अब घर के कोने कोने और बेसमेंट में भी मिलेगा 5G ! सरकार ने बदले मोबाइल टावर के नियम
अगर आपके घर में 5G सिग्नल नही आता था या बेंसमेंट – पार्किंग में जाते ही नेटवर्क गायब हो जाता था , तो ये खबर आपके लिए है क्रेंद्र सरकार ने मोबाइल टावरो के सिग्नल नियमो में बड़ा बदलाव कर दिया है अब एक ही टावर ज्यादा दूर तक और ज्यादा मजबूत कवरेज देगा |अगर आप भी ऐसी समस्या से परेशान हैं, तो आपके लिए यह खबर बेहद महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार ने मोबाइल टावरों से जुड़े सिग्नल और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड यानी EMF रेडिएशन की सीमा को लेकर बड़ा बदलाव किया है। इस बदलाव का उद्देश्य देश में मोबाइल नेटवर्क की कवरेज और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। सरकार के इस फैसले के बाद उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में मोबाइल नेटवर्क की पहुंच बेहतर हो सकती है। खासकर घरों के अंदर, ऊंची इमारतों, ऑफिस, बाजारों और कुछ ऐसे इलाकों में जहां अभी मोबाइल सिग्नल कमजोर रहता है, वहां नेटवर्क की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिल सकता है।
आखिर सरकार ने क्या बदलाव किया है?
सरकार ने मोबाइल टावरो के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फिल्ड रेडिएशन की लिमिट को बढाकर ग्लोबल स्टैडर्ड के बराबर कर दिया है पहले भारत में सुरक्षा के नाम पर इस लिमिट को दुनिया के मुकाबले 10 गुना कम रखा गया था इसी वजह से टावरो की रेंज हम थी और अंदर नेटवर्क की दिक्कत आती है | अब सरकार ने मोबाइल टावरों के लिए निर्धारित EMF एक्सपोजर लिमिट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल किए जाने वाले मानकों के अनुरूप करने की दिशा में बदलाव किया है। यानी टावरों को पहले की तुलना में अधिक अनुमत शक्ति के साथ सिग्नल प्रसारित करने की अनुमति मिल सकती है।यही वजह है कि इस फैसले को मोबाइल नेटवर्क की कवरेज बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस फैसले की जरूरत क्यों पड़ी ?
पिछले 1-2 साल में देश में 5G यूजर्स की संख्या बहुत तेजी से बड़ी है नतीजा यह हुआ की नेटवर्क पे लोड बढ़ गया है कॉल ड्राप होने लगे है और इन्टरनेट स्पीड बहुत ज्यादा मात्रा में गिर गई है पीक टाइम में बफरिंग की शिकायते आम हो गई है लेकिन मोबाइल टेक्नोलॉजी में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदलाव आया है। पहले जहां 2G और 3G नेटवर्क का इस्तेमाल ज्यादा होता था, वहीं अब 4G के साथ 5G का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है।अब मोबाइल फोन का इस्तेमाल सिर्फ कॉल और SMS के लिए नहीं होता। वीडियो कॉल, सोशल मीडिया, ऑनलाइन मीटिंग, OTT प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन गेमिंग, UPI पेमेंट, क्लाउड सर्विस और लगातार इंटरनेट ब्राउजिंग जैसी सेवाओं के कारण मोबाइल नेटवर्क पर डेटा ट्रैफिक कई गुना बढ़ गया है। ऐसे में नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना जरूरी हो गया है।
आपको क्या फायदा होगा ?
घर के अंदर भीतर सिग्नल ऊँची इमारतो कमरों के अंदर अब 5G आसानी से चलेगा और बेसमेंट-पार्किंग में नेटवर्क पहले जहा सिग्नल जीरो हो जाता था वह भी अब नेटवर्क मिलेगा कम कॉल ड्राप सिंग्नल मजबूत होने से कॉल बिच से नहीं कटेगा | सैद्धांतिक रूप से अगर किसी टावर को नियामकीय सीमा के भीतर अधिक ट्रांसमिशन पावर की अनुमति मिलती है, तो सिग्नल की कवरेज और इन-बिल्डिंग कवरेज बेहतर हो सकती है।लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर मोबाइल टावर अचानक कई किलोमीटर दूर तक शानदार 5G सिग्नल देने लगेगा।
क्या ये सेफ है ?
बहुत से लोग सोचेंगे की रेडिएशन बढाने से सेहत पर असर होगा सरकार के मुताबिक ये वही ग्लोबल स्टैंडर्ड है जिसे अमेरिका , यूरोप और ज्यादातर विकसित देश पहले से ही फॉलो कर रहे है मान लीजिए आपका मोबाइल एक व्यक्ति है और मोबाइल टावर एक व्यक्ति से दूर खड़ा दूसरा व्यक्ति। अगर दोनों के बीच बहुत ज्यादा दूरी है या बीच में बड़ी दीवारें हैं, तो एक-दूसरे की आवाज सुनना मुश्किल होगा। अब अगर टावर की सिग्नल क्षमता और नेटवर्क डिजाइन बेहतर किया जाता है, तो दोनों के बीच कनेक्शन बेहतर हो सकता है।टावर लगातार अलग-अलग मोबाइल डिवाइस के साथ रेडियो सिग्नल के जरिए कम्युनिकेशन करता है। आपके फोन से भी सिग्नल वापस टावर तक जाता है।
टेक्निकल बात आसान भाषा में
हर मोबाइल टावर सिग्नल भेजने के लिए रेडियो फ्रीक्वन्सी यानी EMF का इस्तेमाल करता है मान लीजिए आपका मोबाइल एक व्यक्ति है और मोबाइल टावर एक व्यक्ति से दूर खड़ा दूसरा व्यक्ति। अगर दोनों के बीच बहुत ज्यादा दूरी है या बीच में बड़ी दीवारें हैं, तो एक-दूसरे की आवाज सुनना मुश्किल होगा। अब अगर टावर की सिग्नल क्षमता और नेटवर्क डिजाइन बेहतर किया जाता है, तो दोनों के बीच कनेक्शन बेहतर हो सकता है।लेकिन मोबाइल नेटवर्क में मामला इससे कहीं ज्यादा जटिल है। टावर लगातार अलग-अलग मोबाइल डिवाइस के साथ रेडियो सिग्नल के जरिए कम्युनिकेशन करता है । आपके फोन से भी सिग्नल वापस टावर तक जाता है।
आगे क्या होगा ?
अगले 3 – 6 महीने में टेलीकाम कम्पनिया आपने टावर अपडेट करेंगी | उसके बाद घर , ऑफिस और बेसमेंट हर जगह फुल नेटवर्क मिलेगा | लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि मोबाइल नेटवर्क सिर्फ टावर की शक्ति से नहीं चलता। बेहतर नेटवर्क के लिए पर्याप्त स्पेक्ट्रम, ज्यादा क्षमता, फाइबर बैकहॉल, सही एंटीना प्लानिंग, छोटे सेल और इनडोर नेटवर्क जैसी कई चीजों की जरूरत होती है।यानी आने वाले समय में मोबाइल नेटवर्क की दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।जहां तक सुरक्षा की बात है, सरकार के अनुसार संशोधित सीमा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप है। फिर भी EMF एक्सपोजर की निगरानी और निर्धारित मानकों का पालन लगातार जरूरी रहेगा।अब वह दौर तेजी से आगे बढ़ रहा है जहां मोबाइल सिर्फ कॉल करने का साधन नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का सबसे जरूरी डिजिटल कनेक्शन बन चुका है।