चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल,”ज्ञानू को जाना ही होगा” – CEC पर लगा चुनाव लड़ाने का ऑफर देने का आरोप
नई दिल्ली। चुनाव आयोग की निष्पक्षता और स्वतंत्रता को लेकर एक बार फिर सवाल उठ खड़े हुए हैं। शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया पर केरल के पूर्व मुख्य सचिव और रिटायर्ड IAS अधिकारी जिजी थॉमसन से जुड़ी एक खबर शेयर करते हुए लिखा, “ये करवाएंगे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव”। दीपके ने इससे पहले भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और उन्हें “ज्ञानू” कहकर निशाने पर लिया था। उनकी पिछली पोस्ट में भी उन्होंने लिखा था “ज्ञानू को जाना ही होगा”। मामला क्या है। दरअसल जिजी थॉमसन ने एक इंटरव्यू में बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने खुद उनसे संपर्क किया था और उन्हें भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने का ऑफर दिया था। साथ ही ये भी कहा था कि अगर वो चुनाव जीत जाते हैं तो उन्हें केंद्रीय मंत्री भी बना दिया जाएगा। थॉमसन ने बताया कि ये बातचीत उस समय हुई थी जब वो अभी सेवा में थे या रिटायरमेंट के तुरंत बाद। उन्होंने इस ऑफर को ठुकरा दिया और कहा कि वो राजनीति में नहीं आना चाहते।
इसी खबर की एक ग्राफिक प्लेट को अभिजीत दीपके ने शेयर किया। उस प्लेट में जिजी थॉमसन और ज्ञानेश कुमार की साथ वाली फोटो लगी थी। फोटो के ऊपर बड़े अक्षरों में लिखा था “CEC ने दिया चुनाव लड़ने और मंत्री बनने का ऑफर”। इस पोस्ट को शेयर करते हुए दीपके ने लिखा कि अगर चुनाव आयोग का मुखिया ही इस तरह के ऑफर देगा तो फिर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कैसे होंगे। चुनाव आयोग पर सवाल उठाने वाले ये कोई पहले व्यक्ति नहीं हैं। पिछले कुछ महीनों से चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर विपक्ष और कई सामाजिक संगठन सवाल उठा रहे हैं। वोटर लिस्ट से नाम कटने, EVM की विश्वसनीयता, चुनाव की तारीखों के ऐलान और आचार संहिता के उल्लंघन पर कार्रवाई जैसे मुद्दों पर आयोग की आलोचना हो रही है।
अभिजीत दीपके कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक हैं। ये पार्टी भले ही छोटी हो लेकिन सोशल मीडिया पर चुनावी मुद्दों को लेकर काफी एक्टिव रहती है। दीपके का कहना है कि चुनाव आयोग को पूरी तरह से स्वतंत्र होना चाहिए। आयोग के किसी भी पदाधिकारी का किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं होना चाहिए। अगर CEC खुद किसी को चुनाव लड़ने का ऑफर दे रहे हैं तो ये संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। जिजी थॉमसन केरल के पूर्व मुख्य सचिव रह चुके हैं। वो 1980 बैच के IAS अधिकारी हैं और केरल सरकार में कई अहम पदों पर रहे हैं। रिटायरमेंट के बाद भी वो सार्वजनिक जीवन में एक्टिव हैं और कई बार सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं। उनका ये बयान इसलिए भी अहम हो जाता है क्योंकि वो खुद एक सीनियर ब्यूरोक्रेट रहे हैं।
ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के IAS अधिकारी हैं। वो केंद्र सरकार में गृह मंत्रालय में कई अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने के समय भी वो गृह मंत्रालय में थे। 2024 में उन्हें चुनाव आयुक्त बनाया गया और फिर मुख्य चुनाव आयुक्त की जिम्मेदारी मिली। उनके कार्यकाल में कई बड़े चुनाव हुए हैं। अब सवाल ये है कि जिजी थॉमसन का ये दावा कितना सच है। उन्होंने इंटरव्यू में कहा कि ज्ञानेश कुमार ने फोन पर उनसे बात की थी। लेकिन उन्होंने तारीख, समय या बातचीत का कोई रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किया। चुनाव आयोग की तरफ से अभी इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। CEC ऑफिस के सूत्रों का कहना है कि इस तरह के निराधार आरोप लगाना गलत है। चुनाव आयोग हमेशा स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से काम करता है। लेकिन सोशल मीडिया पर ये पोस्ट वायरल हो गई है। लाखों लोगों ने इसे शेयर किया है। कमेंट में लोग लिख रहे हैं कि अगर ये सच है तो CEC को इस्तीफा देना चाहिए। कुछ लोग कह रहे हैं कि सबूत के बिना ऐसे आरोप नहीं लगाने चाहिए। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश की है। कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने कहा कि चुनाव आयोग की साख दांव पर है। इस मामले की जांच होनी चाहिए।
अभिजीत दीपके ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि लोकतंत्र की रीढ़ चुनाव आयोग है। अगर रीढ़ ही टेढ़ी हो जाएगी तो लोकतंत्र कैसे चलेगा। उन्होंने कहा कि वो इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रपति को ज्ञापन भी देंगे और मांग करेंगे कि संसद में इस पर चर्चा हो। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के समय ऐसे आरोप लगना आम बात है। लेकिन जब आरोप किसी रिटायर्ड IAS अधिकारी द्वारा लगाया जाए तो उसका वजन बढ़ जाता है। थॉमसन ने कहा कि उन्होंने ऑफर ठुकरा दिया क्योंकि वो राजनीति में नहीं आना चाहते थे। उन्होंने ये भी कहा कि ब्यूरोक्रेसी और राजनीति को अलग रखना जरूरी है। इस पूरे विवाद के बीच एक बात साफ है कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद से EVM, वोटर टर्नआउट डेटा और चुनाव प्रचार में आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर आयोग पर दबाव है। अब CEC पर व्यक्तिगत आरोप लगने से मामला और गरमा गया है।
कानून के जानकार कहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति ये दावा करता है कि उसे चुनाव लड़ने का ऑफर मिला तो उसे सबूत देना चाहिए। वरना ये मानहानि का मामला भी बन सकता है। वहीं दूसरी तरफ ये भी कहा जा रहा है कि CEC जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को ऐसी बातचीत से बचना चाहिए जिससे संस्था की साख पर सवाल उठे। अभिजीत दीपके ने कहा कि वो इस मुद्दे को यहीं नहीं छोड़ेंगे। वो RTI के जरिए जानकारी मांगेंगे कि CEC ने पिछले एक साल में कितने रिटायर्ड अधिकारियों से संपर्क किया। क्या चुनाव आयोग के किसी नियम में ये लिखा है कि CEC किसी को चुनाव लड़ने के लिए मना सकता है।
सोशल मीडिया पर #ResignGyaneshKumar भी ट्रेंड करने लगा। समर्थकों का कहना है कि चुनाव आयोग को कठपुतली नहीं बनना चाहिए। विरोधियों का कहना है कि ये विपक्ष की साजिश है। फिलहाल चुनाव आयोग ने चुप्पी साध रखी है। लेकिन दबाव बढ़ रहा है कि आयोग इस पर सफाई दे। क्योंकि जनता का भरोसा ही चुनाव आयोग की सबसे बड़ी पूंजी है। अगर लोगों को लगने लगा कि आयोग पक्षपात कर रहा है तो लोकतंत्र की नींव हिल जाएगी। जिजी थॉमसन ने कहा कि उन्होंने ये बात इसलिए सार्वजनिक की ताकि भविष्य में कोई और अधिकारी इस तरह के दबाव में न आए। उन्होंने कहा कि ब्यूरोक्रेट्स को निडर होकर काम करना चाहिए।
अभिजीत दीपके ने आखिर में लिखा कि हम लड़ेंगे और जीतेंगे। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव हमारी मांग है। अगर CEC इस कसौटी पर खरे नहीं उतरते तो उन्हें जाना होगा। अब देखना है कि चुनाव आयोग इस पर क्या जवाब देता है। क्या वो थॉमसन के आरोपों को खारिज करेगा। क्या कोई जांच होगी। या फिर ये मामला ऐसे ही ठंडे बस्ते में चला जाएगा। लेकिन इतना तय है कि 2027 के चुनाव से पहले ये विवाद आयोग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।