22000 करोड़ के कर्ज को लेकर घमासान ! सुभाष चंद्रा ने खोला मुकेश अंबानी के खिलाफ मोर्चा
एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा और रिलायंस के मुखिया मुकेश अंबानी के बिच जुबानी जंग तेज हो गई है | NCLT में चल रहे एक मामले को लेकर चंद्रा ने सीधे अंबानी और उनके मीडिया नेटवर्क पर गंभीर आरोप लगाए है | चंद्रा ने आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ एक “फर्जी नैरेटिव” और “विच हंटिंग” चलाया जा रहा है। उनका कहना है कि मीडिया में ज़ी ग्रुप और उनसे जुड़े वित्तीय मामलों को लेकर कई आंकड़ों और तथ्यों को सही संदर्भ के बिना पेश किया जा रहा है। खास तौर पर करीब 22,000 करोड़ रुपये के कर्ज से जुड़े आंकड़ों को लेकर उन्होंने आपत्ति जताई है। सुभाष चंद्रा का दावा है कि इस पूरे मामले को जिस तरह से सार्वजनिक तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है, उससे वास्तविक स्थिति की गलत तस्वीर सामने आ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मामले को स्पष्ट करने और अपनी बात सीधे रखने के लिए उन्होंने मुकेश अंबानी से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की और उन्हें एक पत्र भी लिखा।
क्या है पूरा विवाद ?
नई दिल्ली : सुभाष चंद्रा ने NCLT में चल रहे केस के बीच एक तीखा बयान जारी किया पहली वार उन्होंने खुलकर मुकेश अंबानी और उनके मीडिया ग्रुप TV18, CMBC , NEWS18 का नाम लिया है चंद्रा का आरोप है की उनके खिलाफ फर्जी नैगेटिव और विच हटिंग चलाई जा रही है खासतोर पर 22000 करोड़ रूपये के कर्ज के आंकड़ो को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है |उन्होंने कहा की उन्होंने हुड मुकेश अंबानी को फ़ोन भी किया और पत्र भी लिखा ताकि सच्चाई सामने रखी जा सके |
बैंको का पैसा मत चुकाओ- का बड़ा दावा
सुभाष चंद्रा ने 2019 में ZEE के साथ हुए संकट का भी जिक्र किया उनके मुताबिक जनवरी 2019 में एक में ZEE के शेयर 40% तक गिर गये थे इसके पीछे शेल कंपनियों का हाथ था चंद्रा का दावा है की जब उन्होंने कर्ज चुकाने के लिए ZEE बचने का प्रस्ताव लेकर मुकेश अंबानी से बात की थी तो अंबानी ने कथित तोर पर कहा था बैंको का पैसा और ब्याज चुकाने की जरूरत नही है
2019 के ज़ी संकट का भी किया जिक्र
अपने बयान में सुभाष चंद्रा ने साल 2019 में ज़ी एंटरटेनमेंट से जुड़े उस संकट का भी जिक्र किया, जब कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली थी। चंद्रा के मुताबिक, जनवरी 2019 के दौरान ज़ी के शेयरों में करीब 40 फीसदी तक की गिरावट आई थी। चंद्रा का आरोप है कि उस समय कंपनी के शेयरों में आई भारी गिरावट के पीछे कुछ शेल कंपनियों और बाजार में चल रही गतिविधियों की भूमिका थी। हालांकि, इन आरोपों को लेकर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और स्वतंत्र पुष्टि इस विवाद का अहम हिस्सा है।
कर्ज चुकाने के लिए ज़ी बेचने का प्रस्ताव?
सुभाष चंद्रा के मुताबिक, उस दौर में ज़ी ग्रुप गंभीर वित्तीय दबाव से गुजर रहा था और कर्ज चुकाने के लिए उन्होंने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचने का रास्ता तलाशना शुरू किया था। इसी सिलसिले में उन्होंने कथित तौर पर मुकेश अंबानी से भी बातचीत की।
चंद्रा का दावा है कि उन्होंने ज़ी को बेचकर बैंकों का कर्ज चुकाने का प्रस्ताव रखा था। उनके मुताबिक, इसी बातचीत के दौरान मुकेश अंबानी ने कथित तौर पर उन्हें सलाह दी कि बैंकों का पैसा और उस पर ब्याज चुकाने की जरूरत नहीं है। यह दावा इस पूरे विवाद का सबसे गंभीर और अहम हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह सुभाष चंद्रा का आरोप/दावा है, और इस कथित बातचीत की स्वतंत्र पुष्टि या मुकेश अंबानी की ओर से इस बयान पर प्रतिक्रिया को अलग से देखा जाना चाहिए।
22000 करोड़ का कर्ज विवाद क्या है ?
सुभाष चंद्रा ने अपने बयान में उस आंकड़े पर भी सवाल उठाया है, जिसमें उनके और ज़ी से जुड़े करीब 22,000 करोड़ रुपये के कर्ज का उल्लेख किया जा रहा है। उनका कहना है कि इस आंकड़े को जिस तरीके से पेश किया जा रहा है, वह भ्रामक है और इससे लोगों के बीच उनके वित्तीय मामलों को लेकर गलत धारणा बन रही है। उनका आरोप है कि उनके खिलाफ चल रही मीडिया कवरेज में चुनिंदा तथ्यों को प्रमुखता दी जा रही है, जबकि पूरे मामले का दूसरा पक्ष सामने नहीं रखा जा रहा।
मामला अब NCLT तक सीमित नहीं
NCLT में चल रहे मामले के बीच सामने आए इस बयान ने पूरे विवाद को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है। अब यह मामला सिर्फ कारोबारी और कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें मीडिया कवरेज, कर्ज के आंकड़ों और पुराने कारोबारी घटनाक्रम को लेकर भी आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। आने वाले समय में NCLT की कार्यवाही और संबंधित पक्षों की ओर से आने वाले जवाब इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। फिलहाल सुभाष चंद्रा के आरोपों ने मुकेश अंबानी और उनके मीडिया नेटवर्क के साथ उनके पुराने कारोबारी संबंधों को लेकर एक नई बहस जरूर छेड़ दी है।