BJP विधायक फंसे! PM मोदी के स्कूल फ्रेंड ने लगाये गंभीर आरोप, कहा-जाली दस्तावेज से हड़पी 2810 वर्ग मीटर जमीन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक पुराने स्कूल दोस्त ने 8 सितंबर को उनसे मुलाकात करके देश की सबसे बड़ी ताकत से न्याय लगाई असगरअली वोरा, 81 साल, जो PM मोदी के साथ गुजरात के वडनगर के BN स्कूल में पड़े थे, ने महाराष्ट्र के भंयादर में हुए एक बड़े जमीन घोटाले की शिकायत सीधे प्रधानमंत्री से की | वोरा का आरोप है की BJP विधायक नरेंद्र मेहता से जुडी कम्पनी ने 1989 में खरीदी गई उनकी 2,810 वर्ग मीटर जमीन पर जाली दस्तावेज बनाकर कब्जा क्र लिया | उन्होंने इस पुरे मामले की CBI जाँच की मांग की है | PM से मुलाकात के बाद महाराष्ट्र के ट्रांसपोर्ट मंत्री प्रताप सरनाईक ने फोटो शेयर करके कहा – PM अपने दोस्त को न्याय जरुर दिलायंगे | इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और 16 सितंबर को सुनवाई तह कर डी गई |
कौन हैं असगरअली वोरा? PM मोदी के स्कूल के दोस्त
असगरअली वोरा वडनगर के रहने वाले हैं। उनका दावा है कि वो 1950 के दशक में वडनगर के BN हाई स्कूल में नरेंद्र मोदी के साथ पढ़ते थे।दोनों की उम्र में करीब 1 साल का फर्क है। PM मोदी का जन्म 1950 में हुआ और वोरा का 1945 में। वोरा पिछले 40 साल से महाराष्ट्र के मीरा-भायंदर में रहते हैं। उन्होंने कहा – “मैं पीएम साहब से 60 साल बाद मिला। उन्होंने मुझे पहचान लिया और मेरी बात ध्यान से सुनी।”
पूरा मामला क्या है? 1989 की जमीन का विवाद
यह पूरा मामला मीरा-भायंदर के भायंदर पूर्व स्थित नवघर इलाके की करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन से जुड़ा है। असगरअली वोरा के मुताबिक, उन्होंने यह जमीन 1989 में रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के जरिए खरीदी थी। उनका दावा है कि जमीन खरीदने के बाद से इसके कागजात लगातार उनके पास रहे हैं और उन्होंने यह जमीन न तो किसी को बेची और न ही किसी दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर की।वोरा का कहना है कि जमीन की खरीद का एग्रीमेंट बाकायदा रजिस्टर्ड था और आज भी उनके पास इससे जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं। उनका साफ कहना है—“मैंने ये जमीन खरीदी थी। न इसे बेचा और न ही किसी को दी। जमीन के पेपर आज भी मेरे पास हैं।”कि करीब 37 साल पहले खरीदी गई जमीन पर अब अधिकार को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। वोरा अपने पुराने रजिस्टर्ड दस्तावेजों के आधार पर जमीन पर अपना हक बता रहे हैं। अब इस मामले में पुराने रिकॉर्ड, रजिस्टर्ड एग्रीमेंट और जमीन से जुड़े दूसरे दस्तावेजों की भूमिका अहम हो गई है।
11 साल में क्या हुआ? FIR से CID रिपोर्ट तक
2015: वोरा ने जालसाजी की FIR दर्ज कराई। मामला कोर्ट गया।
2015 से 2026: 11 साल तक CID रिपोर्ट नहीं आई।
2026: आखिरकार CID रिपोर्ट कोर्ट में पेश हुई। वोरा का आरोप – “11 साल जानबूझकर लटकाया गया क्योंकि राजनीतिक दबाव था।” 2025 का नया मोड़: वोरा का कहना है कि बिना नोटिस दिए उनके खिलाफ ही जवाबी मुकदमा दायर कर दिया गया। उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका भी नहीं मिला।
PM मोदी से मुलाकात-8 सितंबर 2026
जमीन विवाद को लेकर असगरअली वोरा ने 8 सितंबर 2026 को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने की बात कही है। वोरा के मुताबिक, उनकी PM मोदी से करीब 10 मिनट तक बातचीत हुई। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री के सामने जमीन से जुड़े अपने दस्तावेज रखे और पूरे मामले की जानकारी दी।
क्या कहा वोरा ने?
वोरा का कहना है कि उन्होंने PM मोदी को जमीन से जुड़े सभी कागजात दिखाए और बताया कि उनके मुताबिक किस तरह उनकी जमीन पर कब्जा किया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग भी रखी। वोरा ने कहा कि उन्होंने PM से गुहार लगाई कि अगर मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद है। वोरा के अनुसार, PM मोदी ने उनकी बात ध्यान से सुनी और मामले को लेकर अधिकारियों को जरूरी निर्देश देने की बात कही। हालांकि, इस मुलाकात और प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया से जुड़ी ये बातें वोरा के बयान पर आधारित हैं। इस मुलाकात के बाद महाराष्ट्र के ट्रांसपोर्ट मंत्री प्रताप सरनाईक ने दोनों की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की। पोस्ट में उन्होंने लिखा कि “PM अपने बचपन के दोस्त को न्याय दिलाएंगे। महाराष्ट्र सरकार इस मामले में पूरी मदद करेगी।” अब इस पूरे मामले में वोरा की शिकायत, जमीन के पुराने दस्तावेज और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर नजर रहेगी।
BJP विधायक नरेंद्र मेहता का पक्ष क्या है?
जमीन विवाद को लेकर BJP विधायक नरेंद्र मेहता की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।इस मामले में सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस के वकील ने कंपनी का पक्ष रखते हुए जमीन से जुड़े दस्तावेजों को वैध बताया है। वकील का कहना है कि कंपनी के पास जमीन से संबंधित सभी जरूरी कागजात मौजूद हैं और जमीन की खरीद 2011 में कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई थी।“हमारे पास सारे कागज वैध हैं। 2011 में लीगल तरीके से जमीन खरीदी गई थी।” यानी कंपनी का दावा हैइस तरह फिलहाल इस विवाद में एक तरफ असगरअली वोरा 1989 की खरीद और अपने पुराने दस्तावेजों के आधार पर जमीन पर दावा कर रहे हैं,
राजनीतिक एंगल क्या है?
यह मामला जमीन के विवाद से आगे बढ़कर राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है, क्योंकि विवादित जमीन से जुड़ी कंपनी सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस का नाम BJP विधायक नरेंद्र मेहता से जोड़ा जा रहा है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि जमीन पर कब्जे और दस्तावेजों को लेकर लगे आरोप अभी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा हैं। वोरा ने इन कंपनियों और मेहता से जुड़े होने के आरोप लगाए हैं, जबकि कंपनी ने अपने दस्तावेजों को वैध बताया है।
विपक्ष ने क्या सवाल उठाए?
BJP पर निशाना साधते हुए सवाल उठाए हैं कि अगर किसी BJP नेता से जुड़ी कंपनी पर जमीन विवाद के आरोप लग रहे हैं, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। विपक्ष की ओर से इसे सरकार और सत्ताधारी नेताओं की जवाबदेही से जोड़कर देखा गया है।जब 8 सितंबर को असगरअली वोरा ने PM मोदी से मुलाकात कर CBI जांच की मांग की। इसके बाद प्रशासन ने मामले में दोबारा कार्रवाई शुरू की और 16 सितंबर को संबंधित पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया गया।में PM मोदी से वोरा की मुलाकात, BJP विधायक से जुड़ी कंपनी का नाम और जमीन के पुराने दस्तावेज—तीनों बातें राजनीतिक चर्चा के केंद्र में हैं। इस बीच 16 सितंबर को सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस ने विवादित जमीन से जुड़ी अपनी निर्माण अनुमति वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की, जबकि नरेंद्र मेहता ने भी जमीन का कब्जा छोड़ने और निर्माण अनुमति सरेंडर करने की बात कही है।