले हर केस में फॉरेंसिक सबूत लेना जरूरी है। DNA, विसरा, CCTV, मोबाइल रिकॉर्ड – सबकी जांच FSL से ही होती है। CM ने कहा – “FIR के बाद प्रक्रिया इसी वजह से लटक जाती है क्योंकि रिपोर्ट समय पर नहीं मिलती”। नई लैब से ये दिक्कत खत्म होगी।
दिल्ली पुलिस और कोर्ट को क्या फायदा?
1. जल्दी चार्जशीट: फॉरेंसिक रिपोर्ट 1 महीने में मिलने से पुलिस समय पर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर पाएगी।
2. जल्दी फैसला: जज को वैज्ञानिक सबूत समय पर मिलेंगे तो मुकदमे सालों नहीं लटकेंगे।
3. सैंपल खराब नहीं होंगे: DNA, ब्लड जैसे सबूत 6 महीने में खराब हो जाते हैं। जल्दी जांच से सबूत बचेंगे। 4. दूरी की बचत: साउथ दिल्ली पुलिस को अब रोहिणी नहीं भागना पड़ेगा।
एक्सपर्ट और अधिकारी क्या कह रहे हैं?
CM रेखा गुप्ता: “हमारा मकसद है कि कोई केस पेंडिंग न रहे और पूरा सिस्टम मजबूत हो”। रोहिणी FSL अधिकारी: “स्टाफ और बेहतर मशीन की वजह से हम अब महीने में 3200 केस निपटा रहे हैं”। दिल्ली पुलिस ACP लेवल अधिकारी: “सरकार को और लैब मंजूर करनी चाहिए ताकि फॉरेंसिक टेस्ट जल्दी हों”।
आम जनता को क्या फर्क पड़ेगा?
अगर फोरेंसिक और DNA जांच की प्रक्रिया तेज होती है, तो इसका सीधा असर आम जनता को मिलने वाले न्याय पर पड़ेगा। किसी अपराध के बाद पुलिस के लिए सबसे जरूरी होता है कि घटनास्थल से मिले सबूत सुरक्षित रहें और उनकी जांच जल्द से जल्द हो। नई व्यवस्था में अगर सबूतों को कम समय में फोरेंसिक लैब तक पहुंचाया जा सकेगा, तो जांच में होने वाली देरी काफी कम हो सकती है।
1. न्याय जल्दी मिलेगा:
रेप, मर्डर, फ्रॉड और दूसरे गंभीर अपराधों में DNA रिपोर्ट और फोरेंसिक सबूत बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। कई बार रिपोर्ट आने में लंबा समय लगने से केस की जांच और सुनवाई दोनों प्रभावित होती हैं। अगर DNA और अन्य फोरेंसिक रिपोर्ट समय पर मिलेंगी, तो पुलिस तेजी से जांच पूरी कर सकेगी।
2. पुलिस की जांच होगी तेज:
घटनास्थल से जुटाए गए सबूत अगर जल्दी लैब पहुंचेंगे, तो उनकी जांच भी जल्द शुरू होगी। शेख सराय स्थित लैब तक करीब 30 मिनट में सबूत पहुंचने की व्यवस्था से पुलिस को काफी मदद मिल सकती है। इससे जांच अधिकारी लंबे समय तक रिपोर्ट का इंतजार करने के बजाय अगले कदम पर तेजी से काम कर सकेंगे।
3. भ्रष्टाचार और फाइल अटकने की गुंजाइश कम:
केस में अगर फोरेंसिक रिपोर्ट लंबे समय तक लंबित नहीं रहेगी, तो जांच की फाइल भी अनावश्यक रूप से अटकने की संभावना कम होगी। इससे जांच प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बन सकती है।
कुल मिलाकर, फोरेंसिक जांच की रफ्तार बढ़ने का सबसे बड़ा फायदा यही होगा कि अपराध के मामलों में सबूत जल्दी मिलेंगे, जांच तेजी से होगी और न्याय की प्रक्रिया को गति मिल सकती है।
दिल्ली में क्राइम बढ़ रहा है और नए कानूनों के बाद फॉरेंसिक सबूत और जरूरी हो गए हैं। एक ही रोहिणी लैब से काम नहीं चल रहा था। शेख सराय की रीजनल FSL इसी समस्या का समाधान है। 152 करोड़ की ये लैब न सिर्फ रोहिणी का बोझ घटाएगी, बल्कि दिल्ली में न्याय प्रणाली को भी तेज करेगी। अब साउथ दिल्ली का केस साउथ में ही जांच होगा। कोर्ट में फाइलें नहीं अटकेंगी। और पीड़ित को इंसाफ के लिए सालों इंतजार नहीं करना पड़ेगा।