“चेक रुके, FD अटकी, ATM खाली: MP में बैंक बंद से आम जनता परेशान, सरकार पर दबाव”
भोपाल/रायपुर। फाइव-डे वर्किंग और हफ्ते में 2 छुट्टी की मांग को लेकर बैंक कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। आज मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बैंक कर्मी हड़ताल पर उतर गए। नतीजा – MP में 8707 में से 7000 बैंक शाखाएं बंद हैं और करीब 42 हजार कर्मचारी काम पर नहीं आए। सिर्फ आज ही 5500 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। चेक क्लियर नहीं हुए, FD नहीं बनी, सरकारी काम रुके और ATM में भी कैश की दिक्कत आई। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है – “अगर मांग नहीं मानी तो 26, 27, 28 सितंबर को फिर हड़ताल करेंगे और 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे।”
आखिर मांग क्या है? बैंक कर्मचारी 2 मुख्य मांग कर रहे हैं:
5-Day Working: हफ्ते में सिर्फ 5 दिन काम, शनिवार-रविवार छुट्टी
40 मिनट एक्स्ट्रा: बदले में वो रोज 40 मिनट ज्यादा काम करने को तैयार हैं
MPBEA के चेयरमैन मोहनकृष्ण शुक्ला ने कहा – “सरकार के बाकी सभी विभागों में 5 दिन का काम और 2 दिन की छुट्टी है। फिर बैंक कर्मचारियों के साथ भेदभाव क्यों? हम 40 मिनट एक्स्ट्रा देने को तैयार हैं, बस सप्ताह में 2 छुट्टी दे दीजिए।” उनका तर्क है – “इससे आम जनता को कोई दिक्कत नहीं होगी। सिर्फ बड़े कॉरपोरेट और शेयर मार्केट का काम 2 दिन रुकेगा। आम आदमी UPI, ATM से काम चला लेगा।”
कल क्या हुआ, ग्राउंड जीरो की रिपोर्ट
आज बुधवार 17 सितंबर 2026 को सुबह 10 बजे से ही MP के सभी जिलों में बैंक के शटर डाउन थे।
भोपाल: MP भवन के सामने SBI, PNB, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक सब बंद। गेट पर ताला और पोस्टर “5-Day Banking, We Want Justice”। 200 से ज्यादा कर्मचारी नारेबाजी कर रहे थे।
इंदौर: 450 में से 380 शाखाएं बंद। सराफा बाजार में चेक क्लियर न होने से व्यापारियों की दिक्कत। एक ज्वेलर ने कहा “3 लाख का चेक अटका है। UPI से इतना बड़ा पेमेंट नहीं हो सकता।”
जबलपुर: यहां 320 शाखाएं बंद। सरकारी पेंशन लेने आए बुजुर्ग वापस लौट गए। एक दादा ने कहा “बेटा UPI नहीं चलाता। अब 20 तारीख को आना पड़ेगा।”
ग्वालियर, सागर, रीवा, उज्जैन: हर जगह यही हाल। कुल 8707 शाखाओं में से 7000 बंद। सिर्फ 1700 शाखाएं खुलीं, वो भी ग्रामीण बैंक और कुछ प्राइवेट बैंक।
छत्तीसगढ़ में भी 4200 में से 3400 शाखाएं बंद रहीं। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग में विरोध प्रदर्शन हुए। भारतीय बैंक संघ IBA के आंकड़े के अनुसार सिर्फ MP-CG में आज 5500 करोड़ का लेनदेन प्रभावित हुआ। इसमें 1200 करोड़ के चेक क्लियरेंस, 800 करोड़ की FD, 2000 करोड़ का सरकारी भुगतान और 1500 करोड़ का अन्य कारोबार शामिल है।
कर्मचारियों की मांग क्या है, डिटेल में समझिए
ये हड़ताल अचानक नहीं है। 6 महीने से बातचीत चल रही थी।
मांग 1: 5-Day Banking
अभी बैंक हफ्ते में 6 दिन खुलते हैं। पहला और तीसरा शनिवार बंद, दूसरा और चौथा शनिवार खुला। मतलब महीने में 2 शनिवार छुट्टी, 2 शनिवार ड्यूटी। कर्मचारी चाहते हैं “हफ्ते में 5 दिन काम, शनि-रवि दोनों छुट्टी।” जैसे सरकारी दफ्तर।
बदले में वो क्या देंगे?
मांग 2: 40 मिनट एक्स्ट्रा
अभी बैंक 10 बजे से 5 बजे तक 7 घंटे खुलते हैं। कर्मचारी कह रहे हैं “हम 10 बजे से 5:40 तक 7 घंटे 40 मिनट काम करेंगे। कुल 40 मिनट रोज एक्स्ट्रा। महीने में 16 घंटे ज्यादा। इससे घंटे का नुकसान पूरा हो जाएगा।” MPBEA चेयरमैन मोहनकृष्ण शुक्ला ने कहा “हम प्रोडक्टिविटी बढ़ाने को तैयार हैं। लेकिन वर्क-लाइफ बैलेंस भी चाहिए। RBI, SEBI सब 5 दिन करते हैं। बैंक ही 6 दिन क्यों?”
उनका दूसरा तर्क: “स्टाफ की कमी है। एक आदमी 3 आदमी का काम कर रहा है। शनिवार को भीड़ ज्यादा होती है। 2 दिन की छुट्टी से रिलैक्सेशन मिलेगा तो सर्विस बेहतर होगी।”
सरकार और IBA क्या कह रहे हैं
वित्त मंत्रालय ने अभी तक कोई ठोस जवाब नहीं दिया। सूत्रों का कहना है “सरकार सिद्धांत में सहमत है लेकिन RBI और IBA को मनाना बाकी है।” IBA ने पिछली मीटिंग में कहा था “5 दिन बैंकिंग से क्रेडिट और सरकारी काम प्रभावित होगा। शेयर मार्केट सोमवार से शुक्रवार चलता है। शनिवार को सेटलमेंट कौन करेगा?” RBI का तर्क: “ग्रामीण इलाकों में अभी भी ब्रांच पर निर्भरता है। UPI हर जगह नहीं पहुंचा।” लेकिन कर्मचारी मानने को तैयार नहीं। उन्होंने 15 अगस्त को अल्टीमेटम दिया था। आज हड़ताल उसी का नतीजा है।
आम जनता पर क्या असर पड़ा
सबसे ज्यादा दिक्कत 3 वर्ग को हुई।
- सरकारी काम: पेंशन, सब्सिडी, मनरेगा का पैसा। MP में 1.2 करोड़ लोगों को पेंशन बैंक से मिलती है। आज कई लोग खाली हाथ लौटे।
- व्यापारी: चेक क्लियरेंस रुका। इंदौर के होलसेल व्यापारी संघ ने कहा “आज 300 करोड़ का चेक पेंडिंग है। कल तक क्लियर न हुआ तो सप्लाई रुकेगी।”
- लोन और FD: होम लोन की EMI, नई FD, किसान क्रेडिट कार्ड। ये सब ब्रांच से ही होता है।
लेकिन एक राहत की बात: UPI, IMPS, ATM कार्ड काम कर रहे थे।
UPI के भरोसे जनता, डिजिटल का टेस्ट
हड़ताल के बीच UPI हीरो बनकर आया। आज MP में UPI ट्रांजैक्शन सामान्य दिन से 22% ज्यादा हुए। PhonePe का डेटा कहता है भोपाल में 18 लाख, इंदौर में 22 लाख ट्रांजैक्शन हुए। एक किराना दुकानदार ने कहा “पहले लोग 500 का नोट मांगते थे। आज सबने कहा भैया UPI कर दो।” लेकिन दिक्कत भी आई। ATM में कैश नहीं भरा गया क्योंकि कैश वैन के कर्मचारी भी हड़ताल पर थे। भोपाल के 40% ATM में “No Cash” का बोर्ड लगा था। ग्रामीण इलाकों में समस्या ज्यादा। दतिया के एक गांव में नेटवर्क नहीं। वहां लोग 10 KM दूर जाकर भी बैंक बंद पाकर लौट आए। डिजिटल एक्सपर्ट का कहना है “ये हड़ताल ने दिखा दिया कि भारत अब UPI के बिना नहीं रह सकता। लेकिन 100% डिजिटल होने में अभी 3-4 साल लगेंगे।”
5500 करोड़ का खेल कहां अटका
IBA ने नुकसान का ब्रेकअप दिया।
चेक क्लियरेंस: 1200 करोड़। क्लियरिंग हाउस बंद।
सरकारी भुगतान: 2000 करोड़। ट्रेजरी, टैक्स, पेंशन।
FD और निवेश: 800 करोड़।
लोन डिस्बर्समेंट: 700 करोड़।
अन्य: 800 करोड़।
बैंकरों का कहना है “एक दिन का नुकसान तो भर जाएगा। लेकिन अगर 26-27-28 को फिर हड़ताल हुई तो 15 हजार करोड़ का झटका लगेगा।”
आगे क्या होगा, कर्मचारियों की चेतावनी
यूनियन ने पहले ही रोडमैप दे दिया है।
पहला चरण: 26, 27, 28 सितंबर को 3 दिन की हड़ताल।
दूसरा चरण: अगर बात नहीं बनी तो 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल।
मोहनकृष्ण शुक्ला ने कहा “हम बातचीत के लिए तैयार हैं। सरकार 30 सितंबर तक मीटिंग बुलाए। वरना त्योहारों के सीजन में बैंकिंग ठप हो जाएगी।” दिवाली 5 नवंबर को है। उससे पहले अनिश्चितकालीन हड़ताल का मतलब कैश क्राइसिस।
दूसरे राज्य और देश में क्या स्थिति है, राजनीतिक प्रतिक्रिया
केरल, तमिलनाडु, बंगाल में भी आज हड़ताल का असर था। वहां 60% शाखाएं बंद रहीं। दुनिया में ज्यादातर देशों में बैंक 5 दिन ही खुलते हैं। अमेरिका, UK, ऑस्ट्रेलिया, जापान सब। भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश ही 6 दिन वाले हैं। इसलिए कर्मचारी कहते हैं “हम ग्लोबल स्टैंडर्ड मांग रहे हैं।”
MP के CM मोहन यादव ने कहा “कर्मचारियों की मांग जायज है। केंद्र से बात करेंगे। लेकिन जनता को तकलीफ न हो इसका भी ध्यान रखना है।” कांग्रेस ने समर्थन किया। पूर्व CM कमलनाथ ने कहा “5 दिन बैंकिंग समय की मांग है। सरकार को मानना चाहिए।”
एक्सपर्ट की राय: हल क्या है
बैंकिंग एक्सपर्ट अरुण तिवारी कहते हैं “समाधान बीच का रास्ता है।”
पहला: शहरी ब्रांच 5 दिन, ग्रामीण ब्रांच 6 दिन।
दूसरा: शनिवार को सिर्फ 4 घंटे “हाफ डे”।
तीसरा: UPI और BC सखी को और मजबूत करो ताकि ब्रांच पर निर्भरता कम हो।
लेकिन कर्मचारी “ऑल ऑर नथिंग” पर अड़े हैं।
आज MP में 7000 बैंक बंद। 42 हजार कर्मचारी सड़क पर। 5500 करोड़ का कारोबार रुका। लेकिन UPI चला, फोन पेमेंट चला। इससे साबित हुआ कि भारत का बैंकिंग अब सिर्फ ब्रांच पर नहीं टिका। अब गेंद सरकार और IBA के पाले में है। 30 सितंबर तक मीटिंग हुई तो ठीक। नहीं हुई तो 26 सितंबर को फिर ताले लटकेंगे। और अगर 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल हुई तो दिवाली से पहले कैश और चेक दोनों का संकट आ सकता है। फिलहाल आम आदमी के पास एक ही ऑप्शन है – UPI ऑन रखिए, थोड़ा कैश घर में रखिए। क्योंकि बैंक बंद हो सकते हैं, लेकिन जिंदगी नहीं रुकनी चाहिए।