74 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल, राम मंदिर चढ़ावा चोरी में 8 आरोपी, ट्रस्ट के 2 पदाधिकारी गवाह
अयोध्या। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने 74 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में पुलिस ने 8 लोगों को आरोपी बनाया है और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और कोषाध्यक्ष अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दे दी है। साथ ही दोनों को इस केस में सरकारी गवाह भी बनाया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आया है कि ट्रस्ट के दोनों बड़े पदाधिकारियों की इस चोरी में कोई भूमिका नहीं थी। बल्कि उन्होंने ही सबसे पहले इसकी शिकायत की थी और जांच में पूरा सहयोग किया था।
मामला 3 और 4 जून 2026 का है। राम मंदिर में दानपेटियों से चढ़ावा निकालकर गिनती का काम रोजाना होता है। 3 जून की रात दानपेटी खोलने के बाद गिनती के दौरान कुछ रकम कम मिली। अगले दिन 4 जून को फिर से गिनती के समय अविनाश शुक्ला नाम के एक कर्मचारी को चोरी करते हुए गणना कर्मी संत प्रसाद वर्मा ने रंगे हाथ देख लिया। संत प्रसाद ने तुरंत इसकी सूचना मंदिर के वरिष्ठ अधिकारियों को दी। इसके बाद मंदिर के एक अन्य कर्मचारी मदन गोपाल निगम को भी बुलाया गया। मामला बढ़ता देख उसी दिन ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को भी जानकारी दी गई। चंपत राय ने तुरंत रामजन्मभूमि थाने में तहरीर दी और कहा कि मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी हुई है। पुलिस ने तुरंत FIR दर्ज करके जांच शुरू कर दी।
जांच के दौरान पुलिस ने मंदिर के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। गिनती कक्ष में लगे कैमरों में साफ दिखा कि 3 और 4 जून को कुछ कर्मचारी गिनती के समय रकम निकालकर जेब में रख रहे थे। पुलिस ने गिनती कक्ष में काम करने वाले 12 लोगों से पूछताछ की। मोबाइल की CDR निकाली। बैंक खातों की जांच की। कई जगह छापेमारी हुई। इसी दौरान 8 लोगों के नाम सामने आए। पुलिस ने बताया कि ये सभी लोग गिनती से जुड़े हुए थे और मौका देखकर चढ़ावे की रकम चुरा लेते थे। चार्जशीट में पुलिस ने जिन 8 लोगों को आरोपी बनाया है उनमें अविनाश शुक्ला, संत प्रसाद वर्मा के साथ काम करने वाले कुछ अन्य गणना कर्मी और ठेके पर रखे गए कर्मचारी शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि ये लोग पिछले कई महीनों से छोटे-छोटे अमाउंट निकाल रहे थे। 3 जून को जब ज्यादा रकम निकली तो गड़बड़ी पकड़ में आ गई। 4 जून को अविनाश शुक्ला को संत प्रसाद वर्मा ने देख लिया। उसने देखा कि अविनाश गिनती के दौरान 500 और 200 के नोट अलग रख रहा है। जब उससे पूछा गया तो वो घबरा गया और भागने लगा। शोर सुनकर मदन गोपाल निगम और बाकी स्टाफ आ गए। इसके बाद ट्रस्ट को सूचना दी गई।
पुलिस ने चार्जशीट में कहा है कि चोरी की कुल रकम अभी जोड़ी जा रही है लेकिन शुरुआती अनुमान के मुताबिक लाखों रुपये का चढ़ावा गायब हुआ है। पुलिस ने आरोपियों के घर से कुछ नकदी और मंदिर के टोकन भी बरामद किए हैं। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि गिनती के समय भीड़ ज्यादा होती थी और कोई ध्यान नहीं देता था इसलिए वो पैसे निकाल लेते थे। सबसे अहम बात ये है कि पुलिस ने इस चार्जशीट में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और कोषाध्यक्ष अनिल मिश्रा को पूरी तरह क्लीन चिट दे दी है। पुलिस ने कहा कि जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे ये साबित हो कि चंपत राय या अनिल मिश्रा इस चोरी में शामिल थे। उल्टा उन्होंने ही सबसे पहले पुलिस को सूचना दी और कहा कि मंदिर की पवित्रता के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। पुलिस ने दोनों को सरकारी गवाह बनाया है ताकि कोर्ट में वो बता सकें कि चोरी कैसे पकड़ी गई और ट्रस्ट ने क्या कार्रवाई की।
चंपत राय ने चार्जशीट दाखिल होने के बाद कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां एक रुपये की भी चोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जैसे ही हमें पता चला हमने तुरंत पुलिस को बताया। हम चाहते हैं कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले। अनिल मिश्रा ने कहा कि ट्रस्ट की तरफ से हर महीने का हिसाब ऑडिट होता है। इसी ऑडिट में गड़बड़ी पकड़ में आई। अब आगे से गिनती की प्रक्रिया और सख्त की जाएगी। सीसीटीवी की संख्या बढ़ाई जाएगी और दोहरी जांच होगी। इस मामले में राजनीति भी हुई। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि ट्रस्ट के बड़े लोग इसमें शामिल हैं। लेकिन पुलिस की चार्जशीट के बाद अब विपक्ष बैकफुट पर आ गया है। संत समाज ने भी कहा है कि मंदिर की गरिमा के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने पुलिस की चार्जशीट को स्वीकार कर लिया है और आरोपियों के खिलाफ सुनवाई शुरू होगी। पुलिस ने कोर्ट से मांग की है कि आरोपियों को जमानत न दी जाए क्योंकि मामला आस्था से जुड़ा है।
अयोध्या पुलिस का कहना है कि ये संदेश देना जरूरी था कि राम मंदिर में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं होगी। मंदिर की सुरक्षा और चढ़ावे की गिनती के लिए अब नई SOP बनाई जा रही है। उसमें हर कर्मचारी की जिम्मेदारी तय होगी और हर पाई का हिसाब होगा। कुल मिलाकर 74 हजार पन्नों की इस चार्जशीट ने साफ कर दिया है कि चोरी कुछ कर्मचारियों ने की थी। ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारी निर्दोष हैं और उन्होंने ही इस पूरे मामले का पर्दाफाश किया। अब कोर्ट में ट्रायल के बाद तय होगा कि आरोपियों को कितनी सजा मिलती है।