“टाटा संस में नेतृत्व की निरंतरता: एन चंद्रशेखरन 2032 तक रहेंगे कार्यकारी चेयरमैन”
मुंबई। टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस ने आखिरकार वो राज बता दिया जिसे पूरा कॉरपोरेट जगत जानना चाहता था। आखिर एन चंद्रशेखरन उर्फ चंद्रा दोबारा चेयरमैन बनने के लिए कैसे माने। ये सफर आसान नहीं था। इसमें 14 महीने की कवायद, बोर्ड की कई बैठकें, असहमति और फिर एक आखिरी अनुरोध शामिल है। 17 सितंबर 2026 को टाटा संस ने आधिकारिक बयान जारी करके बताया कि चंद्रशेखरन को अगले 5 साल के लिए फिर से कार्यकारी चेयरमैन नियुक्त किया गया है। उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म हो रहा था। लेकिन अब वो 2032 तक टाटा साम्राज्य की कमान संभालेंगे। सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि चंद्रा ने खुद अगस्त 2026 में कहा था कि वो दोबारा इस पद की दौड़ में नहीं हैं। फिर ऐसा क्या हुआ कि वो मान गए। कहानी शुरू होती है जुलाई 2025 से।
जुलाई 2025 से शुरू हुई थी कवायद
टाटा संस ने अपने बयान में साफ किया कि ये प्रक्रिया कोई एक दिन की नहीं थी। जुलाई 2025 से ही चंद्रशेखरन की फिर से नियुक्ति को लेकर चर्चा शुरू हो गई थी। वजह भी थी। 2017 में जब रतन टाटा ने चंद्रा को टाटा संस का चेयरमैन बनाया था, तब से लेकर अब तक समूह ने हर क्षेत्र में नई ऊंचाई छुई है। एयर इंडिया की वापसी, टाटा डिजिटल, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर प्लांट से लेकर दुनिया भर में टाटा की ब्रांड वैल्यू बढ़ाना। 9 साल में टाटा समूह का मार्केट कैप 3 गुना बढ़ गया। टाटा ट्रस्ट्स को लगा कि नेतृत्व में निरंतरता जरूरी है। 28 जुलाई 2025 को टाटा ट्रस्ट्स ने एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पास किया। उस प्रस्ताव में चंद्रा के 8 साल के काम की सराहना की गई और कहा गया कि उनके वर्तमान कार्यकाल की समाप्ति पर उन्हें अगले 5 वर्षों के लिए फिर से कार्यकारी चेयरमैन के रूप में नियुक्त किया जाए। टाटा ट्रस्ट्स टाटा संस की सबसे बड़ी शेयरहोल्डर है इसलिए उसकी राय सबसे अहम मानी जाती है।
बोर्ड के अंदर क्या हुआ, कौन-कौन था साथ
टाटा ट्रस्ट्स के प्रस्ताव के बाद मामला टाटा संस बोर्ड में आया। बोर्ड में 11 डायरेक्टर हैं। इसमें रतन टाटा के वक्त के पुराने डायरेक्टर भी हैं और नए प्रोफेशनल भी। सितंबर 2025 से जनवरी 2026 तक बोर्ड की 4 बैठकें हुईं। हर बैठक में एक ही एजेंडा था – चेयरमैन का उत्तराधिकारी। बोर्ड के अंदर 2 धड़े बन गए थे।
पहला धड़ा: ट्रस्ट्स और पुराने डायरेक्टर। इनका कहना था “चंद्रा ने 9 साल में समूह को बदल दिया। अभी बदलाव का समय नहीं है।”
दूसरा धड़ा: कुछ नए इंडिपेंडेंट डायरेक्टर। इनका कहना था “10 साल काफी होते हैं। अब नए खून को मौका देना चाहिए। प्रोफेशनल उत्तराधिकार तय करना चाहिए।” लेकिन धीरे-धीरे पहला धड़ा भारी पड़ता गया। वजह थी नतीजे। एयर इंडिया मुनाफे में आई। टाटा कंसल्टेंसी TCS दुनिया की टॉप 10 IT कंपनी बनी। टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा पावर सबने रिकॉर्ड मुनाफा दिया। जनवरी 2026 की बैठक में बोर्ड ने 8-3 के बहुमत से प्रस्ताव पास किया कि चंद्रशेखरन को फिर से 5 साल का कार्यकाल दिया जाए।
अगस्त 2026 का ट्विस्ट, चंद्रा ने कहा “मैं नहीं लडूंगा”
सबको लगा कि बात पक्की हो गई। लेकिन अगस्त 2026 में ट्विस्ट आया। एक इंटरनल मीटिंग में चंद्रशेखरन ने कहा “मैं 65 का हो गया हूं। 9 साल काफी हैं। मैं दोबारा कार्यकारी चेयरमैन की दौड़ में नहीं हूं। अब नए लीडर को मौका मिलना चाहिए।” ये सुनकर बोर्ड में सन्नाटा छा गया। चंद्रा ने 3 कारण बताए।
पहला: वो थोड़ा आराम करना चाहते हैं। पिछले 9 साल में 300 दिन से ज्यादा यात्रा की।
दूसरा: वो चाहते हैं कि टाटा में उत्तराधिकार की परंपरा बने। हर 10 साल में नया चेहरा।
तीसरा: परिवार। उन्होंने कहा “बच्चे बड़े हो गए हैं। अब समय देना है।”
चंद्रा के इस फैसले के बाद टाटा ट्रस्ट्स और बोर्ड के बड़े डायरेक्टर परेशान हो गए। क्योंकि बाहर से कोई नया चेहरा लाना आसान नहीं था। टाटा कल्चर को समझने में 2-3 साल लग जाते।
फिर कैसे माने चंद्रा, वो आखिरी 30 दिन
अगस्त के आखिरी हफ्ते से सितंबर के दूसरे हफ्ते तक टाटा हाउस में गुप्त बैठकें चलीं।
पहली कोशिश: रतन टाटा के करीबी और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन ने चंद्रा से 2 घंटे की वन-टू-वन बात की। कहा “समूह को आपकी जरूरत है। एयर इंडिया अभी स्टेबल नहीं हुई। सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू होना है। टाटा डिजिटल को ब्रेकईवन करना है। बीच में नेतृत्व बदला तो 2 साल पीछे चले जाएंगे।”चंद्रा ने सुना लेकिन हां नहीं की।
दूसरी कोशिश: बोर्ड के 6 डायरेक्टर चंद्रा के घर गए। उन्होंने एक प्रेजेंटेशन दिया। उसमें दिखाया गया कि 2027 से 2032 तक टाटा के सामने क्या बड़े प्रोजेक्ट हैं। 70 बिलियन डॉलर का इन्वेस्टमेंट। 5 लाख नई नौकरी। अगर नेतृत्व बदला तो इन्वेस्टर का भरोसा डगमगाएगा।चंद्रा फिर भी चुप रहे।
आखिरी कोशिश: 10 सितंबर 2026 को टाटा ट्रस्ट्स ने एक भावनात्मक चिट्ठी लिखी। उसमें लिखा था “जेआरडी के बाद रतन टाटा ने 21 साल समूह संभाला। आपने 9 साल में उसे ग्लोबल बनाया। अब आखिरी 5 साल और। ये टाटा के लिए, 10 लाख कर्मचारियों के लिए।” इसके साथ बोर्ड ने एक शर्त भी रखी। “आपको कार्यकारी चेयरमैन तो रहना होगा लेकिन रोज के काम के लिए एक COO नियुक्त कर देंगे। आप रणनीति देखेंगे।” यही बात चंद्रा को मान गई।
17 सितंबर 2026 को ऐलान, चंद्रा के 9 साल का रिपोर्ट कार्ड
सब बात बनने के बाद 17 सितंबर को टाटा संस ने प्रेस रिलीज जारी की। “बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने सर्वसम्मति से श्री एन चंद्रशेखरन को 21 फरवरी 2027 से 20 फरवरी 2032 तक अगले 5 साल के लिए कार्यकारी चेयरमैन नियुक्त किया है।” बयान में ये भी कहा गया कि “चंद्रा ने शुरू में मना किया था लेकिन बोर्ड और ट्रस्ट्स के अनुरोध पर उन्होंने देश और समूह के हित में ये जिम्मेदारी स्वीकार की।”
बोर्ड ने चंद्रा को दोबारा क्यों चुना, इसका जवाब उनके 9 साल के काम में है।
2017: जब चंद्रा आए तो साइरस मिस्त्री वाला विवाद ताजा था। समूह में अंदरूनी लड़ाई थी। चंद्रा ने 6 महीने में सबको साथ लिया।
2018-2020: टाटा स्टील ने भुषण स्टील खरीदी। टाटा मोटर्स ने EV में एंट्री की।
2021-2022: सबसे बड़ा दांव – एयर इंडिया की वापसी। 18 हजार करोड़ में एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस खरीदी। सबने कहा “पैसे डूब जाएंगे।” लेकिन 2025 में एयर इंडिया मुनाफे में आ गई।
2023-2024: टाटा डिजिटल लॉन्च। बिगबास्केट, 1mg, क्यूरफिट सब एक प्लेटफॉर्म पर। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स। गुजरात और तमिलनाडु में सेमीकंडक्टर और iPhone पार्ट्स का प्लांट।
2025-2026: ब्रांड वैल्यू। टाटा ब्रांड 28 बिलियन डॉलर। दुनिया की टॉप 100 ब्रांड में।
इसी वजह से बोर्ड को लगा “अभी चंद्रा ही चाहिए।”
कॉरपोरेट जगत की प्रतिक्रिया, चंद्रा खुद क्या बोले
चंद्रा के फिर से नियुक्ति के बाद बाजार ने तुरंत रिएक्शन दिया। अगले दिन टाटा ग्रुप की सभी लिस्टेड कंपनियों के शेयर 2-3% बढ़े। इंडस्ट्री लीडर्स ने कहा “निरंतरता अच्छी है।” मुकेश अंबानी ने बधाई देते हुए कहा “चंद्रा ने टाटा को नई ऊंचाई दी।” सुंदर पिचाई ने कहा “चंद्रा के साथ काम करना प्रेरणा है।” लेकिन कुछ कॉरपोरेट गवर्नेंस एक्सपर्ट ने सवाल भी उठाया “क्या 10 साल से ज्यादा एक व्यक्ति को चेयरमैन रखना सही है? उत्तराधिकार प्लानिंग कहां है?” टाटा संस ने इसका जवाब दिया “हमने COO का पद बना दिया है। 2028 तक उत्तराधिकारी का नाम भी तय कर दिया जाएगा।”
नियुक्ति के बाद चंद्रशेखरन ने कर्मचारियों को एक इंटरनल मेल लिखा। “मैंने पहले मना किया था क्योंकि मैं मानता हूं कि बदलाव जरूरी है। लेकिन बोर्ड और ट्रस्ट्स ने मुझ पर जो भरोसा दिखाया उसके लिए धन्यवाद। अगले 5 साल हम टाटा को टेक्नोलॉजी और ग्रीन एनर्जी की कंपनी बनाएंगे। एयर इंडिया को दुनिया की टॉप 5 एयरलाइन। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स को ग्लोबल चैंपियन। ये मेरा वादा है।” उन्होंने ये भी कहा “मैं अब हफ्ते में 4 दिन ऑफिस आऊंगा। बाकी काम COO देखेगा।”
“कैसे माने चंद्रा” का जवाब अब साफ है। 14 महीने की कवायद, बोर्ड का दबाव, ट्रस्ट्स का अनुरोध और समूह की जरूरत। चंद्रा ने अगस्त में मना किया था। लेकिन सितंबर में मान गए। क्योंकि टाटा के लिए “व्यक्ति से बड़ा संस्थान” होता है। अब चंद्रा 2032 तक टाटा की कमान संभालेंगे। तब वो 71 के होंगे। उस समय तक टाटा समूह 500 बिलियन डॉलर का समूह बनने का लक्ष्य रखता है। टाटा संस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा “ये नियुक्ति सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं है। ये टाटा की उस परंपरा की जीत है जहां संस्था पहले, व्यक्ति बाद में।” और शायद इसी वजह से पूरा कॉरपोरेट जगत ये जानना चाहता था कि आखिर चंद्रा माने कैसे।