राम मंदिर ट्रस्ट का बड़ा फैसला : वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जीतेन्द्र मिश्र बने पहले CEO , चढ़ावे में चोरी के बाद हुआ बदलाव
अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने कामकाज को और अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।हैं। चढ़ावे में चोरी के मामले के बाद मंदिर और ट्रस्ट की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठे थे। ऐसे में ट्रस्ट की ओर से एक अनुभवी और प्रशासनिक क्षमता रखने वाले अधिकारी को CEO की जिम्मेदारी सौंपने के फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देवरिया के जीतेन्द्र मिश्र संभालेंगे ट्रस्ट की कमान बोर्ड में 3 नए सदस्य भी शामिल अयोध्या | चढ़ावे में चोरी के विवाद के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बड़ा बदलाव किया है ट्रस्ट बे पहली बार CEO यानि मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति की है इस अहम् पद के लिए वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जीतेन्द्र मिश्र को चुना गया है वो इसी साल मई में पश्चिमी वायु कमान के कमांडिंग इस चीफ के पद से रिटायर हुए थे | ट्रस्ट के कार्यकर्ता महामंत्री कृष्ण मोहन ने बुधवार को प्रेस कान्फेंस में इसकी जानकारी दी |
कोन है नए CEO जीतेन्द्र मिश्र?
एयर मार्शल जीतेन्द्र मिश्र उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले है और एक मध्यम वर्गीय परिवार से आते है उसका करियर कुछ ऐसा रहा है की वायुसेना में 38 साल की सेवा में अपना योगदान दिया उसके बाद मई 2026 में पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख पद से रिटायर हुए पहलगाम हमले के बाद भारत पाकिस्तान सैन्य तनाव के समय वो पश्चिमी वायु कमाल संभाल रहे थे ट्रस्ट के मुताबिक CEO के लिए 3 नाम शार्टलिस्ट हुए थे | पहला रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेन्द्र मिश्र दुसरे रिटायर्ड मेजर जनरल संजय पी विश्वासराव और तीसरे श्रुति भारद्वाज 1 अगस्त को बनी चयन समिति ने इन तीनो नामो को ट्रस्ट के सामने रखा बुधवार की बैठक में सर्वसम्मति से जीतेंद्र मिश्र के नाम पर मुहर लगी | है। अब पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पद बनाया जाना ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। CEO की नियुक्ति का उद्देश्य मंदिर और ट्रस्ट से जुड़े प्रशासनिक कार्यों को अधिक पेशेवर तरीके से संचालित करना माना जा रहा है।
तीन नामों में से हुआ चयन
ट्रस्ट ने CEO पद के लिए नियुक्ति को लेकर एक चयन प्रक्रिया अपनाई। इसके लिए 1 अगस्त को एक चयन समिति का गठन किया गया था। समिति ने संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विचार करने के बाद तीन नामों को अंतिम रूप से ट्रस्ट के सामने रखा। इन तीन उम्मीदवारों में पहला नाम रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेन्द्र मिश्र का था। दूसरा नाम रिटायर्ड मेजर जनरल संजय पी. विश्वासराव का था, जबकि तीसरी उम्मीदवार श्रुति भारद्वाज थीं।इसका मतलब है कि ट्रस्ट के सदस्यों के बीच इस नियुक्ति को लेकर व्यापक सहमति रही।
चढ़ावे में चोरी के विवाद के बाद बदलाव
राम मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं और मंदिर में भारी मात्रा में दान तथा चढ़ावा आता है। इतनी बड़ी व्यवस्था में चढ़ावे की सुरक्षा और उसके हिसाब-किताब को लेकर पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। चढ़ावे में चोरी के विवाद के बाद ट्रस्ट की व्यवस्थाओं पर भी चर्चा तेज हुई थी। मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की सुरक्षा के साथ-साथ उसके संग्रह, भंडारण, गिनती और रिकॉर्ड को लेकर मजबूत व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की गई।हालांकि CEO की नियुक्ति को केवल चोरी के मामले से जोड़कर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। मंदिर का विस्तार, बढ़ती श्रद्धालु संख्या और बढ़ता प्रशासनिक दायरा भी इस तरह की व्यवस्था की जरूरत को मजबूत करते हैं।
बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच बड़ी चुनौती
राम मंदिर का निर्माण पूरा होने के बाद अयोध्या में धार्मिक पर्यटन और श्रद्धालुओं की आवाजाही में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। रोजाना बड़ी संख्या में लोग रामलला के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। विशेष पर्वों और त्योहारों के दौरान यह संख्या और बढ़ जाती है। इसके अलावा अयोध्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार भी एक महत्वपूर्ण विषय है। मंदिर से जुड़े विभिन्न निर्माण और विकास कार्यों के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में CEO की भूमिका केवल एक कार्यालयी पद तक सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि यह ट्रस्ट के रोजमर्रा के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
सैन्य अनुभव का मिलेगा फायदा?
जीतेन्द्र मिश्र ने अपने करियर का बड़ा हिस्सा भारतीय वायुसेना में बिताया है। सेना में उच्च पद पर रहने वाले अधिकारियों को बड़े संगठनों का संचालन, मानव संसाधन का प्रबंधन, अनुशासन, सुरक्षा, संकट की स्थिति में निर्णय लेने और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बनाने जैसी जिम्मेदारियों का अनुभव होता है। यही वजह है कि ट्रस्ट ने उनके अनुभव को महत्वपूर्ण माना होगा।राम मंदिर ट्रस्ट का काम सैन्य संगठन से पूरी तरह अलग है। यहां धार्मिक भावनाओं, श्रद्धालुओं की सुविधा, परंपराओं और आधुनिक प्रशासन के बीच संतुलन बनाना भी जरूरी है। इसलिए जीतेन्द्र मिश्र के सामने अपनी सैन्य नेतृत्व क्षमता को मंदिर प्रशासन की जरूरतों के अनुरूप ढालने की चुनौती भी होगी।
पारदर्शिता पर रहेगा जोर
राम मंदिर से जुड़ी किसी भी व्यवस्था में पारदर्शिता बेहद अहम विषय है। मंदिर में देशभर से श्रद्धालु दान देते हैं। CEO की नियुक्ति के बाद वित्तीय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को और अधिक व्यवस्थित किए जाने की उम्मीद की जा रही है। चढ़ावे की गिनती, रिकॉर्ड रखने, सुरक्षा, स्टोरेज और उससे जुड़े अन्य कार्यों में बेहतर निगरानी व्यवस्था स्थापित करना आने वाले समय में महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि इन व्यवस्थाओं में किस स्तर पर क्या बदलाव किए जाएंगे, इसका अंतिम स्वरूप ट्रस्ट की ओर से लिए जाने वाले फैसलों पर निर्भर करेगा। लेकिन CEO की नियुक्ति से यह संकेत जरूर मिलता है कि ट्रस्ट अब अपने प्रशासनिक ढांचे को अधिक पेशेवर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।