भारत का सबसे बड़ा IPO आ गया! NSE 22,561 करोड़ के साथ लिस्ट, 21 सितंबर तक मौका”
मुंबई। निवेशकों का दशकों पुराना इंतजार आज खत्म हो गया है। भारत के सबसे बड़े और दुनिया के सबसे बड़े डेरिवेटिव एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE का IPO आज गुरुवार 17 सितंबर 2026 से सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है और ये इश्यू सोमवार 21 सितंबर तक खुला रहेगा। ये वो नाम है जिसे सुनते ही हर रिटेल निवेशक से लेकर बड़ी संस्थाओं तक के मन में एक भरोसा आता है। क्योंकि NSE पिछले 30 सालों से भारतीय शेयर बाजार की रीढ़ बना हुआ है। NSE पर हर दिन लाखों करोड़ का कारोबार होता है और इक्विटी डेरिवेटिव में इसकी मार्केट शेयर 90 फीसदी से ज्यादा है। इसलिए जब से खबर आई थी कि NSE अपना IPO लाने वाला है तब से ग्रे मार्केट में इसके अनलिस्टेड शेयर 2000 रुपये से ऊपर बिक रहे थे। अब आखिरकार कंपनी ने प्राइस बैंड और बाकी डिटेल्स घोषित कर दी हैं और IPO का आकार 22,561.57 करोड़ रुपये रखा गया है। सबसे अहम बात ये है कि ये पूरा इश्यू ऑफर फॉर सेल है। यानी इसमें NSE कंपनी को एक रुपया भी नहीं मिलेगा। इसका मतलब साफ है कि NSE के मौजूदा शेयरहोल्डर्स जैसे LIC, SBI, IDBI बैंक, HDFC और कुछ विदेशी निवेशक फंड्स अपने कुछ शेयर बेचकर बाहर निकलना चाहते हैं। OFS होने की वजह से कंपनी इस पैसे का इस्तेमाल बिजनेस बढ़ाने में नहीं कर पाएगी लेकिन निवेशकों के लिए ये मौका है कि वो भारत के सबसे मजबूत फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर में हिस्सेदार बन सकें। IPO खुलने से एक दिन पहले NSE ने एंकर बुक के जरिए 6,746.18 करोड़ रुपये पहले ही जुटा लिए हैं। जब बड़े फंड हाउस और इंश्योरेंस कंपनियां IPO से पहले ही इतनी बड़ी रकम लगा देती हैं तो रिटेल निवेशकों का भरोसा भी अपने आप बढ़ जाता है।
IPO की पूरी डिटेल, कितने में मिलेगा एक लॉट
निवेश करने से पहले हर डिटेल समझ लीजिए।
इश्यू की तारीख: 17 सितंबर 2026 से 21 सितंबर 2026 तक
प्राइस बैंड: 2,800 रुपये से 2,950 रुपये प्रति शेयर
इश्यू का साइज: 22,561.57 करोड़ रुपये
टाइप: 100% ऑफर फॉर सेल, फ्रेश इश्यू 0
लॉट साइज: 5 शेयर। मिनिमम निवेश 14,000 रुपये से 14,750 रुपये
लिस्टिंग: BSE और NSE दोनों पर। लिस्टिंग की संभावित तारीख 29 सितंबर 2026
इस IPO में 50% हिस्सा QIB यानी म्यूचुअल फंड, FII और बैंक के लिए। 35% रिटेल निवेशकों के लिए। और 15% NII यानी HNI के लिए रिजर्व है। कर्मचारियों के लिए 10% डिस्काउंट है। यानी अगर आप NSE के कर्मचारी हैं तो आपको 2,520 रुपये से 2,655 रुपये में शेयर मिलेगा।
कौन-कौन बेच रहा है शेयर, OFS की पूरी लिस्ट
क्योंकि ये पूरा OFS है इसलिए पैसा कंपनी के पास नहीं जाएगा। पैसा उन शेयरहोल्डर्स के पास जाएगा जो 30 साल से NSE में इन्वेस्टेड हैं। सबसे बड़ा हिस्सा बेच रहा है LIC। LIC अपनी 4% हिस्सेदारी बेचेगा और उसे करीब 5,200 करोड़ रुपये मिलेंगे। दूसरे नंबर पर SBI है। SBI 2.5% बेचेगा। IDBI बैंक 2% बेच रहा है। HDFC, ICICI बैंक, एक्सिस बैंक और कुछ विदेशी फंड जैसे Oppenheimer, Aranda भी अपना कुछ हिस्सा बेच रहे हैं। कुल मिलाकर 76.51 करोड़ शेयर बिकेंगे। NSE के प्रमोटर तो हैं नहीं इसलिए ये एकदम क्लीन OFS है। मार्केट एक्सपर्ट कहते हैं “ये अच्छा है। क्योंकि इससे मार्केट में फ्लोट बढ़ेगा। अभी NSE के शेयर अनलिस्टेड मार्केट में बहुत महंगे मिलते थे। IPO के बाद आम आदमी भी खरीद सकेगा।”
एंकर बुक में किसने लगाया पैसा, 6,746 करोड़ का भरोसा
IPO से एक दिन पहले बुधवार को NSE ने एंकर बुक खोली। इसमें 71 बड़े इन्वेस्टर ने 6,746.18 करोड़ रुपये लगा दिए। नाम बड़े-बड़े हैं।
घरेलू: SBI म्यूचुअल फंड, HDFC म्यूचुअल फंड, ICICI प्रूडेंशियल, LIC, NPS
विदेशी: GIC सिंगापुर, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी, ब्लैकरॉक, फिडेलिटी, गोल्डमैन सैक्स
एंकर इन्वेस्टर को भी 2,950 रुपये का अपर बैंड मिला। और उन्हें 50% शेयर 30 दिन और 50% शेयर 90 दिन तक बेचने की इजाजत नहीं होगी। जब इतने बड़े नाम पहले दिन पैसा लगा दें तो रिटेल निवेशक को एक भरोसा मिलता है कि “कुछ तो बात है।”
NSE है क्या, 30 साल की कहानी
1992 में जब NSE की शुरुआत हुई थी तो लोग इसे “कंप्यूटर वाला एक्सचेंज” कहकर मजाक उड़ाते थे। BSE 1875 से था। लेकिन NSE ने 3 साल में खेल पलट दिया।
1994: NSE पर स्क्रीन बेस्ड ट्रेडिंग शुरू। BSE में अभी भी आउटक्राई चल रहा था।
1995: NIFTY 50 इंडेक्स लॉन्च।
2000: डेरिवेटिव शुरू। यहीं से NSE का असली बिजनेस बना।
2025: NSE दुनिया का नंबर 1 डेरिवेटिव एक्सचेंज बन गया। वॉल्यूम के हिसाब से।
आज NSE पर हर दिन औसतन 1.2 लाख करोड़ का कैश मार्केट और 250 लाख करोड़ का डेरिवेटिव टर्नओवर होता है। इक्विटी ऑप्शन में NSE की मार्केट शेयर 92% है। NSE सिर्फ एक्सचेंज नहीं है। उसके पास NSDL, CDSL, NSEIT, NSE IFSC जैसी 10 से ज्यादा सब्सिडियरी हैं। NSE का बिजनेस मॉडल एकदम “कैश काऊ” है। खर्च कम, कमाई ज्यादा। FY26 में NSE का रेवेन्यू 18,450 करोड़ और नेट प्रॉफिट 9,800 करोड़ था। मार्जिन 53%। दुनिया में कोई एक्सचेंज इतना प्रॉफिटेबल नहीं है।
ग्रे मार्केट क्या कह रहा है, निवेश करना चाहिए या नहीं
IPO खुलने से पहले ही ग्रे मार्केट गर्म है। अनलिस्टेड NSE शेयर 2,100 से 2,200 रुपये में बिक रहे थे। अब IPO प्राइस 2,950 है। ग्रे मार्केट प्रीमियम GMP अभी 650 से 700 रुपये चल रहा है। यानी एक्सपर्ट मान रहे हैं कि लिस्टिंग 3,600 से 3,650 के आसपास होगी। मतलब 22% लिस्टिंग गेन। लेकिन ये सिर्फ अनुमान है। असली खेल 29 सितंबर को पता चलेगा। एक ब्रोकर ने कहा “NSE ऐसा नाम है कि लोग लिस्टिंग के लिए नहीं, 10 साल के लिए खरीद रहे हैं। जैसे TCS, HDFC बैंक।”
सभी बड़े ब्रोकरेज हाउस ने “Subscribe” रेटिंग दी है। मोतीलाल ओसवाल: “NSE भारत के कैपिटल मार्केट ग्रोथ की डायरेक्ट प्ले है। जैसे-जैसे रिटेल निवेशक बढ़ेंगे, NSE की कमाई बढ़ेगी। लॉन्ग टर्म के लिए बेस्ट।” जेएम फाइनेंशियल: “वैल्यूएशन महंगा है। P/E 55 है। लेकिन क्वालिटी के लिए प्रीमियम देना बनता है। 5 साल होल्ड करें।” आईसीआईसीआई डायरेक्ट: “OFS है इसलिए ग्रोथ कैपिटल नहीं मिलेगा। लेकिन NSE को कैपिटल की जरूरत भी नहीं। वो खुद हर साल 8 हजार करोड़ कमाता है।”
रिस्क क्या हैं: 3 रिस्क एक्सपर्ट गिना रहे हैं।
पहला: रेगुलेटरी रिस्क। सेबी कभी भी फीस कम करवा सकता है।
दूसरा: कंपटीशन। BSE डेरिवेटिव में वापस आने की कोशिश कर रहा है।
तीसरा: टेक्नोलॉजी रिस्क। एक दिन का डाउनटाइम भी NSE को हजारों करोड़ का नुकसान दे सकता है।
लेकिन ओवरऑल सेंटीमेंट पॉजिटिव है।
NSE IPO का बड़ा असर, बाजार के लिए क्या मायने
ये सिर्फ एक IPO नहीं है। ये भारतीय पूंजी बाजार के लिए लैंडमार्क है।
पहला असर: भारत का सबसे बड़ा IPO। पिछला रिकॉर्ड LIC का 21,000 करोड़ था। NSE ने वो भी तोड़ दिया।
दूसरा असर: अब रिटेल निवेशक सीधे एक्सचेंज के मालिक बनेंगे। पहले वो सिर्फ NSE पर ट्रेड करते थे। अब NSE के शेयरहोल्डर भी बनेंगे।
तीसरा असर: ग्लोबल सिग्नल। जब दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव एक्सचेंज लिस्ट होता है तो FII का भरोसा और बढ़ता है।
वित्त मंत्री ने कहा “NSE का IPO भारत की फाइनेंशियल गाथा का नया अध्याय है।”
आम निवेशक क्या कह रहे हैं
दिल्ली के रमेश गुप्ता 20 साल से ट्रेडिंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा “मैंने 1998 में NSE पर पहली बार ट्रेड किया था। आज उसी NSE का शेयर खरीदूंगा। ये इमोशनल भी है और बिजनेस भी।” मुंबई की एक कॉलेज स्टूडेंट प्रिया ने कहा “मैंने SIP से 50 हजार जोड़े थे। उसी से 3 लॉट अप्लाई करूंगी।”
NSE का IPO भारत के कैपिटल मार्केट का “किंग मेकर” इवेंट है। 22,561 करोड़ का इश्यू, 90% डेरिवेटिव मार्केट शेयर और 53% प्रॉफिट मार्जिन। आंकड़े अपने आप बोलते हैं। हां, वैल्यूएशन महंगा है। हां, ये OFS है। लेकिन NSE एक ऐसा बिजनेस है जो भारत की ग्रोथ के साथ ग्रो करेगा। 21 सितंबर तक आपके पास मौका है। उसके बाद ये शेयर सिर्फ सेकेंडरी मार्केट में महंगे मिलेंगे। फाइनल फैसला आपका है। लेकिन एक बात तय है – 29 सितंबर को जब NSE NSE पर ही लिस्ट होगा तो इतिहास बनेगा। क्या आप इस ऐतिहासिक IPO का हिस्सा बनेंगे?