“दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत, जंतर-मंतर पर सन्नाटा: कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी से पहले ही भड़की सियासत”
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के प्रस्तावित आंदोलन से पहले बड़ी खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक पार्टी से जुड़े अभिजीत दीपके को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचते ही हिरासत में ले लिया गया। बताया जा रहा है कि अभिजीत दीपके सुबह करीब 10 बजकर 30 मिनट पर दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के टर्मिनल 3 पर उतरे थे। फ्लाइट से उतरकर वो बैगेज कलेक्शन की तरफ बढ़ ही रहे थे कि सादी वर्दी में मौजूद पुलिस और दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच के अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया। एयरपोर्ट से बाहर निकलने से पहले ही उन्हें डिटेन कर लिया गया।
अभिजीत दिपके के अलावा भी किसी और की गिरफ्तारी?
सिर्फ अभिजीत दीपके ही नहीं, CJP के प्रवक्ता सौरव दास और पार्टी के युवा मोर्चा के संयोजक आशुतोष रंका को भी हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। सौरव दास को एयरपोर्ट के बाहर से और आशुतोष रंका को उनके दक्षिण दिल्ली स्थित आवास से सुबह 11 बजे के आसपास उठाया गया। इस घटनाक्रम ने आंदोलन से पहले कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर नेताओं को किस आधार पर हिरासत में लिया गया? क्या जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति को लेकर कोई विवाद था? और क्या ये कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए थी या फिर सरकार विरोधी आवाज को दबाने की कोशिश?
फिलहाल पुलिस का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा “हमें इनपुट मिला था कि जंतर-मंतर पर बिना अनुमति के भीड़ इकट्ठा की जा सकती है। किसी भी तरह के कानून-व्यवस्था के उल्लंघन को रोकने के लिए एहतियातन कार्रवाई की गई है।” लेकिन CJP का आरोप है कि ये राजनीतिक बदले की कार्रवाई है।
कब से है कॉकरोच जनता पार्टी
कॉकरोच जनता पार्टी एक नई राजनीतिक पार्टी है जो पिछले एक साल से महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आंदोलन कर रही है। पार्टी का नाम भले ही अजीब लगे लेकिन सोशल मीडिया पर इनके पास 40 लाख से ज्यादा फॉलोवर हैं। अभिजीत दीपके पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक हैं। वो यूट्यूब पर “सवाल पूछो सरकार से” नाम से शो चलाते हैं। पिछले महीने उन्होंने ऐलान किया था कि 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर “जनता का हिसाब” नाम से बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। मांग थी कि सरकार महंगाई पर श्वेत पत्र जारी करे, 2 करोड़ नौकरियों का हिसाब दे, और पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाए।
पार्टी ने दिल्ली पुलिस से 27 सितंबर को ही अनुमति मांगी थी। पुलिस ने 5 अक्टूबर को जवाब में कहा कि “सुरक्षा कारणों से जंतर-मंतर पर 500 से ज्यादा लोगों की भीड़ की अनुमति नहीं दी जा सकती।” CJP ने कहा कि वो 500 लोगों के साथ शांतिपूर्ण धरना करेंगे। लेकिन 9 अक्टूबर की रात को अचानक दिल्ली में धारा 144 लागू कर दी गई। जंतर-मंतर के 1 किलोमीटर के दायरे में 5 से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी। इसी बीच सुबह अभिजीत दीपके नागपुर से दिल्ली पहुंचे। उनके साथ 10-12 कार्यकर्ता भी थे। एयरपोर्ट पर उन्हें रोकते समय पुलिस ने कहा कि “आपके खिलाफ निवारक हिरासत का आदेश है। आपको 24 घंटे के लिए हिरासत में लिया जा रहा है।” अभिजीत ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया। 3 मिनट के वीडियो में वो कह रहे हैं “मैं अपराधी नहीं हूं। मैं सिर्फ सवाल पूछने आया था। अगर सवाल पूछना गुनाह है तो मुझे जेल में डाल दो।” वीडियो 2 घंटे में 20 लाख बार देखा गया।
सौरव दास को जब हिरासत में लिया गया तो वो एयरपोर्ट के बाहर मीडिया से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा “ये डर का माहौल है। सरकार को डर है कि जनता सवाल पूछेगी।” आशुतोष रंका के घर से पुलिस उन्हें गाड़ी में बिठाकर ले गई। घरवालों का कहना है कि कोई वारंट नहीं दिखाया गया। हिरासत की खबर फैलते ही जंतर-मंतर पर पहले से मौजूद 200 CJP कार्यकर्ताओं ने धरना शुरू कर दिया। पुलिस ने बैरिकेड लगा दिए। बैरिकेड के दोनों तरफ नारेबाजी हुई। “तानाशाही नहीं चलेगी” और “लोकतंत्र जिंदाबाद” के नारे गूंजे। दोपहर 1 बजे पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर 40 कार्यकर्ताओं को बसों में भरकर मंडी हाउस थाने ले गई।इस कार्रवाई के बाद सियासी बयानबाजी शुरू हो गई। कांग्रेस नेता ने ट्वीट किया “अगर सरकार को डर नहीं है तो प्रदर्शन क्यों रोका?” आम आदमी पार्टी ने कहा “दिल्ली पुलिस केंद्र के इशारे पर काम कर रही है।” भाजपा प्रवक्ता ने पलटवार करते हुए कहा “कानून सबके लिए बराबर है। बिना अनुमति आंदोलन नहीं होगा।”
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है
निवारक हिरासत CrPC की धारा 151 के तहत की जा सकती है अगर पुलिस को लगे कि कोई व्यक्ति शांति भंग कर सकता है। लेकिन इसके लिए ठोस आधार चाहिए। अभी तक पुलिस ने ये नहीं बताया कि अभिजीत दीपके के खिलाफ ऐसा क्या इनपुट था।शाम तक अभिजीत दीपके को कश्मीरी गेट स्थित हिरासत केंद्र ले जाया गया। वहां से उन्होंने एक और वीडियो जारी किया। “मैं यहां ठीक हूं। खाना मिल रहा है। लेकिन सवाल ये है कि क्या लोकतंत्र में सवाल पूछना जुर्म है? हम कल भी आवाज उठाएंगे।” रात 8 बजे CJP के वकीलों की टीम ने दिल्ली हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की। वकील ने कहा “24 घंटे से ज्यादा हिरासत गैरकानूनी है। नेताओं को तुरंत रिहा किया जाए।” कोर्ट ने सुनवाई के लिए 11 अक्टूबर की तारीख दी। इस बीच सोशल मीडिया पर #ReleaseAbhijeet ट्रेंड करने लगा। कई सेलेब्रिटी, पत्रकार और आम लोग समर्थन में आए। मीम बने, कार्टून बने। “कॉकरोच जनता पार्टी” का नाम पहले मजाक लगता था लेकिन अब लोग कह रहे हैं “नाम में क्या रखा है, काम बोलता है।”
पुलिस सूत्रों का कहना है
खुफिया एजेंसियों ने रिपोर्ट दी थी कि आंदोलन में बाहरी तत्व शामिल हो सकते हैं। इसलिए एहतियात बरती गई। लेकिन CJP का कहना है “हमारे पास 500 लोगों की लिस्ट थी। सबके आधार कार्ड जमा किए थे। फिर किस बात का डर?” जंतर-मंतर पर अब पुलिस का पहरा है। बैरिकेड, वॉटर कैनन, ड्रोन। ऐसा लगता है जैसे कोई बड़ा समिट हो। लेकिन मंच खाली है। स्पीकर बंद हैं। अभिजीत दीपके के परिवार का कहना है कि वो शांतिप्रिय हैं। नागपुर में उनका छोटा सा बिजनेस है। 2023 में उन्होंने नौकरी छोड़कर पार्टी बनाई। “वो कहते हैं कि राजनीति गंदी है तो उसे साफ करने के लिए अंदर आना पड़ेगा।”
अब आगे क्या?
11 अक्टूबर को कोर्ट का फैसला आएगा। अगर रिहाई होती है तो CJP ने कहा है कि वो फिर से जंतर-मंतर पर जाएंगे। अगर हिरासत बढ़ती है तो पार्टी ने 15 अक्टूबर को “जेल भरो आंदोलन” का ऐलान किया है। दिल्ली पुलिस के लिए भी ये परीक्षा है। कानून-व्यवस्था और अभिव्यक्ति की आजादी के बीच संतुलन कैसे बनाएं। सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा है। आम लोग क्या सोच रहे हैं? जंतर-मंतर के पास चाय की दुकान चलाने वाले रमेश ने कहा “नेता आएं, प्रदर्शन करें। लेकिन तोड़फोड़ न हो।” कॉलेज की छात्रा प्रिया ने कहा “मुझे नहीं पता CJP कौन है। लेकिन अगर किसी को बिना कारण पकड़ा जा रहा है तो गलत है।” ये घटना एक बार फिर सवाल उठाती है कि भारत में विरोध का अधिकार कितना सुरक्षित है। अनुमति, धारा 144, निवारक हिरासत – इन सबके बीच एक आम नागरिक कहां जाए?
अभिजीत दीपके हिरासत में हैं। सौरव दास और आशुतोष रंका भी। जंतर-मंतर पर सन्नाटा है। लेकिन सोशल मीडिया पर शोर है। अब देखना होगा कि CJP के आंदोलन को लेकर आगे क्या घटनाक्रम सामने आता है। क्या सरकार बातचीत करेगी? क्या कोर्ट दखल देगा? या फिर ये मामला भी फाइलों में दब जाएगा?आपकी राय क्या है? आंदोलन से पहले नेताओं को हिरासत में लेना कितना उचित है? क्या सुरक्षा के नाम पर आवाज दबाई जा रही है? या फिर कानून-व्यवस्था के लिए ये जरूरी कदम था? कमेंट करके जरूर बताइए।