OTT पर धमाल मचा रही 7.7 रेटिंग वाली सीरीज, बहुली का किरदार सबसे खतरनाक
नई दिल्ली। अगर आपको क्राइम, पॉलिटिक्स और दबंगई से भरपूर सीरीज पसंद है तो ये खबर आपके लिए है। OTT पर एक ऐसी सीरीज है जिसके सिर्फ 6 एपिसोड में ही पूरी कहानी दिल पर असर कर जाती है। नाम है “मिर्जापुर”। जी हां, वही सीरीज जिसमें “बहुली” यानी पंचायत चुनाव जीतकर बनी दबंग विधायिका की एंट्री ने पूरे सीजन का रुख बदल दिया था। IMDb रेटिंग 7.7 और तीनों सीजन सुपरहिट। आज आपको इसी सीरीज के बारे में डिटेल में बताते हैं
कहानी क्या है? 6 एपिसोड में बहुली की दबंगई
“मिर्जापुर” की कहानी उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और आसपास के इलाके में सेट है। यहां का असली राजा है अखिलेश आनंद उर्फ कालीन भैया – जो अवैध कारोबार, गन फैक्ट्री और राजनीति चलाता है। लेकिन सीजन 2 में एंट्री होती है “बहुली” की। बहुली पंडित उर्फ श्वेता त्रिपाठी। पहले वो एक सीधी-सादी लड़की थी। पति की मौत के बाद ससुराल वालों ने उसे घर से निकाल दिया। लेकिन फिर उसने बदला लेने का फैसला किया। और यहीं से शुरू होती है “बहुली की दबंगई”।एपिसोड 1 से 3: बहुली पंचायत चुनाव लड़ती है। अकेले, बिना पैसे, बिना सपोर्ट। लोग हंसते हैं।
एपिसोड 4 से 5: वो चुनाव जीत जाती है। प्रधान बन जाती है। अब उसके पास पावर है। एपिसोड 6: ये टर्निंग पॉइंट है। बहुली अब “बहुली भाभी” से “बहुली नेता” बन चुकी है। वो बंदूक उठाती है, अपने दुश्मनों को सबक सिखाती है। उसका डायलॉग “मैं अब डरूंगी नहीं” वायरल हो गया था।सिर्फ 6 एपिसोड में एक कमजोर लड़की से दबंग महिला नेता बनने का सफर आपको हिला देगा।
सीरीज का नाम: मिर्जापुर
प्लेटफॉर्म: Amazon Prime Video
कुल सीजन: 3
एपिसोड: हर सीजन में 9-10, लेकिन बहुली की कहानी सबसे ज्यादा सीजन 2 के 6 एपिसोड में दिखती है
IMDb रेटिंग: 7.7/10
जॉनर: क्राइम, एक्शन, पॉलिटिकल थ्रिलर
भाषा: हिंदी
किरदार जो आपको याद रहेंगे
इसे तो मिर्जापुर में ऐसे कई किरदार है जो आपको याद रहेंगे मगर जो आपके दिल को छू-जायंगे वो किरदार है पहले तो है कालीन भैया – पंकज त्रिपाठी: मिर्जापुर का डॉन। शांत आवाज में सबसे खतरनाक बातें। दुसरे नम्बर पर है मुन्ना भैया – दिव्येंदु: कालीन का बेटा। गुस्सैल और बिगड़ैल। तीसरे नम्बर पर है गुड्डू पंडित – अली फजल: बदले की आग में जलता नौजवान। चौथे नम्बर पर है बब्लू पंडित – विक्रांत मेसी: दिमाग वाला भाई। पांचवे नमबर पर है बहुली – श्वेता त्रिपाठी: सीरीज की सबसे बड़ी सरप्राइज। सीधी से दबंग तक का सफर। छठवे नम्बर पर है गोलू गुप्ता – श्रिया पिलगांवकर: किताबों से बंदूक तक। मुख्य किरदार है | और भी किरदार आपको देखने को मिलेंगे |
3 सीजन क्यों हिट हुए?
सीजन 1 – 2018: शुरुआत में लोगों को लगा ये सिर्फ गाली और खून की सीरीज है। लेकिन कहानी और एक्टिंग ने इसे कल्ट बना दिया।
सीजन 2 – 2020: यहां असली ट्विस्ट आया। बहुली, गोलू और गुड्डू तीनों ने मोर्चा संभाला। TRP आसमान छू गई।
सीजन 3 – 2024: पॉलिटिक्स और गैंगवार और तेज हुआ। बहुली अब फुल पावर में है। वो विधायक बनने की तैयारी कर रही है।
तीनों सीजन को मिलाकर लोगों ने इसे “UP का गेम ऑफ थ्रोन्स” का नाम दे दिया।
7.7 IMDb रेटिंग क्यों मिली?
- रियलिस्टिक डायलॉग: “केहरा देब, का करे” जैसे डायलॉग आज भी मीम बनते हैं।
- पावर पॉलिटिक्स: गांव की राजनीति को जिस तरह दिखाया गया है, वो बिल्कुल रियल लगता है।
- महिला किरदार: बहुली और गोलू ने साबित किया कि क्राइम थ्रिलर सिर्फ मर्दों की नहीं होती।
- लोकेशन और सिनेमेटोग्राफी: बनारस, मिर्जापुर की गलियां किरदार बन गईं।
- एक्टिंग: पंकज त्रिपाठी, अली फजल, श्वेता त्रिपाठी – सबने जान डाल दी।
बहुली की दबंगई के 3 सबसे पावरफुल सीन
- पंचायत जीतने वाला सीन: जब रिजल्ट आता है और बहुली जीतती है। बैकग्राउंड में ढोल बजता है।
- बंदूक वाला सीन: ससुराल वाले उसे ताना मारते हैं, अगले ही पल वो बंदूक निकाल लेती है।
- “अब मैं डरूंगी नहीं” वाला डायलॉग: 6वें एपिसोड का क्लाइमैक्स। रोंगटे खड़े कर देता है।
क्या परिवार के साथ देख सकते हैं?
ईमानदारी से कहूं तो नहीं। सीरीज में गाली-गलौज, खून-खराबा और एडल्ट सीन बहुत हैं। 18+ के लिए है। लेकिन अगर आप क्राइम थ्रिलर के फैन हैं तो ये मिस नहीं करनी चाहिए। यह सीरीज फैमिली ऑडियंस के लिए बिल्कुल उपयुक्त नहीं मानी जाती।जाती। कहानी भले ही जबरदस्त क्राइम, राजनीति, बदले और सस्पेंस से भरपूर है, लेकिन इसमें कई ऐसे दृश्य और संवाद हैंइसके अलावा कुछ सीन्स काफी बोल्ड हैं, इसलिए बच्चों और बुजुर्गों के साथ इसे देखना |और आप अकेले या दोस्तों के साथ ऐसी सीरीज देखने के लिए सहज हैं, तो मिर्जापुर आपके लिए मनोरंजन का अच्छा विकल्प हो सकती है।कुल मिलाकर, मिर्जापुर फैमिली के साथ देखने वाली सीरीज नहीं है। इसे देखने से पहले उम्र-सीमा और कंटेंट को ध्यान में रखना बेहतर रहेगा।
संक्षेप में: क्यों देखें “मिर्जापुर”?
क्योंकि ये सिर्फ क्राइम की कहानी नहीं है। ये पावर, बदला और सर्वाइवल की कहानी है। और इस कहानी की सबसे बड़ी ताकत है बहुली। 6 एपिसोड में उसने साबित कर दिया कि औरत अगर ठान ले तो सिस्टम भी हिला सकती है। 7.7 IMDb रेटिंग, दमदार एक्टिंग और “बिंज वॉच” वाली कहानी। वीकेंड पर 1 दिन में पूरा सीजन खत्म कर दोगे।इस सीजन की सबसे खास बात इसके किरदार हैं। खासकर बहुली का किरदार कहानी में एक अलग ही ऊर्जा लेकर आता है। वह सिर्फ परिस्थितियों का सामना नहीं करती, बल्कि अपने फैसलों से पूरे पावर गेम को प्रभावित करती नजर आती है। यही वजह है कि उसके किरदार को लेकर दर्शकों में काफी उत्सुकता रहती है।हैं। हर एपिसोड के बाद ऐसा लगता है कि अब आगे क्या होगा? यही उत्सुकता आपको अगला एपिसोड तुरंत देखने पर मजबूर करती है।अगर आपको ऐसी कहानियां पसंद हैं जिनमें पावर, बदला, क्राइम और ट्विस्ट का तड़का हो, तो “मिर्जापुर” को अपनी वॉचलिस्ट में जरूर शामिल कर सकते हैं। वीकेंड पर बिंज-वॉच के लिए यह एक शानदार विकल्प है।