Skip to content
-
Subscribe to our newsletter & never miss our best posts. Subscribe Now!
  • https://www.facebook.com/
  • https://twitter.com/
  • https://t.me/
  • https://www.instagram.com/
  • https://youtube.com/

तेज़, सटीक और निष्पक्ष खबरें

तेज़, सटीक और निष्पक्ष खबरें

  • प्रदेश
  • देश-दुनिया
  • राजनीति
  • बिज़नेस
  • खेल
  • ब्रेकिंग न्यूज़
  • मनोरंजन
  • टेक
  • प्रदेश
  • देश-दुनिया
  • राजनीति
  • बिज़नेस
  • खेल
  • ब्रेकिंग न्यूज़
  • मनोरंजन
  • टेक
Subscribe
Close

Search

15 साल के संघर्ष के बाद कुंवर बासित अली बने BJP के मुस्लिम चेहरे : जानिए इनकी पूरी कहानी
राजनीति

15 साल के संघर्ष के बाद कुंवर बासित अली बने BJP के मुस्लिम चेहरे : जानिए इनकी पूरी कहानी

By Riya Lodhi
October 1, 2026

राजनीति कि दुनिया में नाम बनाना आसान नहीं होता | और अगर आपका समाज , घर और अपने कि आपके फैसले के खिलाफ खड़े हो जाये तो वो रास्ता और भी कठिन हो जाता है | मेरठ के एक छोटे से गाँव कायस्थ बड्डा से निकलकर कुंवर बासित अली कि कहानी बिलकुल ऐसी ही है | ये कहानी सिर्फ एक नेता के सफ़र कि नहीं ये एक सोच , एक जिद और 15 साल के लंबे संघर्ष कि कहानी है |

शुरुआत : 2011 में लिया गया फैसला |

साल था 2011 | देश के राजनितिक माहोल गर्म था | बासित अली ने उस समय एक बहुत बड़ा फैसला लिया उन्होंने भारतीय जनता पार्टी जॉइन कर ली | सुनने में ये बात आज आसान लग सकती है , लेकिन उस वक्त एक मुस्लिम युवा के लिए बीजेपी का साथ देना बहुत ही बड़ी बात थी | उस समय मुस्लिम समाज में बीजेपी का नाम आते ही लोग नाक – भों सिकोड़ लेते थे | समाज के एक आम धारणा थी कि बीजेपी मुसलमानों के खिलाफ है | ईएसआई वजह से बासित के इस कदम को घर वालो और गाँव वालो ने बिलकुल पसंद किया |

घर में हुआ सबसे बड़ा विरोध |

बासित के पिता हामिद अली गाँव के प्रधान थे और नो बहुजन समाज पार्टी से जुड़े हुए थे | उनके BSP नेता मुनकाद अली और हाजी याकूब कुरैशी से भी आचे संबंध थे | घर पर अक्सर BSP कि बैठके होती रहती थी |जिस दिन बासित ने बीजेपी जॉइन करने कि बात कि , अगले दिन अख़बार में छप गई खबर पड़ते ही पिता का गुस्सा सातवे आसमान और पहुच गया उन्होंने गुस्से में बासित को जूते से पिटा और बासित के लिए ये सिर्फ मार नही थी , ये उनके सपने और फेसले पर पहला बड़ा वार था | कुछ दिन बाद एक और घटना सामने आए | 2012 के विधानसभा चुनाव का समय था एक ही दिन घर पर BSP और BJP दोनों का कार्यक्रम तय किया गया था | बासित ने बीजेपी के जिलाध्यक्ष से बहुत कहा कि कार्यक्रम कि तारीख बदल दो मगर वो नही माने | सुबह पिता ने BSP का कार्यक्रम कराया और मुनकाद अली के साथ प्रचार के लिए निकल गये | शाम को उसी जगह पर बीजेपी का कार्यक्रम हुआ | जब पिता को पता चला तो वो घर आए और बासित अली कि लाठियों से पिटाई कि गई | इतने दर गये बासित कि वो घर से भाग गये और गाँव के बहार जंगल में बनी ईदगाह में 2 महीने तक रहे | बाद में उनके बहनोई बिच बचाव ककर के उन्हें वापस घर ले आए |

समाज के ताने और राजनितिक चुनोतिया |

घर का विरोध झेलने के बाद हुई असली लड़ाई समाज कि लड़ाई | जब भी बासित बीजेपी का झंडा लेकर निकले तो रिश्तेदार मुह फेर लेते थे | दोस्तों के तन्ने सुनने पड़ते और पडोसी अजीब नजरो से देखते | लोग कहते ये अपना समाज को बेच रहा है |दुसरे दल के नेता उन्हें बीजेपी दल का राजनितिक ढाल कहकर मजाक उड़ाते | ज़माने पर काम करना और भी मुश्किल था क्योकि मुस्लिम इलाको में बीजेपी का सन्देश पहुचना असान था |हर गली हर चोराहे पर सवाल होते थे तुम BJP में क्यों गये | लेकिन बासित ने जबाब तानो से नही काम से दिया उन्होंने लोगो से सीधा संवाद बनाया | उनकी बात सुनी , उनकी समस्याएं समझी धीरे धीरे लोगो को लगा ये लडका सिर्फ झंडे कि लिए नही , कम के लिए आया है | बासित अली कि कहानी हमें ये सिखाती है कि जब आप भीड़ से अलग सोचते है तो तकलीफे बहुत आती है उनके पिता का विरोध , राजनीतिक तंज , समाज के ताने और सब कुछ उन्होंने सहा पर हार नही मानी आज जब वो पार्टी के मंच पर बोलते है तो पीछे 15 साल का वो संघर्ष दिखाई देता है जुते कि मार , लाठी कि बोछार , घर से बेघर और तो जंगल में रेट काटना | उनका कहना है कि राजनीती सिर्फ कुर्सी के लिए नही होती कभी कभी ये एक विचारधारा कि लड़ाई बन जाति है और जब को लड़ाई अपने ही घर से शुरू हो तो जीत का स्वाद और भी मीठा हो जाता है |

15 साल कि मेहनत का फल |

2011 में जो लड़का एक आम कार्यकर्त्ता बनकर पार्टी में आया था , उसने पिछले 15 साल में एक – एक सीडी चडी | बूथ लेवल जिला , प्रदेश और अब राष्टीय स्थर तक का सफ़र यह किया उसकी वफ़ादारी , मेहनत ओए लगातार संगठन में काम करने कि वजह से पार्टी ने उसे एक बड़ी जिम्मेदारी दी | आज कुंवर बासित अली बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्टीय अध्यक है यानी बीजेपी के अंदर मुस्लिम समाज का सबसे बड़ा चेहरा ये सफ़र इतना आसान नही था | हर कदम पर उन्हें अपनी पहचान और अपनी वफादारी दोनों साबित करनी पड़ी एक तरफ अपने समाज को ये बताना था कि ब्प्ज से नफ़रत करने से पहले समझा जाये दूसरी तरफ पार्टी के अन्दर भी ये साबित करना था कि वो सिर्फ टोकन चेहरा नहीं है |

अंत में जीत हुई |

मेरठ के कायस्थ बड्डा गाँव से निकला वो युवा जिसकी पिटाई सिर्फ इसलिए होई थी क्योकि उसने बीजेपी जॉइन कि थी आज वही युवा बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्टीय अध्यक्ष है कुंवर बासिल अली का सफ़र बताता है कि अगर इरादे पक्के हो और मेहनत सच्ची हो तो समाज कि सबसे बड़ी दीवारे भी तोड़ी जा सकती है उसकी कहानी सिर्फ एक नेता कि सफलता नही है ये उन सब लोगो के लिए प्रेरणा का विषय है जो अपनी सोच के लिए समाज से लड़ने का होसला रखती है

Tags:

बासित अली BJP
Author

Riya Lodhi

Follow Me
Other Articles
"गर्मी में पिघल जाओगी?" से "मैं इस्तीफा दे रही हूँ " तक : IAS दिव्या मित्तल ने क्यों छोड़ी नोकरी नौकरी ?, 5 बड़े विवाद
Previous

“गर्मी में पिघल जाओगी?” से “मैं इस्तीफा दे रही हूँ ” तक : IAS दिव्या मित्तल ने क्यों छोड़ी नोकरी नौकरी ?, 5 बड़े विवाद

IPHONE कि ज़िद ने ली तीन जानें ? माता पिता से बड़ा हुआ IPHONE
Next

IPHONE कि ज़िद ने ली तीन जानें ? माता पिता से बड़ा हुआ IPHONE

No Comment! Be the first one.

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

October 2026
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031  
« Sep    
Chat on WhatsApp

तेज़ , सटीक और निष्पक्ष ख़बरें

Quick Links

  • प्रदेश
  • देश-दुनिया
  • राजनीति
  • बिज़नेस
  • खेल
  • ब्रेकिंग न्यूज़
  • मनोरंजन
  • टेक

Our Policies

  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions
  • Disclaimer
  • Cookie Policy
  • Editorial Policy
  • Fact Check Policy
  • Correction Policy

Our Company

Support@citynews24x7.com
+91-90399-25050
Ward No. 4 Sanchi Road Raisen
Madhya Pradesh 464551
India
  • Facebook
  • Instagram
  • X
  • YouTube
© 2026 CityNews24x7. All Rights Reserved. Designed & Managed by Orenexa Group