Delhi में कल से गूंजेगा BRICS का डंका, भारत मंडपम में 18वां शिखर सम्मेलन शुरू, PM मोदी करेंगे मेजबानी
नई दिल्ली। कल से “दिल्ली का भारत मंडपम” दुनिया की 11 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की मेजबानी करेगा। 18वां BRICS शिखर सम्मेलन कल से शुरू हो रहा है और 2 दिन तक चलेगा। इस बार मेजबानी “भारत” कर रहा है और PM “नरेंद्र मोदी” अध्यक्ष हैं।BRICS में अब सिर्फ 5 देश नहीं रहे। अब ये 11 देशों का बड़ा ग्रुप बन चुका है। ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका के साथ अब मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और UAE भी शामिल हो गए हैं। इस बार का थीम है – “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण।” मतलब दुनिया की बदलती हालत में कैसे साथ मिलकर मजबूत, नया और टिकाऊ भविष्य बनाया जाए।
कौन-कौन आ रहा है दिल्ली?
ये शिखर सम्मेलन वाकई “ग्लोबल” है। दुनिया के बड़े-बड़े नेता आ रहे हैं।
राष्ट्रपति स्तर पर आने वाले नेता:
- रूस: राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन – कल रात ही दिल्ली पहुंच गए
- चीन: राष्ट्रपति शी जिनपिंग
- दक्षिण अफ्रीका: राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा – आज सुबह पहुंचेंगे
- मिस्र: राष्ट्रपति अब्दुल फताह अल-सिसी
- इंडोनेशिया: राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो
- ईरान: राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन
बाकी बड़े नाम:
7. UAE: अबू धाबी के युवराज शेख खालेद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नहयान
8. इथियोपिया: प्रधानमंत्री आबी अहमद अली
9. मलेशिया: प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम – गेस्ट कंट्री के तौर पर
10. वियतनाम: प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग – गेस्ट कंट्री के तौर पर
कौन नहीं आ रहा?
ब्राजील और सऊदी अरब के बड़े नेताओं की जगह विदेश मंत्री संभालेंगे प्रतिनिधित्व आगामी महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठक में ब्राजील और सऊदी अरब के शीर्ष नेताओं की गैरमौजूदगी देखने को मिलेगी। ब्राजील के राष्ट्रपति इस बैठक में शामिल नहीं होंगे। उनकी जगह देश के विदेश मंत्री माउरु वीएइरा प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए बैठक में हिस्सा लेंगे।इसी तरह सऊदी अरब की ओर से भी क्राउन प्रिंस के बैठक में शामिल होने की संभावना नहीं है। उनकी जगह सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।खास बात यह है कि शीर्ष नेताओं की जगह विदेश मंत्रियों के आने के बावजूद दोनों देश बैठक को लेकर अपनी प्रतिबद्धता बनाए हुए हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि दोनों देश अंतरराष्ट्रीय सहयोग और कूटनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने के इच्छुक हैं। अब नजर इस बात पर होगी कि बैठक में ब्राजील और सऊदी अरब किन मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं और दूसरे देशों के साथ उनके प्रतिनिधियों की क्या अहम बातचीत होती है।
और भी कौन?
संयुक्त राष्ट्र, WHO और NDB बैंक के प्रमुख भी बैठक में होंगे शामिल
इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठक में दुनिया के कई बड़े संस्थानों के प्रमुख भी हिस्सा लेने वाले हैं। इनमें संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के डायरेक्टर जनरल डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस और न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की अध्यक्ष डिल्मा रूसेफ प्रमुख नाम हैं।इसके अलावा न्यू डेवलपमेंट बैंक की अध्यक्ष डिल्मा रूसेफ की मौजूदगी आर्थिक और विकास संबंधी मुद्दों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। NDB विकासशील देशों में बुनियादी ढांचे और सतत विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस तरह बैठक में राजनीतिक नेतृत्व के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संगठनों और वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों की मौजूदगी इसे व्यापक वैश्विक मंच का रूप देती है। अलग-अलग क्षेत्रों के शीर्ष प्रतिनिधियों के एक साथ आने से आर्थिक विकास, स्वास्थ्य, वैश्विक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद है।
भारत की 2026 अध्यक्षता का थीम क्या है?
भारत की 2026 की अध्यक्षता के लिए एक ऐसा थीम चुना गया है, जो बदलती वैश्विक परिस्थितियों में देश की प्राथमिकताओं और सोच को दर्शाता है। भारत ने अपनी अध्यक्षता के लिए चार महत्वपूर्ण शब्दों को आधार बनाया है—Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability। लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास। इन चारों शब्दों के जरिए भारत ने दुनिया के सामने एक ऐसा विजन रखने की कोशिश की है, जिसमें मुश्किल परिस्थितियों से मजबूती के साथ निपटने, नई तकनीक और विचारों को बढ़ावा देने, देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए टिकाऊ विकास सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
BRICS अब 11 का ग्रुप क्यों बना?
पहले BRICS में 5 देश थे। लेकिन 2024 में 6 नए देश जुड़े। क्यों? क्योंकि दुनिया अब “वेस्ट vs बाकी” में बंट रही है। विकासशील देश चाहते हैं कि IMF, वर्ल्ड बैंक के अलावा उनका भी अपना प्लेटफॉर्म हो। अब BRICS की GDP दुनिया की 35% है। आबादी 45%। और तेल का 50% इन्हीं देशों के पास है। इसलिए अब BRICS की हर बात मायने रखती है।
दिल्लीवासियों के लिए क्या? दो दिन ट्रैफिक की परेशानी,
राजधानी दिल्ली में होने वाले इस बड़े शिखर सम्मेलन का असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिखाई देगा। सम्मेलन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली के कुछ इलाकों में करीब दो दिनों तक ट्रैफिक की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कई प्रमुख सड़कों पर वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया जा सकता है और कुछ रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्जन भी लागू किए जाने की संभावना है।इस आयोजन से भारत को अपनी कूटनीतिक ताकत, आर्थिक क्षमता और वैश्विक नेतृत्व दिखाने का मौका मिलेगा। दिल्ली को भी एक प्रमुख वैश्विक आयोजन स्थल के तौर पर अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी। सरकार की ओर से इसे भारत की विदेश नीति और कूटनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण अवसर बताया गया है। सरकार का कहना है कि “ये शिखर सम्मेलन भारत की कूटनीति की सबसे बड़ी जीत होगी।”