शराब घोटाले के आरोपों के बाद भी केजरीवाल ने नीति को दिए पूरे नंबर, बोले- बदनाम किया गया
नई दिल्ली। सत्ता से हटने के करीब डेढ़ साल बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पहली बार अपने 10 साल के शासन का खुद रिपोर्ट कार्ड जारी किया है। एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में केजरीवाल से शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, यमुना, प्रदूषण, शराब नीति समेत कई मुद्दों पर 1 से 10 तक नंबर देने को कहा गया। सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि केजरीवाल ने उस शराब नीति को भी पूरे 10 नंबर दिए जिसके आरोप में उन्हें और मनीष सिसोदिया को कई महीने जेल में रहना पड़ा था। वहीं अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाने वाली शिक्षा और स्वास्थ्य में उन्होंने खुद को 10 में से 10 नहीं दिए। कहा “और काम बाकी था”।
बिजली में पूरे नंबर, कहा 24 घंटे और मुफ्त थी
जब केजरीवाल से बिजली को लेकर पूछा गया तो वो सबसे ज्यादा कॉन्फिडेंट दिखे। उन्होंने तुरंत कहा “बिजली में 10 में 10″। आगे जोड़ा “हमारी सरकार में 24 घंटे बिजली आने लगी थी। मुफ्त हो गई थी। 200 यूनिट तक कोई बिल नहीं आता था। अब फिर से कट लगने लगे हैं।” केजरीवाल ने दावा किया कि दिल्ली देश का पहला राज्य था जहां बिजली निजी हाथों में होने के बावजूद रेट कम हुए और सप्लाई बेहतर हुई। उन्होंने कहा कि पावर सबस्टेशन बढ़ाए, ट्रांसफॉर्मर बदले और ऑडिट करवाया। “पहले गर्मियों में 6-6 घंटे कट लगता था। हमने वो कल्चर खत्म कर दिया।” लेकिन उन्होंने ये भी माना कि अब नई सरकार के आने के बाद शिकायतें बढ़ी हैं। “लोग फोन करके कहते हैं कि फिर से कट लग रहे हैं।”
शिक्षा में 8 या 9, कहा भारत रत्न मांगने के बावजूद और काम बाकी
शिक्षा को आप सरकार अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानती रही है। मनीष सिसोदिया के लिए केजरीवाल खुद भारत रत्न की मांग कर चुके हैं। सरकारी स्कूलों की बिल्डिंग, स्मार्ट क्लास, टीचर ट्रेनिंग और नतीजों का जिक्र हर रैली में होता था।
लेकिन जब खुद को नंबर देने की बारी आई तो केजरीवाल ने कहा “मैं 10 नहीं दूंगा। 8 या 9 दूंगा। क्योंकि और भी काफी कुछ करना बाकी था। हम करना चाहते थे।” उन्होंने बताया कि 500 नए स्कूल बनाने का प्लान था, टीचरों की ट्रेनिंग फिनलैंड तक ले गए थे, लेकिन कोरोना और फंड की दिक्कत आ गई। “हम चाहते थे कि हर बच्चा प्राइवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में आए। 70% तक पहुंच गए थे, 100% करना बाकी था।” इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि दिल्ली के मॉडल को देखकर दूसरे राज्य भी अब सरकारी स्कूल सुधार रहे हैं। “ये सबसे बड़ी जीत है।”
स्वास्थ्य में भी 8 या 9, मोहल्ला क्लीनिक बंद होने पर जताया दुख
स्वास्थ्य के मामले में भी केजरीवाल ने खुद को 8 या 9 दिए। वजह बताई मोहल्ला क्लीनिक। उन्होंने कहा “हमने 500 से ज्यादा मोहल्ला क्लीनिक बनाए थे। 24 घंटे दवा, टेस्ट, डॉक्टर मुफ्त। गरीब का 500 रुपये बच जाता था।”
लेकिन सरकार जाने के बाद इन्हें बंद किए जाने पर नाराजगी जताई। “कुछ दिन पहले मैं तिलक नगर गया। वहां मोहल्ला क्लीनिक में गाय-भैंस बंधी थीं। बहुत दुख होता है। इतनी मेहनत से बनाया था।” उन्होंने कहा कि बड़े अस्पतालों में बेड, ICU और दवाओं में सुधार किया। कोरोना के समय दिल्ली मॉडल की तारीफ हुई। “लेकिन अभी कैंसर, हार्ट के लिए और सेंटर खोलने थे। इसलिए 10 नहीं दे सकता।”
शराब नीति में 10/10, कहा “नीति सही थी, बदनाम किया गया”
सबसे ज्यादा चर्चा शराब नीति वाले जवाब पर हुई। 2021-22 में लाई गई नई आबकारी नीति पर ED और CBI ने केस दर्ज किया। आरोप लगा कि ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए लाइसेंस दिए गए और 100 करोड़ का घोटाला हुआ। इसी केस में केजरीवाल और सिसोदिया को जेल जाना पड़ा। बाद में निचली अदालत से जमानत मिली। मामला अभी हाईकोर्ट में है।
इंटरव्यू में जब शराब नीति पर नंबर मांगे गए तो केजरीवाल ने कहा “10 में 10″। तर्क दिया “हमने मकसद रखा था कि माफिया खत्म हो। सरकारी दुकानें बंद हों। रेवेन्यू बढ़े। पहले 30 हजार करोड़ की शराब बिकती थी, उसमें से सरकार को 4 हजार करोड़ मिलता था। नई नीति से 10 हजार करोड़ का टारगेट था।” उन्होंने कहा “नीति में कोई गड़बड़ी नहीं थी। राजनीति के कारण इसे बदनाम किया गया। CBI ने 2 साल जांच की, एक पै
पानी में 7, कहा 5 साल और मिलते तो 24 घंटे कर देते
पानी की सप्लाई पर केजरीवाल ने 7 नंबर दिए। कहा “काफी काम हो गया था। पानी मुफ्त था। 20 हजार लीटर तक बिल जीरो। सीवर लाइन बिछाई। द्वारका, नजफगढ़ जैसे इलाकों में जहां 20 साल से पानी नहीं आता था वहां पाइप पहुंचाया।”
लेकिन उन्होंने माना कि अभी भी कई कॉलोनियों में टैंकर से पानी जाता है। “मेरा टारगेट था 5 साल में दिल्ली में 24 घंटे नल से पानी। यमुना से ज्यादा पानी लाने की डील भी कर ली थी। अगर सरकार रहती तो 2027 तक ये हो जाता।” यमुना सफाई पर सीधे नंबर नहीं दिए लेकिन कहा “हमने 11 STP बनाए। नदी में गिरने वाला 60% गंदा पानी अब ट्रीट होता है। लेकिन पूरी यमुना साफ करना केंद्र के साथ मिलकर ही होगा।”
महिला सुरक्षा, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और शासन में क्या कहा
महिला सुरक्षा पर केजरीवाल ने कहा कि पुलिस केंद्र के पास है इसलिए ज्यादा नहीं कर सके। “हमने बसों में मार्शल, CCTV, पैनिक बटन लगाए। रात में बसें फ्री कीं। लेकिन कानून व्यवस्था हमारे हाथ में नहीं है।” पब्लिक ट्रांसपोर्ट को 7 या 8 नंबर दिए। “1000 नई इलेक्ट्रिक बसें लाए। मेट्रो का किराया नहीं बढ़ने दिया। महिलाओं के लिए फ्री किया। लेकिन अभी और बसें चाहिए थीं।” शासन और पारदर्शिता पर 8-9 दिए। “पहली सरकार थी जिसने ऑनलाइन शिकायत, मोहल्ला सभा की। भ्रष्टाचार कम हुआ। लेकिन सिस्टम पूरी तरह नहीं बदला।” सड़क और ड्रेनेज पर भी 8-9। “दिल्ली की सड़कें गड्ढा मुक्त कीं। मानसून में जलभराव कम हुआ। एक मास्टर ड्रेनेज प्लान बना रहे थे। 15 साल से लंबित था। आधा हो गया था।”
वायु प्रदूषण और बाकी मुद्दे, राजनीतिक प्रतिक्रिया
प्रदूषण पर केजरीवाल ने कहा “हमने नंबर नहीं मांगा। क्योंकि इसमें पंजाब, हरियाणा और केंद्र की भूमिका है। हमने 13 हॉटस्पॉट बनाए, एंटी-स्मॉग गन, पेड़ लगाए। PM 2.5 में 40% कमी आई। लेकिन पराली का समाधान नहीं हुआ।”केजरीवाल के इस इंटरव्यू के बाद बीजेपी ने हमला बोला। दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष ने कहा “10 साल बाद भी 8-9 दे रहे हैं। यानी 20% काम अधूरा। शराब में 10 कैसे? क्या जेल जाना उपलब्धि है?”
कांग्रेस ने कहा “खुद ही मान लिया कि यमुना और पानी में फेल हुए।” आप ने पलटवार किया। प्रवक्ता ने कहा “जिसने काम किया वही रिपोर्ट कार्ड दे सकता है। बाकी सिर्फ आरोप लगाते हैं।”
केजरीवाल का आखिरी संदेश
इंटरव्यू के अंत में केजरीवाल ने कहा “हमने कोशिश की दिल्ली को स्कूल और अस्पताल वाली दिल्ली बनाने की। 80% काम हुआ। 20% रह गया। अफसोस है कि पूरा नहीं कर पाए। लेकिन जो किया वो देश के लिए मॉडल है।” उन्होंने कहा कि अगर दोबारा मौका मिला तो बचे हुए काम पहले 2 साल में पूरे करेंगे। “बिजली-पानी फ्री रखेंगे। मोहल्ला क्लीनिक फिर खोलेंगे। यमुना साफ करेंगे।”
केजरीवाल का ये सेल्फ असेसमेंट सियासी तौर पर अहम है। एक तरफ वो अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाकर “दिल्ली मॉडल” को जिंदा रखना चाहते हैं। दूसरी तरफ 8-9 नंबर देकर ये भी कह रहे हैं कि “और करना था” ताकि आलोचना का जवाब पहले से दे सकें।
शराब नीति को 10 देना सबसे बड़ा रिस्क है। लेकिन केजरीवाल ने साफ कर दिया कि वो उस फैसले पर आज भी कायम हैं।
अब जनता तय करेगी कि केजरीवाल का दिया हुआ रिपोर्ट कार्ड सही है या नहीं।