“सुप्रीम कोर्ट सख्त: जजों को गुमनाम चिट्ठियां भेजने वालों की होगी CBI जांच, CJI बोले- हम अड़ियल किस्म के लोग हैं”
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के जजों, कोर्ट की मदद करने वाले Amicus Curiae और वकीलों के खिलाफ लगातार मिल रही गुमनाम शिकायतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। 17 सितंबर 2026 की सुनवाई में CJI सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि ऐसी शिकायतों के पीछे कौन लोग हैं, इसका पता लगाया जाना जरूरी है। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे।मामला उस समय सामने आया जब कोर्ट रियल एस्टेट कंपनियों और बिल्डरों से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहा था। इसी दौरान अदालत के संज्ञान में बड़ी संख्या में ऐसी शिकायतें आने की बात सामने आईं, जिनमें शिकायतकर्ता की पहचान स्पष्ट नहीं थी। कोर्ट को आशंका है कि कुछ शिकायतों का इस्तेमाल न्यायिक कार्यवाही पर दबाव बनाने या उसे प्रभावित करने की कोशिश के तौर पर किया जा सकता है। हालांकि, यह अभी जांच का विषय है और किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को अदालत ने अंतिम रूप से तय नहीं किया है।कोर्ट का मुख्य सवाल यही है कि आखिर इन शिकायतों के पीछे कौन है और उनका उद्देश्य क्या है। आने वाली सुनवाई में इन शिकायतों की जांच और संभावित CBI कार्रवाई को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
पूरा मामला क्या है?
दरअसल ये मामला सीधे जजों के खिलाफ नहीं, बल्कि सबवेंशन स्कीम घोटाले से जुड़ा है। कई बिल्डरों ने बैंक अधिकारियों से मिलीभगत करके सबवेंशन स्कीम का गलत इस्तेमाल किया। इस स्कीम में घर खरीदार को घर मिलने तक EMI बिल्डर भरता है। लेकिन बिल्डरों ने पैसा लेकर प्रोजेक्ट नहीं बनाए। नतीजा – घर खरीदार 10-15 साल से EMI भर रहे हैं, लेकिन घर का नामोनिशान नहीं है। इस मामले में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने CBI की स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में पेश की। उसी दौरान CJI को टेबल पर गुमनाम शिकायतों का एक बंडल मिला।सुनवाई के दौरान CJI सूर्य कांत ने बेहद सख्त अंदाज में कहा कि शिकायतों के जरिए अदालत को डराने या दबाव में लाने की कोशिश सफल नहीं होगी। उन्होंने कहा, “आप लोग नहीं जानते कि हम कितने अड़ियल किस्म के लोग हैं।” कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि इन शिकायतों के पीछे कौन है, इसका पता लगाने के लिए CBI जांच कराई जा सकती है और जरूरत पड़ने पर FIR भी दर्ज की जा सकती है।
इस मामले की खास बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट पहले से ही कुछ बिल्डरों और बैंकों के खिलाफ सबवेंशन स्कीम से जुड़े मामलों की CBI जांच की निगरानी कर रहा है। CBI की ओर से अदालत को बताया गया कि ऐसे मामलों में कई FIR दर्ज की जा चुकी हैं और कुछ मामलों में चार्जशीट भी दाखिल हुई है। इसी पृष्ठभूमि में जजों के खिलाफ आई गुमनाम शिकायतों को कोर्ट ने गंभीरता से लिया है।
CJI क्यों भड़के? क्या कहा कोर्ट ने?
सुप्रीम कोर्ट में लगातार पहुंच रही गुमनाम शिकायतों को लेकर CJI सूर्य कांत ने सख्त नाराजगी जताई। रिपोर्ट के मुताबिक, इन शिकायतों में जजों, Amicus Curiae और कुछ वकीलों को लेकर आरोप लगाए गए थे। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब कोर्ट कई बिल्डरों और रियल एस्टेट कंपनियों से जुड़े मामलों में सख्त रुख अपना रहा है।सुनवाई के दौरान CJI ने सवाल किया कि आखिर ये गुमनाम शिकायतें कौन भेज रहा है और इनके पीछे किसका हाथ है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा, “आप लोग नहीं जानते कि हम कितने अड़ियल किस्म के लोग हैं।” कोर्ट ने संकेत दिया कि सिर्फ गुमनाम शिकायतें भेजकर न्यायिक प्रक्रिया पर दबाव बनाने की कोशिश को नजरअंदाज नहीं कियाबेंच ने यह भी कहा कि शुरुआती तौर पर उसे आशंका है कि इन शिकायतों के पीछे कुछ बिल्डर और उन्हें सलाह देने वाले कुछ वकील हो सकते हैं। हालांकि, यह कोर्ट का अंतिम निष्कर्ष नहीं है; शिकायतों के पीछे वास्तव में कौन है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
CBI जांच की बात क्यों आई?
CJI सूर्य कांत ने ASG ऐश्वर्या भाटी से कहा कि अगली सुनवाई पर शिकायतों का एक और सेट उन्हें दिया जाएगा। इसके बाद इन शिकायतों की जांच कर यह पता लगाने को कहा जाएगा कि इन्हें लिखने या भेजने वाले लोग कौन हैं। कोर्ट ने कहा कि जरूरत पड़ने पर CBI को FIR दर्ज करने और जांच करने का निर्देश दिया जाएगा। बेंच ने यह भी साफ किया कि मामले को उसके तार्किक नतीजे तक पहुंचाया जाएगा।
शिकायत किसने लिखी – हाथ की लिखावट, पोस्ट का पता, कंप्यूटर से ट्रेस
इसके पीछे कौन है – बिल्डर, वकील या कोई और लॉबी
अगर दोषी पाए गए तो उन पर न्यायालय की अवमानना, IPC की धारा 182 और 211 के तहत केस चलेगा। यानी झूठी शिकायत और कोर्ट को गुमराह करने का आरोप। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी मामले के व्यापक संदर्भ में CBI पहले से बिल्डरों और बैंकों से जुड़े सबवेंशन स्कीम मामलों की जांच कर रही है। CBI की ओर से अदालत को पहले बताया गया था कि कई FIR दर्ज की गई हैं और कुछ मामलों में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी हैं।
सबवेंशन स्कीम क्या है और घोटाला कैसे हुआ?
2010-2016 के बीच NCR में कई बिल्डरों ने “सबवेंशन स्कीम” लॉन्च की। इसमें खरीदार को सिर्फ 10-20% डाउन पेमेंट देना था, बाकी लोन बैंक देगा और घर मिलने तक EMI बिल्डर भरेगा। लेकिन बिल्डरों ने बैंक से पूरा लोन ले लिया, घर नहीं बनाया और EMI भी नहीं भरी। बैंक अब खरीदारों से EMI मांग रहा है। लाखों लोग फंस गए। CBI इसी घोटाले की जांच कर रही है और इसी मामले की सुनवाई के दौरान ये गुमनाम चिट्ठियां आईं।