सागर जहरीली शराब कांड: 13 मौतों के सरकारी आंकड़े पर सवाल, 22-27 मौतों की रिपोर्ट और पटवारी के 50+ दावे से गरमाई सियासत
सागर/भोपाल। मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब ने फिर तबाही मचा दी है। इस बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सरकार सच्चाई छिपा रही है।है। प्रशासन की ओर से फिलहाल 13 मौतों की पुष्टि की गई है, जबकि अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में मृतकों की संख्या इससे अधिक बताई गई है। वहीं मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दावा किया है कि इस हादसे में 50 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। सरकार ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि किसी भी आंकड़े को छिपाया नहीं जा रहा है। सागर की सड़कों पर मातम है, अस्पतालों में चीख-पुकार है और सियासत गर्म हो गई है।यानी इस समय सागर की जमीन पर सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर इस जहरीली शराब कांड में वास्तविक मौतों का आंकड़ा कितना है?
बंडा के गांवों से शुरू हुआ मौतों का सिलसिला
सागर जिले के अलग-अलग इलाकों में पिछले 3-4 दिनों में कुछ लोगों ने कच्ची/जहरीली शराब पी। शराब पीने के कुछ घंटों बाद ही लोगों को उल्टी, चक्कर, आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत शुरू हो गई।जब एक के बाद एक लोग बीमार होकर अस्पताल पहुंचने लगे और मौतों की खबर सामने आई, तो प्रशासन में हड़कंप मच गया। शुरुआती दौर में इसे अलग-अलग लोगों की बीमारी माना जा रहा था, लेकिन मरीजों में मिलते-जुलते लक्षण सामने आने के बाद जहरीली शराब की आशंका गहराती गई। सोमवार तक प्रशासन ने मृतकों की संख्या 13 बताई। इंडिया टुडे की 8 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक 96 लोग अस्पतालों में उपचार करा रहे थे, जिनमें सात की हालत गंभीर बताई गई। प्रशासन ने यह भी कहा कि मृतकों की उम्र लगभग 30 से 50 वर्ष के बीच थी। हालांकि दूसरी तरफ कुछ मीडिया रिपोर्टों में मौतों की संख्या 22 से 27 तक बताई गई। इसी वजह से अब सरकारी रिकॉर्ड और स्थानीय स्तर पर सामने आ रही सूचनाओं के बीच अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सरकार का जवाब
मुख्यमंत्री और गृहमंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। गृहमंत्री ने कहा – “दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। चाहे वो कितना भी बड़ा माफिया क्यों न हो।” सरकार का कहना है कि कांग्रेस “झूठा आंकड़ा” फैलाकर दहशत फैला रही है। अभी तक पोस्टमार्टम और अस्पताल के रिकॉर्ड के हिसाब से 13 मौतें ही हुई हैं।लेकिन सवाल वही है। आंकड़े का फर्क क्यों? अगर सरकारी आंकड़ा 13 है और मीडिया 22-27 बता रहा है तो 10-14 लोग कौन हैं? पटवारी का 50+ का दावा कहां से आया? स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि कई मौतें देहात में हुईं। वहां पंचनामा देर से बना। कुछ शवों का पोस्टमार्टम ही नहीं हुआ। इसलिए सरकारी सूची में नाम नहीं चढ़े।
जीतू पटवारी ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
मामले ने उस समय राजनीतिक रंग ले लिया जब मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी सागर पहुंचे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात की।पटवारी ने इस मामले को केवल शराब से जुड़ा हादसा नहीं बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी का मामला बताया। कांग्रेस की ओर से दोषी अधिकारियों और शराब कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है। विपक्ष का आरोप है कि अगर अवैध शराब का कारोबार लंबे समय से चल रहा था तो प्रशासन और आबकारी विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? सवाल यह भी है कि इतनी बड़ी संख्या में लोग एक ही तरह के लक्षणों के साथ अस्पताल कैसे पहुंचे?
मजिस्ट्रियल जांच के आदेश
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि जहरीली शराब कहां से आई, इसे किसने बनाया या सप्लाई किया, किन लोगों ने इसे बेचा और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था। इंडिया टुडे के अनुसार जांच के लिए जैसिंनगर के एसडीएम को जिम्मेदारी दी गई है। जांच में हादसे के कारणों और जिम्मेदार लोगों की पहचान के साथ भविष्य में ऐसी घटना रोकने के उपायों पर भी ध्यान दिया जाएगा।प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर मौतों की संख्या छिपाने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि वह प्रभावित परिवारों के बीच गए और उन्हें सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा मौतों की जानकारी मिली।
परिवारों का दर्द
जहरीली शराब का सबसे दर्दनाक असर उन घरों में दिखाई दे रहा है जहां अचानक किसी अपने की मौत हो गई।किसी घर में पति नहीं रहा तो कहीं पिता की मौत हो गई। कई परिवारों के सामने इलाज का खर्च और भविष्य की चिंता खड़ी हो गई है।एक पीड़ित परिवार ने कहा – “शाम को ठीक था, रात को शराब पी और सुबह नहीं रहा। अब घर कैसे चलेगा?” अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजन रो रहे हैं। कई की आंखों की रोशनी चली गई है। डॉक्टर कह रहे हैं – “जहरीली शराब में मेथेनॉल था, इसीलिए इतना नुकसान हुआ।”एक परिवार के लिए मौत सिर्फ एक आंकड़ा नहीं होती। उसके साथ पूरे घर की आर्थिक व्यवस्था, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य जुड़ा होता है।यही वजह है कि इस मामले में सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप के बजाय पीड़ित परिवारों को तत्काल राहत और लंबे समय तक सहायता की जरूरत है।
एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
डॉक्टरों के मुताबिक जहरीली शराब में मेथेनॉल मिला होता है। ये शरीर में जाकर फॉर्मिक एसिड बनाता है जो किडनी, आंख और दिमाग को खराब कर देता है। लक्षण: उल्टी, धुंधला दिखना, सांस की दिक्कत। ऐसे में तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है।रिपोर्टों के मुताबिक डॉक्टर अतिश सोनी ने शुरुआती मरीजों के मामलों में कुछ असामान्य पैटर्न देखा और अधिकारियों को अलर्ट किया। इसके बाद प्रशासनिक और मेडिकल स्तर पर कार्रवाई तेज हुई। ऐसे मामलों में शुरुआती पहचान बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि जहरीली शराब के मरीजों में लक्षण तेजी से गंभीर हो सकते हैं।
अस्पताल में भर्ती मरीजों की हालत भी नाजुक है। कई की आंखों की रोशनी चली गई। कुछ डायलिस पर हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगले 48 घंटे बहुत क्रिटिकल हैं। राजनीति अभी और गर्म होगी। विधानसभा का सत्र नजदीक है। कांग्रेस इस मुद्दे को सदन में उठाने वाली है। भाजपा का कहना है कि विपक्ष लाशों पर राजनीति कर रहा है। सागर की मिट्टी पर आज सबसे बड़ा सवाल यही है। 13, 27 या 50? संख्या कुछ भी हो, हर संख्या के पीछे एक घर उजड़ा है। एक मां का बेटा गया है। एक बच्चे का पिता। प्रशासन का काम है सच सामने लाना। पूरा सच। आंकड़े छिपाने से समस्या खत्म नहीं होगी। जब तक अवैध शराब का नेटवर्क नहीं टूटेगा, तब तक सागर, मुरैना, नीमच जैसे हादसे होते रहेंगे। फिलहाल जांच जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, अस्पताल के रिकॉर्ड और पुलिस की पूछताछ के बाद ही असली तस्वीर साफ होगी। लेकिन तब तक सागर के लोग इंतजार करेंगे। इंसाफ का भी और जवाब का भी।