‘क्राइम शो से सीखा’ – बागपत में टीवी देखकर 20 साल के युवक ने की 14 साल की किशोरी की हत्या
बागपत। उत्तर प्रदेश के बागपत से एक ऐसी वारदात सामने आई है जिसे सुनकर रूह कांप जाएगी। यहां 14 साल की एक किशोरी की पहले हत्या की गई, फिर शव को जलाने की कोशिश की गई। मामला “ब्लाइंड मर्डर” था। पुलिस के हाथ कोई सुराग नहीं लग रहा था।पुलिस के मुताबिक, किशोरी की हत्या करने के बाद उसकी पहचान छिपाने के लिए शव को बागपत लाया गया और उसे जलाने की कोशिश की गई। आरोपियों को भरोसा था कि शव जल जाने के बाद पुलिस के लिए उसकी पहचान करना और हत्या की कड़ी को आरोपियों तक पहुंचाना मुश्किल हो जाएगा।पुलिस ने इस मामले में अमन सागर और उसकी पत्नी रचना को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि हत्या में दोनों की भूमिका थी।
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि पुलिस के मुताबिक आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसने ‘CID’, ‘क्राइम पेट्रोल’ और ‘सावधान इंडिया’ जैसे क्राइम शो देखे थे और इन्हीं कार्यक्रमों से उसे शव की पहचान मिटाने तथा पुलिस को गुमराह करने का तरीका सूझा।आरोपी के बयान को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। मामले में अदालत के सामने पेश होने वाले साक्ष्यों और जांच के आधार पर ही अपराध की अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी।
आखिर क्या है पूरा मामला?
कुछ दिन पहले बागपत NH-709B के पास काठा गांव क्षेत्र में एक खेत में 14 वर्षीय किशोरी का अधजला शव मिला। शव बुरी तरह जला हुआ था। पहचान करना मुश्किल था। आसपास कोई गवाह नहीं, कोई हथियार नहीं, कोई मोटिव नहीं। पुलिस के लिए ये एकदम “ब्लाइंड केस” बन गया था। पोस्टमार्टम में पता चला कि लड़की की मौत जलने से पहले ही गला दबाने से हुई थी। यानी पहले मारा, फिर सबूत मिटाने के लिए आग लगा दी।किसी अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने के बाद जांच में आमतौर पर उसके कपड़े, सामान, मोबाइल, आसपास की CCTV फुटेज, गुमशुदगी की रिपोर्ट और दूसरे सुरागों की मदद ली जाती है।एक तरफ शव की पहचान नहीं हो पा रही थी और दूसरी तरफ यह भी साफ नहीं था कि किशोरी कौन है, वह वहां तक कैसे पहुंची और आखिर उसकी हत्या किसने की।
पुलिस ने कैसे खोला केस?
बागपत पुलिस ने 4 टीमें बनाईं। CCTV, कॉल डिटेल, गांव वालों से पूछताछ… सब किया। जांच में पता चला कि लड़की आखिरी बार गांव के ही एक युवक के साथ देखी गई थी। वो युवक 20 साल का है और लड़की को जानता था।सख्ती से पूछताछ में उसने जुर्म कबूल कर लिया। जांच का दायरा सिर्फ घटनास्थल तक सीमित नहीं रहा। पुलिस ने आसपास के इलाकों के CCTV कैमरों को खंगालना शुरू किया।रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने करीब 600 CCTV कैमरों की फुटेज देखी। इसके साथ ही करीब 2,000 से ज्यादा वाहनों की जांच की गई।काफी फुटेज खंगालने के बाद पुलिस को एक ऐसी स्कूटी दिखाई दी, जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी।
पहचान मिटाने की कोशिश क्यों की गई?
जांच में पुलिस को शक हुआ कि शव को सिर्फ हत्या के बाद वहां नहीं छोड़ा गया था, बल्कि जानबूझकर उसकी पहचान मिटाने की कोशिश की गई थी। पुलिस के मुताबिक, शव को दिल्ली से बागपत लाया गया। आरोप है कि शव को बोरे में रखा गया और फिर स्कूटी के जरिए बागपत लाया गया। इसके बाद NH-709B के पास शव को फेंक दिया गया। पुलिस का दावा है कि शव की पहचान छिपाने के लिए चेहरे पर तेजाब डाला गया और बाद में पेट्रोल डालकर उसे जलाने की कोशिश की गई। यानी हत्या के बाद आरोपियों का कथित उद्देश्य सिर्फ शव को ठिकाने लगाना नहीं था, बल्कि मृतका की पहचान को खत्म करना भी था। यही बात पुलिस की जांच में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बनी।
क्यों की हत्या? CID बना वजह
आरोपी ने पुलिस को जो बताया उसे सुनकर सब हैरान रह गए। उसने कहा – “मैं CID और क्राइम पेट्रोल बहुत देखता था। उसमें दिखाते हैं कि लाश को जला दो तो पहचान नहीं होती और पुलिस पकड़ नहीं पाती।” उसी आइडिया को उसने असल जिंदगी में उतार दिया। पुलिस के मुताबिक आरोपी और किशोरी के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था। गुस्से में उसने गला दबाकर हत्या कर दी। फिर “सबूत मिटाने” के लिए शव को खेत में ले जाकर पेट्रोल डालकर जला दिया। उसे लगा था कि शव जल जाएगा तो कोई पहचान नहीं पाएगा।कथित तौर पर उसे लगा कि अगर शव को जला दिया जाए तो मृतका की पहचान नहीं हो पाएगी और पुलिस हत्या की गुत्थी सुलझाने में सफल नहीं होगी।CCTV कैमरों ने उस रास्ते को रिकॉर्ड कर लिया, जिस रास्ते से कथित तौर पर शव को ले जाया गया था। यानी जिस तकनीक को आरोपी पुलिस से बचने के लिए इस्तेमाल करना चाहता था, उसी तकनीक ने पुलिस को उस तक पहुंचने में मदद कर दी।
क्या क्राइम शो वास्तव में अपराध सिखाते हैं?
बागपत मामले के बाद यह बहस फिर शुरू हो सकती है कि क्या क्राइम शो अपराध को बढ़ावा देते हैं? इस सवाल का जवाब इतना सीधा नहीं है। कई क्राइम शो अपराध की जांच, फोरेंसिक, पुलिस की कार्यप्रणाली और अपराधियों की गिरफ्तारी की कहानियां दिखाते हैं।इसलिए बच्चों और किशोरों के लिए उम्र के अनुसार कंटेंट देखना और अभिभावकों की निगरानी जरूरी हो सकती है। लेकिन किसी एक अपराध को सिर्फ टीवी शो के प्रभाव से जोड़ देना भी उचित नहीं होगा। अपराध के पीछे व्यक्तिगत विवाद, मानसिक स्थिति, परिस्थितियां, रिश्ते और कई दूसरे कारण हो सकते हैं। इस मामले में भी ‘CID कनेक्शन’ पुलिस की जांच और आरोपी के कथित बयान का हिस्सा है, जिसे न्यायिक जांच के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।