छत्तीसगढ़ को मिली रेलवे की सबसे बड़ी सौगात, 8741 करोड़ की खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा लाइन से 8 जिलों की किस्मत बदलेगी
रायपुर। छत्तीसगढ़ के लिए शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक रहा।सबसे खास बात यह है कि खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा 5वीं और 6वीं रेल लाइन परियोजना पर करीब 8741 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। करीब 278 किलोमीटर लंबे नए रेलमार्ग से जुड़े इस प्रोजेक्ट में कुल 615 किलोमीटर ट्रैक का विकास प्रस्तावित है। परियोजना के तहत 21 नए रेलवे स्टेशन बनाए जाने की योजना है। इस रेल परियोजना का सीधा असर छत्तीसगढ़ के रायगढ़, जांजगीर-चांपा, सक्ती, बिलासपुर, बलौदा बाजार, रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव जिलों पर पड़ने की उम्मीद है। यानी यह सिर्फ एक रेल लाइन का निर्माण नहीं है, बल्कि राज्य के औद्योगिक, व्यापारिक और यात्री परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने वाली बड़ी परियोजना के रूप में देखी जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे “छत्तीसगढ़ के विकास का फास्ट ट्रैक” बताते हुए पीएम मोदी का आभार जताया है।चार बड़ी रेल परियोजनाओं को मंजूरी
क्या है पूरी परियोजना?
केंद्र सरकार ने सिर्फ एक नहीं बल्कि 4 बड़ी मल्टी-ट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनकी कुल लागत 18,658 करोड़ रुपये है। इन चारों प्रोजेक्ट से छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और ओडिशा के 15 जिलों को जोड़ा जाएगा और रेल नेटवर्क में 1247 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी। लेकिन छत्तीसगढ़ के लिए सबसे खास है खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा लाइन।यही वजह है कि 5वीं और 6वीं रेल लाइन के निर्माण को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई लाइनें बनने के बाद रेलवे के पास अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होंगे। इससे मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के संचालन को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। इसका सबसे बड़ा फायदा औद्योगिक क्षेत्रों को मिलने की उम्मीद है।
चार बड़ी रेल परियोजनाओं को मंजूरी
केंद्र सरकार की ओर से केवल छत्तीसगढ़ की इस परियोजना को ही मंजूरी नहीं दी गई है। कुल चार बड़ी मल्टी-ट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को मंजूरी मिली है।इन चारों परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत करीब 18,658 करोड़ रुपये बताई गई है। इन परियोजनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ के साथ-साथ महाराष्ट्र और ओडिशा के कई जिलों को रेल नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ने की योजना है।परियोजनाओं से कुल करीब 1247 किलोमीटर रेल नेटवर्क में वृद्धि होने की बात कही गई है।इनमें छत्तीसगढ़ के लिए खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा परियोजना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका प्रभाव राज्य के कई प्रमुख औद्योगिक और आबादी वाले क्षेत्रों पर पड़ने वाला है।
खरसिया से परमलकसा तक क्या बदलेगा?
खरसिया से शुरू होकर नया रायपुर और परमलकसा तक जाने वाली यह परियोजना राज्य के उत्तर-पूर्वी हिस्से से लेकर मध्य और दक्षिण-मध्य हिस्से तक रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने में मदद करेगी।परियोजना का कुल नया रेलमार्ग करीब 278 किलोमीटर बताया गया है, जबकि 5वीं और 6वीं लाइन के निर्माण के कारण कुल ट्रैक की लंबाई करीब 615 किलोमीटर होगी।रेलवे के लिए मल्टी-ट्रैकिंग का सबसे बड़ा फायदा यही होता है कि एक ही मार्ग पर ट्रेनों की संख्या बढ़ने के बावजूद संचालन को ज्यादा व्यवस्थित किया जा सकता है। जहां पहले किसी मालगाड़ी को आगे यात्री ट्रेन के निकलने का इंतजार करना पड़ सकता था, वहीं अतिरिक्त लाइनें उपलब्ध होने पर ट्रेनों को अलग-अलग ट्रैक पर संचालित करना आसान होगा।
21 नए रेलवे स्टेशन बनेंगे
में 21 नए रेलवे स्टेशनों का निर्माण भी शामिल है।
नए स्टेशन बनने का मतलब केवल ट्रेन रुकने की सुविधा नहीं है। इसके साथ आसपास के गांवों और कस्बों में आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने की संभावना भी रहती है।रेलवे स्टेशन किसी भी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़े केंद्र की तरह काम कर सकते हैं। स्टेशन के आसपास होटल, दुकानें, परिवहन, गोदाम, छोटे कारोबार और अन्य सेवाएं विकसित होती हैं।भविष्य में स्थानीय रोजगार और व्यापार के नए अवसर पैदा कर सकते हैं।
48 बड़े पुल और 349 छोटे पुल
इतनी लंबी रेल परियोजना में सिर्फ ट्रैक बिछाना ही काम नहीं होता। रास्ते में आने वाली नदियों, नालों, सड़कों और अन्य भौगोलिक बाधाओं को पार करने के लिए बड़े पैमाने पर आधारभूत संरचना तैयार करनी पड़ती है।परियोजना के तहत 48 बड़े पुल और 349 छोटे पुल बनाए जाने की योजना बताई गई है। इसके अलावा 14 रेलवे ओवरब्रिज (ROB), 184 रेलवे अंडरब्रिज (RUB) और 5 रेल फ्लाईओवर भी प्रस्तावित हैं।रेलवे क्रॉसिंग पर लंबे समय तक फाटक बंद रहने की समस्या भी कई क्षेत्रों में कम हो सकती है। ROB और RUB बनने के बाद सड़क यातायात को रेल लाइन पार करने के लिए बार-बार रुकना नहीं पड़ेगा।
माल ढुलाई की क्षमता में बड़ा इजाफा
छत्तीसगढ़ के लिए इस परियोजना का सबसे बड़ा आर्थिक फायदा माल परिवहन के क्षेत्र में देखने को मिल सकता है।आंकड़ों के अनुसार मौजूदा माल ढुलाई क्षमता करीब 21 मिलियन टन से बढ़कर लगभग 38 मिलियन टन तक पहुंच सकती है।राज्य से कोयला, सीमेंट, स्टील और दूसरे औद्योगिक उत्पाद देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजे जाते हैं। यदि रेल परिवहन की क्षमता बढ़ती है तो कंपनियों को अपने उत्पाद दूसरे राज्यों और बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिल सकती है।
युवाओं के लिए रोजगार के अवसर
इतनी बड़ी परियोजना के निर्माण से सीधे और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।निर्माण के दौरान इंजीनियरिंग, मजदूरी, परिवहन, निर्माण सामग्री, मशीनरी और अन्य सेवाओं की मांग बढ़ेगी। परियोजना पूरी होने के बाद भी नए रेलवे स्टेशन, रखरखाव, परिवहन, व्यापार और स्थानीय सेवाओं के कारण रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं।इसके अलावा रेलवे कनेक्टिविटी बढ़ने से नए उद्योग स्थापित होने की संभावना भी बढ़ सकती है।
हर साल 2520 करोड़ रुपये की बचत का दावा
परियोजना से लॉजिस्टिक्स लागत में भी बड़ी बचत का अनुमान है।हर साल करीब 2520 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।यह बचत मुख्य रूप से माल ढुलाई को अधिक प्रभावी बनाने और सड़क से रेल की ओर परिवहन बढ़ने से जुड़ी हो सकती है।और वास्तविक बचत भविष्य में परियोजना के संचालन, माल की मात्रा और परिवहन व्यवस्था पर निर्भर करेगी।फिर भी इतने बड़े स्तर की संभावित बचत बताती है कि परियोजना को आर्थिक रूप से कितना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।