IIT बॉम्बे में छात्र की मौत के बाद बवाल, परिवार ने लगाए जातिगत उत्पीड़न के आरोप
मुंबई। देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान IIT बॉम्बे से एक बार फिर दुखद खबर आई है। यहां बीटेक दूसरे वर्ष के छात्र साहिल रवींद्र वाकोडे की मौत के बाद मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। साहिल एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में पढ़ रहे थे। 21 साल के साहिल मूल रूप से महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के रहने वाले थे। उनकी मौत के बाद उनके माता-पिता ने पवई पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। परिवार ने संस्थान के कुछ अधिकारियों और प्रोफेसरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। माता-पिता का दावा है कि साहिल को पिछले कुछ महीनों से मानसिक तनाव और कथित जातिगत उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा था। इसी वजह से उन्होंने ये कदम उठाया। पुलिस ने परिवार की शिकायत के आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाने की धाराओं में मामला दर्ज किया है। साथ ही अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम SC/ST Act की धाराएं भी लगाई गई हैं। मामले में एनर्जी साइंस विभाग के प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला का नाम सामने आया है। जांच को आगे बढ़ाते हुए पवई पुलिस ने केस मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है।
कौन थे साहिल वाकोडे
साहिल रवींद्र वाकोडे चंद्रपुर के एक सामान्य परिवार से थे। पिता किसान हैं और मां गृहिणी। साहिल पढ़ाई में बहुत होशियार थे। JEE में टॉप रैंक लाकर 2023 में IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में एडमिशन मिला था। परिवार का सपना था कि साहिल पढ़कर बड़ा अफसर बनेगा और परिवार का नाम रोशन करेगा। साहिल हॉस्टल में रहते थे और घर फोन पर हर हफ्ते बात करते थे। दोस्तों के मुताबिक साहिल शांत स्वभाव के थे और पढ़ाई में सीरियस थे। लेकिन पिछले 3-4 महीने से उनके व्यवहार में बदलाव देखा गया। वो कम बोलते थे और कई बार क्लास मिस करने लगे थे।
मौत कैसे हुई, हॉस्टल में क्या हुआ
सूत्रों के मुताबिक साहिल की मौत हॉस्टल के कमरे में हुई। साथी छात्रों ने जब दरवाजा नहीं खुला तो वार्डन को सूचना दी। दरवाजा तोड़कर अंदर देखा गया तो साहिल का शव मिला। प्राथमिक जांच में आत्महत्या की आशंका जताई गई। IIT प्रशासन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और परिवार को भी खबर दी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। संस्थान ने एक बयान जारी कर कहा “ये दुखद घटना है। हम प्रशासनिक और मानसिक मदद देने के लिए हमेशा तैयार हैं। जांच में पूरा सहयोग करेंगे।” लेकिन जब साहिल के माता-पिता मुंबई पहुंचे और कमरा देखा, दोस्तों से बात की तो उन्हें कुछ और ही कहानी पता चली।
परिवार के गंभीर आरोप, SC/ST एक्ट में केस दर्ज
साहिल के पिता रवींद्र वाकोडे और मां ने पवई पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दी। 4 पन्नों की शिकायत में उन्होंने लिखा कि साहिल को डिपार्टमेंट में मानसिक उत्पीड़न झेलना पड़ रहा था। परिवार के आरोप 3 मुख्य बिंदुओं पर हैं।
पहला आरोप: मानसिक उत्पीड़न- परिवार का कहना है कि साहिल को प्रोजेक्ट और लैब में जानबूझकर परेशान किया जाता था। काम समय पर जमा करने के बाद भी रिजेक्ट कर दिया जाता था। बार-बार कहा जाता था “तुमसे नहीं होगा।” इससे साहिल डिप्रेशन में चले गए थे।
दूसरा आरोप: जातिगत टिप्पणी और भेदभाव-शिकायत में कहा गया है कि साहिल SC वर्ग से थे। डिपार्टमेंट के कुछ लोगों द्वारा उन पर जातिसूचक टिप्पणियां की जाती थीं। ग्रुप प्रोजेक्ट में उन्हें अलग रखा जाता था। हॉस्टल में भी कुछ छात्रों द्वारा ताने मारे जाते थे।
तीसरा आरोप: मदद न मिलना- परिवार का कहना है कि जब साहिल ने काउंसलिंग सेल से मदद मांगी तो उसे गंभीरता से नहीं लिया गया। शिकायत करने पर उल्टा उसे ही “कमजोर” कहा गया। इन्हीं आरोपों के आधार पर पवई पुलिस ने IPC की धारा 108 यानी आत्महत्या के लिए उकसाना और SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराओं में FIR दर्ज की है।
प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला का नाम क्यों आया
FIR में एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला का नाम प्रमुख रूप से लिया गया है। परिवार का आरोप है कि प्रोफेसर डूला साहिल के प्रोजेक्ट गाइड थे। शिकायत में कहा गया है कि प्रोफेसर अक्सर क्लास में साहिल को टारगेट करते थे। एक बार प्रेजेंटेशन के दौरान सबके सामने कहा गया “तुम्हारे जैसे लोग यहां कैसे आ गए।” इसके बाद से साहिल और ज्यादा टूट गए। परिवार ने ये भी कहा कि साहिल ने 2 बार प्रोफेसर से मिलकर अपनी समस्या बताई लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। उल्टा उन्हें धमकी दी गई कि “ज्यादा बोले तो फेल कर देंगे।” प्रोफेसर डूला की तरफ से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। IIT प्रशासन ने कहा है कि जांच पूरी होने तक किसी पर टिप्पणी नहीं करेंगे।
पुलिस जांच और क्राइम ब्रांच को केस ट्रांसफर
पवई पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की। हॉस्टल के CCTV, साहिल का लैपटॉप, फोन और डायरी जब्त की गई। डिपार्टमेंट के 10-12 छात्रों और 3 प्रोफेसरों के बयान दर्ज किए गए। लेकिन मामला गंभीर और हाई-प्रोफाइल होने की वजह से मुंबई पुलिस कमिश्नर ने आदेश दिया कि केस क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर किया जाए। अब क्राइम ब्रांच की एक विशेष टीम जांच कर रही है। क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी ने कहा “हम हर एंगल से जांच कर रहे हैं। फोन की चैट, ईमेल, क्लास रिकॉर्डिंग सब खंगाले जा रहे हैं। SC/ST एक्ट का मामला है इसलिए बहुत सावधानी बरत रहे हैं।”
IIT बॉम्बे का बयान और कैंपस का माहौल
IIT बॉम्बे के निदेशक ने एक बयान जारी कर कहा “हम छात्र की मौत से स्तब्ध हैं। संस्थान भेदभाव के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलता है। पुलिस को पूरा सहयोग दिया जा रहा है।” संस्थान ने ये भी कहा कि कैंपस में काउंसलिंग सेल, एंटी-रैगिंग कमेटी और SC/ST सेल मौजूद है। कोई भी छात्र कभी भी मदद मांग सकता है। लेकिन कैंपस में माहौल तनावपूर्ण है। कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि “IIT मेंटल हेल्थ को लेकर कोई बात नहीं होती।” कुछ दलित छात्र संगठनों ने कहा कि “उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव आज भी है।” कुछ छात्रों ने कैंडल मार्च भी निकाला और मांग की कि प्रोफेसर को तुरंत सस्पेंड किया जाए।
देश में IIT में छात्र आत्महत्या का ये कोई पहला मामला नहीं
दुर्भाग्य से IIT में छात्र आत्महत्या के मामले नए नहीं हैं। पिछले 5 साल में IIT खड़गपुर, IIT दिल्ली, IIT कानपुर और IIT मद्रास में भी ऐसे मामले सामने आए हैं। 2023 में IIT बॉम्बे में ही एक छात्र की आत्महत्या हुई थी। तब भी मेंटल हेल्थ और प्रेशर का मुद्दा उठा था। एक्सपर्ट कहते हैं कि IIT जैसे टॉप संस्थान में एडमिशन के बाद छात्रों पर परफॉर्मेंस का बहुत दबाव होता है। प्लेसमेंट, CGPA, रिसर्च का तनाव। ऊपर से अगर जातिगत भेदभाव भी जुड़ जाए तो स्थिति और खराब हो जाती है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. मीरा जोशी कहती हैं “हमें छात्रों को ये बताना होगा कि फेल होना अंत नहीं है। और संस्थानों को भेदभाव के हर केस को बहुत गंभीरता से लेना होगा।”
SC/ST छात्रों की स्थिति और सरकारी नियम
सरकार ने IIT में SC/ST छात्रों के लिए आरक्षण और स्कॉलरशिप की व्यवस्था की है। साथ ही हर IIT में SC/ST सेल बनाना अनिवार्य है। नियम के अनुसार अगर कोई छात्र भेदभाव की शिकायत करता है तो 7 दिन में जांच पूरी करनी होती है। लेकिन साहिल के परिवार का आरोप है कि यहां ऐसा नहीं हुआ। सामाजिक कार्यकर्ता बीना पाल कहती हैं “कागज पर सब अच्छा लगता है। लेकिन जमीन पर आज भी कई प्रोफेसर और छात्र SC/ST छात्रों को हीन भावना से देखते हैं। इसे बदलना होगा।”
परिवार का दर्द और उनकी मांग
साहिल के पिता रवींद्र वाकोडे ने रोते हुए कहा “हमने बेटे को डॉक्टर-इंजीनियर बनाने के लिए भेजा था। हमें क्या पता था कि वो लाश बनकर आएगा।” मां ने कहा “साहिल आखिरी बार फोन पर बोला था कि मम्मी यहां लोग बहुत ताने मारते हैं। मैंने कहा बेटा पढ़ाई करो। काश उसे वापस बुला लेती।“परिवार की 3 मांगें हैं।
पहली: प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला और अन्य आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
दूसरी: IIT में SC/ST छात्रों के लिए स्वतंत्र हेल्पलाइन और निगरानी कमेटी बने।
तीसरी: साहिल के परिवार को आर्थिक मुआवजा और नौकरी दी जाए।
आगे क्या होगा
क्राइम ब्रांच अब तकनीकी सबूत जुटा रही है। साहिल का फोन और लैपटॉप फोरेंसिक लैब भेजा गया है। डिपार्टमेंट के ईमेल और ग्रुप चैट चेक किए जा रहे हैं। अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई होगी। SC/ST एक्ट में सजा 6 महीने से लेकर उम्रकैद तक हो सकती है। IIT बॉम्बे ने भी कहा है कि वो आंतरिक जांच कमेटी बनाएगा। अगर कोई दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
साहिल वाकोडे की मौत ने एक बार फिर IIT जैसे शीर्ष संस्थानों मेंटल हेल्थ और जातिगत भेदभाव के मुद्दे को सामने ला दिया है। एक तरफ देश दुनिया में IIT की रैंकिंग पर गर्व करता है। दूसरी तरफ कैंपस के अंदर एक छात्र मदद मांगते-मांगते टूट जाता है। अब सवाल ये है कि क्या IIT प्रशासन और सरकार इस बार कोई ठोस कदम उठाएंगे? क्या हर छात्र को बराबरी और सम्मान मिलेगा? साहिल के पिता का आखिरी वाक्य सबको सोचने पर मजबूर करता है “मेरा बेटा वापस नहीं आएगा। लेकिन किसी और की मां का कलेजा न फटे।” क्राइम ब्रांच की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। तब तक IIT बॉम्बे का कैंपस सन्नाटे में है।