US से भारत तक अगले हफ्ते शेयर बाजार की चाल तह करेंगे ये 3 बड़े फैक्टर
शेयर बाजार में बीता हफ्ता निवेशको के लिए अच्छा नही रहा सेंसेक्स और निफ्टी दोनों 5 दिन की गिरावट के साथ बंद हुए अब कल से शुरू हो रहे नए हफ्ते में मार्केट की दिशा फिर बदल सकती है और इस बार असर सिर्फ भारत से नही US से लेकर ग्लोबल फैक्टर भी डालेंगे शेयर बाजार में बीता कारोबारी हफ्ता निवेशकों के लिए कुछ खास अच्छा नहीं रहा। घरेलू बाजार में लगातार दबाव देखने को मिला और सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लगातार पांच कारोबारी दिनों की गिरावट के साथ बंद हुए। इस दौरान निवेशकों के बीच ग्लोबल मार्केट को लेकर चिंता, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों को लेकर सतर्कता देखने को मिली। निवेशकों की नजर खासतौर पर भारत के GDP आंकड़ों, अमेरिका की रोजगार रिपोर्ट और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI की खरीद-बिक्री पर रहेगी। अगर इन मोर्चों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है, जबकि कमजोर आंकड़े और लगातार विदेशी बिकवाली बाजार पर दबाव बढ़ा सकती है।
पहला फैक्टर : भारत का GDP डेटा
सबसे बड़ा देता आयगा 31 अगस्त को इसी दिन सरकार वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही का GDP आकंडा जारी करेगी | इस समय ग्लोबल सप्लाई चेन में दिक्कत और एनर्जी की कीमते बड़ी हुई है ऐसे में GDP के नंबर अगर मजबूत आए तो बाजार को सहारा मिलेगा | इस समय ग्लोबल सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियां, ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बनी अनिश्चितता निवेशकों के लिए चिंता का विषय हैं। ऐसे माहौल में अगर भारत की आर्थिक विकास दर उम्मीद से बेहतर रहती है, तो इससे घरेलू बाजार को मजबूती मिल सकती है। मजबूत GDP आंकड़े इस बात का संकेत देंगे कि बाहरी चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है। इसका सकारात्मक असर निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है और बाजार में खरीदारी बढ़ सकती है।वहीं, अगर GDP के आंकड़े उम्मीद से कमजोर आते हैं तो निवेशकों की चिंता बढ़ सकती है। ऐसे में बाजार में मुनाफावसूली या अतिरिक्त बिकवाली देखने को मिल सकती है।
दूसरा फैक्टर : अमेरिका की ज़ाब रिपोर्ट
दूसरा बड़ा फैक्टर US से आयगा 4 सितंबर को अमेरिका की अगस्त महीने की रोजगार रिपोर्ट आएगी इसमे पता चलेगा की US में कितनी नई नोकरिया बनी और बेरोजगारी कितनी रही |अमेरिका के रोजगार आंकड़े दुनियाभर के वित्तीय बाजारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इसकी वजह यह है कि मजबूत या कमजोर रोजगार आंकड़े अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिति के बारे में संकेत देते हैं और आगे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों को प्रभावित कर सकते हैं।अगर अमेरिका में रोजगार के आंकड़े मजबूत रहते हैं, तो बाजार में यह उम्मीद बन सकती है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत है। दूसरी ओर, अगर आंकड़े कमजोर आते हैं तो निवेशक अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रफ्तार को लेकर चिंता कर सकते हैं।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के SVP रिसर्च अजित मिश्रा
के मुताबिक US के ये आंकड़े सिर्फ डालर और अमेरिका ब्रांड यील्ड को ही नही बल्कि भारत जैसे उभरते बाजारों पर भी असर डालेंगे रेलिगेयर ब्रोकिंग के SVP रिसर्च अजित मिश्रा के मुताबिक, अमेरिका से आने वाले ये आर्थिक आंकड़े केवल डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को ही प्रभावित नहीं करेंगे, बल्कि भारत जैसे उभरते बाजारों पर भी इनका असर देखने को मिल सकता है। खासकर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर में बड़ा उतार-चढ़ाव विदेशी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर सकता है। इसका सीधा असर भारतीय इक्विटी मार्केट पर भी देखने को मिल सकता है।
तीसरा फैक्टर : FPLs की खरीद – फरोख्त
तीसरा और सबसे अहम् फैक्टर है विदेशी निवेशको यानी FPLs की खरीद – बिक्री का सीधा असर सेंसेक्स – निफ्टी पर पड़ता है अगस्त में FPLs लगातार दुसरे महीने बिकवाली कर रहे है | अगर ये ट्रेंड अगले हफ्ते भी जारी रहा तो बाजार पर दबाव बढेगा बाजार के लिए तीसरा और बेहद अहम फैक्टर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI की खरीद-बिक्री होगी। विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
अगस्त में FPI लगातार दूसरे महीने भारतीय बाजार में बिकवाली करते नजर आए हैं। ऐसे में अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि सितंबर की शुरुआत में विदेशी निवेशकों का रुख किस तरफ रहता है।अगर विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में खरीदारी शुरू करते हैं तो इससे बाजार को मजबूत सपोर्ट मिल सकता है। खासकर ऐसे समय में जब घरेलू बाजार पहले ही लगातार गिरावट का सामना कर चुका है, विदेशी पूंजी का वापस आना सेंसेक्स और निफ्टी में रिकवरी का रास्ता खोल सकता है।
लेकिन अगर FPI की बिकवाली अगले हफ्ते भी जारी रहती है, तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। लगातार विदेशी निकासी से शेयरों की कीमतों पर असर पड़ सकता है और निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ सकती है।
ग्लोबल संकेत भी तय करेंगे बाजार की चाल
इन तीन प्रमुख फैक्टर्स के अलावा निवेशकों की नजर दुनिया के दूसरे बड़े बाजारों की गतिविधियों पर भी रहेगी। अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, डॉलर की चाल, बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतें और ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल घटनाक्रम भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए कैसा रहेगा नया हफ्ता?
कुल मिलाकर नया कारोबारी हफ्ता शेयर बाजार के लिए काफी अहम और उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है। एक तरफ मजबूत GDP आंकड़े बाजार को सहारा दे सकते हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिका की जॉब रिपोर्ट और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार की दिशा बदल सकती है।
ऐसे में निवेशकों को सिर्फ सेंसेक्स और निफ्टी की चाल देखने के बजाय घरेलू आर्थिक आंकड़ों, अमेरिकी बाजार, डॉलर, बॉन्ड यील्ड और FPI के आंकड़ों पर भी नजर रखनी होगी।
बीते हफ्ते की लगातार पांच दिनों की गिरावट के बाद अब बड़ा सवाल यही है कि क्या नया हफ्ता बाजार में नई तेजी लेकर आएगा या ग्लोबल दबाव और विदेशी बिकवाली सेंसेक्स-निफ्टी की मुश्किलें और बढ़ाएगी?