UN महासभा के बीच ट्रंप का ईरान को अल्टीमेटम – समझौता करो या तबाही के लिए तैयार रहो, कहा 3 नवम्बर से पहले निकल सकता है हल
समझौता या तबाही | न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर दुनिया के सामने सबसे कड़ा बयान दिया। उन्होंने साफ कहा कि उनके पास ईरान को लेकर दो ही रास्ते हैं। पहला रास्ता है एक ऐसा समझौता करना जिससे ईरान फिर से खड़ा हो सके और पहले से ज्यादा मजबूत बन सके। दूसरा रास्ता है ईरान को पूरी तरह तबाह कर देना ताकि वो दोबारा किसी देश या लोगों को नुकसान न पहुंचा सके। ट्रंप ने कहा कि ये फैसला उन्हें बहुत जल्द करना है। उनका लहजा बहुत सख्त था लेकिन साथ में उन्होंने ये भी कहा कि वो समझौता चाहते हैं। UNGA के हॉल में बैठे दुनिया के नेताओं के सामने ट्रंप ने ये बात ऐसे समय कही जब पिछले 7 महीने से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच सीधा संघर्ष चल रहा है। इस लड़ाई में हजारों लोग मारे जा चुके हैं। तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और पूरे मध्य पूर्व में आग लगी हुई है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका शांति चाहता है लेकिन कमजोरी नहीं दिखाएगा। अगर ईरान ने हथियार डाल दिए और परमाणु कार्यक्रम बंद कर दिया तो अमेरिका उसे दोबारा बनाने में मदद करेगा। लेकिन अगर ईरान नहीं माना तो अमेरिका के पास जो ताकत है उससे ईरान को दोबारा उठने लायक नहीं छोड़ा जाएगा। ट्रंप की इस बात के बाद UN में सन्नाटा छा गया। कई देशों के राजनयिकों ने कहा कि ये बयान जंग और शांति के बीच की लकीर है।
7 महीने से चल रही जंग और उसका असर
ये संघर्ष कोई नया नहीं है। करीब सात महीने पहले अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के परमाणु ठिकानों और मिसाइल बेस पर हमले किए थे। जवाब में ईरान ने भी इजरायल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी अड्डों पर हमले किए। तब से ये लड़ाई रुक-रुक कर चल रही है। इस बीच हजारों आम लोग मारे गए हैं। गाजा, लेबनान, यमन और सीरिया में हालात और खराब हो गए हैं। सबसे बड़ा असर तेल पर पड़ा है। दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। जंग की वजह से इस रास्ते पर खतरा बढ़ गया है। ईरान ने कई बार इस रास्ते को बंद करने की धमकी दी है। इसकी वजह से कच्चे तेल के दाम 120 डॉलर प्रति बैरल के पार चले गए थे। महंगाई बढ़ गई है। भारत जैसे देशों पर भी इसका असर पड़ा है। सऊदी अरब, UAE, कतर जैसे देश भी इस जंग में फंस गए हैं क्योंकि उनके यहां अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं और ईरान उन्हें निशाना बना रहा है। यमन के हूती लड़ाके जो ईरान के समर्थक माने जाते हैं, उन्होंने सऊदी की तेल पाइपलाइन और लाल सागर में जहाजों पर हमले तेज कर दिए हैं। इसी वजह से सऊदी अरब ने अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन फिर से शुरू की है ताकि होर्मुज के बिना भी तेल भेजा जा सके।
पर्दे के पीछे चल रही बातचीत – विटकॉफ की कोशिश
ट्रंप भले ही मंच से सख्त बात कर रहे हों लेकिन पर्दे के पीछे कूटनीति भी पूरी रफ्तार से चल रही है। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने बताया कि मंगलवार को UN महासभा के दौरान मध्यस्थों के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच कई घंटे लंबी बातचीत हुई। कतर, ओमान और स्विट्जरलैंड मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। विटकॉफ ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच सीधी बात नहीं हुई लेकिन संदेशों का आदान-प्रदान होता रहा। उन्होंने उम्मीद जताई कि ये बातचीत किसी नतीजे पर पहुंचेगी। सूत्रों के मुताबिक ईरान ने पिछले हफ्ते अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भेजा है। उसमें ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका सैन्य दबाव कम करे और ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी हटाए तो वो 7 दिन के अंदर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल देगा। ईरान ये भी चाहता है कि उस पर लगे कुछ प्रतिबंध हटाए जाएं ताकि वो तेल बेच सके और अर्थव्यवस्था सुधार सके। अमेरिका की मांग है कि ईरान अपना यूरेनियम संवर्धन 60 प्रतिशत से घटाकर 3.67 प्रतिशत पर लाए और मिसाइल कार्यक्रम पर रोक लगाए। अभी दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हैं लेकिन बातचीत जारी है। विटकॉफ ने कहा कि 3 नवंबर को अमेरिका में मध्यावधि चुनाव हैं। ट्रंप चाहते हैं कि उससे पहले कोई डील हो जाए ताकि वो इसका श्रेय ले सकें।
ईरान का जवाब – हम झुकेंगे नहीं
ट्रंप के बयान के कुछ घंटे बाद ही ईरान का जवाब आ गया। ईरान के सशस्त्र बलों ने कहा कि ट्रंप का बयान सिर्फ प्रचार है। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी हमले का और ज्यादा भारी, गंभीर और अप्रत्याशित जवाब देने के लिए तैयार है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर कालीबाफ ने कहा कि ईरानी कौम कभी आत्मसमर्पण नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि ट्रंप ये समझ लें कि वो ताकत के दम पर ईरान की जनता को नहीं झुका सकते। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से मुलाकात की। कतर पिछले कई महीने से अमेरिका और ईरान के बीच पुल बना हुआ है। अराकची ने कहा कि ईरान शांति चाहता है लेकिन सम्मान के साथ। अगर अमेरिका ने पाबंदियां नहीं हटाईं तो ईरान भी पीछे नहीं हटेगा। तेहरान की सड़कों पर भी लोगों ने प्रदर्शन किया और अमेरिका मुर्दाबाद के नारे लगाए। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और वो इसे बंद नहीं करेगा। लेकिन वो ये भी कह रहा है कि अगर अमेरिका ईमानदारी से बात करे तो रास्ता निकल सकता है।
खाड़ी देशों की टेंशन और कतर का प्लान
इस पूरे झगड़े में सबसे ज्यादा फंसे हैं खाड़ी के देश। सऊदी अरब, UAE, कतर, बहरीन, कुवैत। इन सबके यहां अमेरिकी सेना के बड़े अड्डे हैं। ईरान ने धमकी दी है कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो वो इन अड्डों को उड़ा देगा। साथ ही ये देश ये भी नहीं चाहते कि ईरान बहुत ज्यादा कमजोर हो जाए क्योंकि तब इलाके में पावर बैलेंस बिगड़ जाएगा। ट्रंप ने UN के दौरान इन देशों के नेताओं से अलग से मुलाकात की। सभी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य तुरंत खोला जाए। युद्ध से पहले दुनिया का 5वां हिस्सा तेल यहीं से जाता था। कतर ने एक नया प्रस्ताव रखा है। उसने कहा कि खाड़ी देशों और ईरान के बीच एक साझा सुरक्षा व्यवस्था बनाई जाए। इसमें सबकी सुरक्षा की गारंटी हो और आर्थिक रिश्ते भी मजबूत हों। कतर का कहना है कि दुश्मनी से कुछ नहीं होगा, व्यापार से सब ठीक होगा। ईरान इस प्रस्ताव को देख रहा है। सऊदी अरब को सबसे ज्यादा डर यमन के हूतियों से है। हूतियों ने सऊदी समर्थित सरकार को पीछे धकेल दिया है और लाल सागर में सऊदी के तेल जहाजों को निशाना बना रहे हैं। सऊदी ने अमेरिका से मदद मांगी है लेकिन अमेरिका अभी सीधे कूदने को तैयार नहीं है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि हम सऊदी के साथ हैं लेकिन हूती वाला मामला बहुत उलझा हुआ है।