“गर्मी में पिघल जाओगी?” से “मैं इस्तीफा दे रही हूँ ” तक : IAS दिव्या मित्तल ने क्यों छोड़ी नोकरी नौकरी ?, 5 बड़े विवाद
मिर्जापुर के पानी वाले काम से हुई थी फेमस 2013 बैच की IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया इस्तीफे के बाद से सीओ लगातार सुर्खियों में है दिव्या मित्तल का नाम जितना उनके कामो की वजह से चर्चा में रहा , उतना ही विवादों की वजह से भी | जिन्होंने अपने काम करने के अलग अंदाज से जनता और मीडिया दोनों का ध्यान खींचा। मिर्जापुर में पहाड़ी इलाके के एक गांव में लंबे इंतजार के बाद घर-घर नल का पानी पहुंचाना हो या देवरियो में अधिकारियों को खुले तौर पर फटकार लगाना, दिव्या मित्तल अक्सर अपने फैसलों और बयानों को लेकर चर्चा में रहीं।
कौन हैं IAS दिव्या मित्तल?
दिव्या मित्तल की कहानी पारंपरिक सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों से थोड़ी अलग है।
उन्होंने IIT दिल्ली से पढ़ाई की और इसके बाद IIM बेंगलुरु से मैनेजमेंट की पढ़ाई की। उनके पास अच्छी नौकरी और करियर की मजबूत संभावनाएं थीं, लेकिन उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया।इसके बाद उन्होंने UPSC की तैयारी की और सिविल सेवा में चयनित हुईं। वह 2013 बैच की IAS अधिकारी बनीं। उनकी शुरुआती प्रशासनिक जिम्मेदारियां मेरठ और गोंडा जैसे जिलों में रहीं। इसके बाद कानपुर नगर, बरेली विकास प्राधिकरण और संत कबीर नगर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी उन्होंने काम किया। सितंबर 2022 में उन्हें मिर्जापुर का जिलाधिकारी बनाया गया। यही वह पोस्टिंग थी, जिसने उन्हें पूरे प्रदेश में एक अलग पहचान दी। मिर्जापुर के बाद उन्हें लखनऊ में जिम्मेदारी मिली और जुलाई 2024 में वह देवरिया की जिलाधिकारी बनीं। मई 2026 में उन्हें राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर लखनऊ भेजा गया। यही उनकी आखिरी दर्ज सरकारी तैनाती रही।
पहला विवाद: मिर्जापुर में पानी पहुंचाया, लेकिन श्रेय को लेकर विवाद
लहुरियादह एक पहाड़ी इलाका है, जहां लंबे समय से पानी की समस्या बनी हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 75 साल बाद गांव के 125 घरों तक नल के जरिए पानी पहुंच पाया। यह काम दिव्या मित्तल के प्रशासनिक करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना गया। उनके लिए यह सिर्फ एक सरकारी योजना पूरी करने की बात नहीं थी, बल्कि लोगों के जीवन में सीधा बदलाव था। उन्होंने बताया कि जब गांव में पानी पहुंचा तो बुजुर्ग महिला ने कुछ नहीं कहा, बल्कि कांपते हाथों से उनका सिर छूकर आशीर्वाद दिया। दिव्या मित्तल के लिए वह क्षण किसी पद या सरकारी उपलब्धि से ज्यादा महत्वपूर्ण बन गया। लेकिन इसी काम के साथ एक विवाद भी जुड़ गया। रिपोर्टों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री एवं तत्कालीन सांसद अनुप्रिया पटेल के खेमे की ओर से कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों की अनदेखी को लेकर नाराजगी जताई गई। इसके बाद उनका मिर्जापुर से तबादला हो गया। दिलचस्प बात यह रही कि तबादले के बाद जब उन्हें विदाई दी गई तो स्थानीय लोगों ने उन पर फूल बरसाए।
दूसरा विवाद: देवरिया में जनप्रतिनिधियों से टकराव
जुलाई 2024 में उन्हें देवरिया का जिलाधिकारी बनाया गया। यहां भी उनकी कार्यशैली चर्चा में रही। जुलाई 2025 में जिला स्तर की एक दिशा समिति की बैठक में अधिकारियों और कर्मचारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर मामला गरमा गया | विधायक की तरफ से यह तर्क दिया गया कि अगर जनता अपनी शिकायत लेकर जनप्रतिनिधियों के पास आती है तो जनप्रतिनिधि अधिकारियों से सवाल जरूर पूछेंगे। इस पूरे घटनाक्रम के बाद दिव्या मित्तल और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच तनातनी की चर्चा तेज हुई। बाद में दिव्या मित्तल को देवरिया DM के पद से हटा दिया गया और उन्हें लखनऊ भेज दिया गया। इस विवाद के बाद एक बात सामने आये —जिलाधिकारी को प्रशासनिक फैसलों में कितनी स्वतंत्रता होनी चाहिए और जनप्रतिनिधियों की भूमिका की सीमा क्या होनी चाहिए? दिव्या मित्तल के समर्थकों ने इसे प्रशासनिक स्वतंत्रता से जोड़कर देखा, जबकि आलोचकों ने जनप्रतिनिधियों से बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। हा
तीसरा विवाद: “धूप ही तो है, पिघल थोड़ी जाएंगे”
दिव्या मित्तल के सबसे वायरल बयानों में से एक था—”धूप ही तो है, पिघल थोड़ी जाएंगे।”यह मामला तब सामने आया जब वह देवरिया में एक पुल निर्माण से जुड़ी समस्या का निरीक्षण कर रही थीं। निरीक्षण के दौरान तेज धूप थी। रिपोर्ट के अनुसार, एक अधिकारी ने उन्हें धूप से बचने के लिए छांव में बैठने की सलाह दी।हालांकि बयान अपने आप में हल्के-फुल्के अंदाज में कहा गया था, लेकिन सोशल मीडिया के दौर में एक छोटी-सी लाइन भी किसी अधिकारी की सार्वजनिक छवि को प्रभावित कर सकती है। एक तरफ वह “काम के लिए मैदान में उतरने वाली अधिकारी” के रूप में चर्चा में आईं,
चौथा विवाद: लेखपाल और कानूनगो को फटकार का वीडियो
दिव्या मित्तल का एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वह जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़ी शिकायत के मामले में अधिकारियों को फटकार लगाती नजर आई थीं। वीडियो में वह संबंधित अधिकारियों से नाराज दिखाई दीं और मामले की जांच के निर्देश दिए। कुछ लोगों ने कहा कि अगर अधिकारी और कर्मचारी किसी आम नागरिक की शिकायत पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं तो जिलाधिकारी का सख्त होना जरूरी है। यही दिव्या मित्तल की कार्यशैली का सबसे दिलचस्प पहलू रहा। वह कई बार सीधे मौके पर पहुंचकर अधिकारियों से सवाल करती थीं और काम में लापरवाही मिलने पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताती थीं।इससे उनकी छवि एक “सख्त अफसर” की बनी। लेकिन प्रशासन में सख्ती और व्यवहार के बीच संतुलन हमेशा एक बड़ा सवाल होता है।
पांचवां विवाद: धार्मिक कार्यक्रम और डांस को लेकर चर्चा
देवरिया में कार्यकाल के दौरान दिव्या मित्तल प्रशासनिक गतिविधियों के साथ धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में अपनी मौजूदगी को लेकर भी चर्चा में रहीं। कुछ रिपोर्टों में उनके मंदिर और धार्मिक कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से शामिल होने की बात कही गई। इसी दौरान एक मंदिर कार्यक्रम में उनके डांस का वीडियो भी चर्चा में आया। एक वर्ग ने कहा कि एक अधिकारी भी आम नागरिक की तरह सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले सकती हैं और इसमें अपने आप में कुछ गलत नहीं है। यानी यह विवाद किसी सरकारी फैसले से ज्यादा इस बात पर केंद्रित था कि एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी की सार्वजनिक छवि कैसी होनी चाहिए। यह विवाद भी दिव्या मित्तल के नाम से जुड़े चर्चित मामलों में शामिल हो गया।
क्या ट्रांसफर बना इस्तीफे की वजह?
यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है।मई 2026 में दिव्या मित्तल को देवरिया DM के पद से हटाकर लखनऊ में राजस्व विभाग का विशेष सचिव बनाया गया था। इसके बाद उनका प्रशासनिक रोल बदल गया। कुछ रिपोर्टों में इस बदलाव को उनके इस्तीफे के संदर्भ में देखा गया है। लेकिन इसे सीधे इस्तीफे का कारण बताना उचित नहीं होगा।क्योंकि खुद दिव्या मित्तल ने बाद में कहा कि उनका निर्णय अचानक नहीं था। उन्होंने इसे अपने जीवन की प्राथमिकताओं, रुचियों और परिवार से जुड़ा फैसला बताया। यानी सोशल मीडिया पर चाहे जितने कयास लगाए जा रहे हों, उपलब्ध सार्वजनिक बयानों के आधार पर इतना ही कहा जा सकता है कि उन्होंने किसी एक विवाद के कारण इस्तीफा देने की पुष्टि नहीं की है।