MP में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 13 हजार, सहायिकाओं का 6500 रुपये हुआ: हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार का बड़ा फैसला
मध्य प्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अब आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मासिक मानदेय 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 13 हजार रुपये किया गया है। वहीं आंगनवाड़ी सहायिकाओं का मानदेय 5 हजार रुपये से बढ़ाकर 6 हजार 500 रुपये प्रति माह किया गया है। इसके साथ ही माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के आदेश के अनुपालन में मानदेय और बकाया एरियर भुगतान को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। हालांकि बढ़ी हुई राशि और लागू होने की तिथि की आधिकारिक पुष्टि आदेश जारी होने के बाद ही संभव होगी।
मानदेय वृद्धि का प्रस्ताव और नई दरें
महिला एवं बाल विकास विभाग के सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में वृद्धि को मंजूरी दे दी है। नए प्रस्ताव के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को अब 13 हजार रुपये प्रति माह और सहायिका को 6 हजार 500 रुपये प्रति माह मानदेय प्राप्त होगा।इससे पहले कार्यकर्ता को 10 हजार रुपये और सहायिका को 5 हजार रुपये मानदेय दिया जा रहा था। इस प्रकार कार्यकर्ता के मानदेय में 3 हजार रुपये और सहायिका के मानदेय में 1 हजार 500 रुपये की वृद्धि की गई है।
मध्य प्रदेश में वर्तमान में लगभग 97 हजार आंगनवाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर लगभग 1 लाख 90 हजार कार्यकर्ता और सहायिकाएं कार्यरत हैं। इनमें से लगभग 1 लाख कार्यकर्ता और 90 हजार सहायिकाएं शामिल हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मानदेय वृद्धि का प्रस्ताव वित्त विभाग से अनुमोदित होकर मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा जा चुका है। दिवाली से पहले इस संबंध में शासकीय आदेश जारी होने की संभावना है। नए मानदेय के अक्टूबर या नवंबर 2026 से लागू होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
उच्च न्यायालय का आदेश और एरियर भुगतान का प्रावधान
मानदेय वृद्धि का यह निर्णय माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में दायर एक जनहित याचिका के बाद आया है। याचिका में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए न्यूनतम वेतनमान और पिछले वर्षों के बकाया एरियर की मांग की गई थी। 12 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई में न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि वह 90 दिनों के भीतर मानदेय का पुनरीक्षण करे और बकाया भुगतान की प्रक्रिया प्रारंभ करे। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि यद्यपि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका सरकारी कर्मचारी की श्रेणी में नहीं आती हैं, तथापि वे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अतः उन्हें सम्मानजनक मानदेय दिया जाना चाहिए। न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकार के 60:40 फंडिंग पैटर्न का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार अपने संसाधनों से अतिरिक्त राशि प्रदान कर सकती है। सूत्रों के अनुसार सरकार 1 जनवरी 2024 से एरियर देने पर विचार कर रही है। इस हिसाब से एक कार्यकर्ता को लगभग 9 हजार रुपये और एक सहायिका को लगभग 4 हजार 500 रुपये का एरियर एकमुश्त भुगतान किया जा सकता है। एरियर की राशि जनवरी 2027 में भुगतान किए जाने की संभावना है।
वित्तीय भार और बजट प्रावधान
मानदेय वृद्धि से राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। वर्तमान में 1 लाख कार्यकर्ताओं पर 100 करोड़ रुपये और 90 हजार सहायिकाओं पर 45 करोड़ रुपये प्रतिमाह खर्च हो रहे थे। कुल मिलाकर 145 करोड़ रुपये प्रतिमाह का व्यय हो रहा था।
नई दरों के अनुसार 1 लाख कार्यकर्ताओं पर 130 करोड़ रुपये और 90 हजार सहायिकाओं पर 58.5 करोड़ रुपये प्रतिमाह व्यय होगा। इस प्रकार कुल मासिक व्यय 188.5 करोड़ रुपये हो जाएगा। इस प्रकार राज्य सरकार पर प्रतिमाह 43.5 करोड़ रुपये और वार्षिक 522 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार आएगा। केंद्र और राज्य का 60:40 के अनुपात में फंडिंग होती है। अतः राज्य सरकार को प्रतिवर्ष लगभग 209 करोड़ रुपये अतिरिक्त वहन करने होंगे। वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस अतिरिक्त व्यय के लिए बजट में प्रावधान किया गया है। महिला एवं बाल विकास को प्राथमिकता वाले क्षेत्र में रखे जाने के कारण धन की कमी नहीं होगी।
अन्य राज्यों में मानदेय की स्थिति से तुलना
मानदेय वृद्धि के बाद भी मध्य प्रदेश अन्य राज्यों की तुलना में पीछे है। दिल्ली में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को 12 हजार रुपये मानदेय और 2 हजार 500 रुपये प्रोत्साहन राशि मिलती है। इस प्रकार कुल 14 हजार 500 रुपये प्राप्त होते हैं। सहायिका को 6 हजार 200 रुपये मिलते हैं।
केरल में कार्यकर्ता को 25 हजार रुपये तक मानदेय दिया जाता है। महाराष्ट्र में यह राशि 15 हजार रुपये है। राजस्थान में कार्यकर्ता को 9 हजार और सहायिका को 4 हजार 500 रुपये मिलते हैं। उत्तर प्रदेश में कार्यकर्ता को 10 हजार और सहायिका को 5 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। नई दरों के बाद मध्य प्रदेश का मानदेय राष्ट्रीय औसत के आसपास पहुंच जाएगा। आंगनवाड़ी कर्मचारी संघ की मांग है कि मानदेय को न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये से जोड़ा जाए और पेंशन, बीमा तथा ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं भी दी जाएं।
गठन, कार्य और वर्तमान चुनौतियां
आंगनवाड़ी केंद्र समेकित बाल विकास सेवा योजना के अंतर्गत संचालित होते हैं। इन केंद्रों का मुख्य कार्य 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों को पूरक पोषण, स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, स्कूल पूर्व शिक्षा और गर्भवती एवं धात्री महिलाओं की देखभाल करना है।
एक कार्यकर्ता का कार्य समय सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक निर्धारित है। लेकिन सर्वे, रिपोर्टिंग, पोषण ट्रैकर एप पर डाटा एंट्री और घर-भेंट के कारण कार्य अवधि 10 से 12 घंटे तक हो जाती है। वर्तमान में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के समक्ष कई चुनौतियां हैं। इनमें मानदेय का समय पर न मिलना, स्टेशनरी और मोबाइल रिचार्ज का खर्च स्वयं वहन करना, केंद्र भवन का अभाव और स्टाफ की कमी प्रमुख हैं। पिछले दो वर्षों में लगभग 8 हजार कार्यकर्ताओं ने कम मानदेय और अधिक कार्यभार के कारण इस्तीफा दिया है। मानदेय वृद्धि से कार्यकर्ताओं के मनोबल में वृद्धि होने और पलायन रुकने की उम्मीद है।
क्रियान्वयन की प्रक्रिया और आवश्यक तैयारियां
मानदेय की नई दरें शासकीय आदेश जारी होने के बाद ही लागू होंगी। विभागीय सूत्रों के अनुसार 10 नवंबर 2026 तक आदेश जारी होने की संभावना है। नवंबर माह का मानदेय दिसंबर 2026 में बढ़ी हुई दर से भुगतान किया जा सकता है।
एरियर का भुगतान जनवरी 2027 में एकमुश्त किए जाने का प्रस्ताव है। इसके लिए सभी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के बैंक खातों का आधार से लिंक होना अनिवार्य है। विभाग ने सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे पोषण ट्रैकर एप पर उपस्थिति सुनिश्चित करें और बैंक खातों का सत्यापन कराएं। भुगतान में किसी प्रकार की अनियमितता न हो इसके लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया जाएगा। उच्च न्यायालय ने 90 दिनों के भीतर आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। समय पर अनुपालन न होने की स्थिति में अवमानना की कार्रवाई हो सकती है।
अपेक्षित प्रभाव और आगे की राह
मानदेय में वृद्धि से आंगनवाड़ी व्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। मानदेय बढ़ने से कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। इससे कार्य के प्रति उनकी रुचि और समर्पण बढ़ेगा। आर्थिक तनाव कम होने से वे बच्चों की शिक्षा और पोषण पर अधिक ध्यान दे पाएंगी। इससे केंद्रों पर दर्ज बच्चों की संख्या और उपस्थिति में भी वृद्धि होने की संभावना है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मानदेय वृद्धि पर्याप्त नहीं है। इसके साथ ही आंगनवाड़ी केंद्रों के भवन, पेयजल, शौचालय, खिलौने और शिक्षण सामग्री की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। कई केंद्र आज भी किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं जहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। आंगनवाड़ी कर्मचारी संघ ने मानदेय वृद्धि का स्वागत करते हुए इसे आंशिक राहत बताया है। संघ ने मांग की है कि भविष्य में मानदेय को महंगाई सूचकांक से जोड़ा जाए और सामाजिक सुरक्षा की अन्य योजनाओं का लाभ भी दिया जाए। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि मानदेय वृद्धि महिला सशक्तिकरण और बाल विकास को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।