राहुल गांधी समेत 200 विपक्षी नेता हिरासत में, CEC के खिलाफ प्रदर्शन के बाद दिल्ली में हंगामा
राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्ष ने चुनाव आयोग यानी CEC के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया। चुनाव आयोग के मुख्यालय के बाहर हुए इस प्रदर्शन में कांग्रेस समेत 15 से ज्यादा विपक्षी दलों के सांसद और नेता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने EVM की पारदर्शिता, वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए। करीब 9 घंटे तक चले धरने के बाद दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी समेत सभी नेताओं को हिरासत में लिया और देर रात उन्हें रिहा कर दिया गया। इस प्रदर्शन के बाद देश की सियासत गरमा गई है।
प्रदर्शन की वजह
विपक्ष का ये प्रदर्शन अचानक नहीं हुआ। पिछले 6 महीने से विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है। राहुल गांधी ने 5 अक्टूबर 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था “चुनाव आयोग अब स्वतंत्र नहीं रहा। EVM में गड़बड़ी हो रही है और वोटर लिस्ट से नाम काटे जा रहे हैं।” विपक्ष की 3 मुख्य मांगें थीं। पहली EVM की VVPAT पर्ची का 100% मिलान हो। दूसरी वोटर लिस्ट से फर्जी नाम हटाए जाएं और पारदर्शी तरीके से नई लिस्ट बने। तीसरी मुख्य निर्वाचन आयुक्त CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें क्योंकि वो सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं।10 अक्टूबर को विपक्ष ने ऐलान किया कि वो चुनाव आयोग के दफ्तर Nirvachan Sadan जाकर CEC को ज्ञापन सौंपेंगे। कांग्रेस, TMC, RJD, SP, DMK, AAP समेत 15 दलों ने समर्थन दिया। राहुल गांधी को इस प्रदर्शन का नेतृत्व सौंपा गया। चुनाव आयोग ने कहा “ज्ञापन दे सकते हैं लेकिन प्रदर्शन की अनुमति नहीं है।” लेकिन विपक्ष ने कहा “हम शांतिपूर्ण तरीके से जाएंगे।”
9 घंटे का धरना
संसद से चुनाव आयोग तक पैदल मार्च और पुलिस की कार्रवाई 10 अक्टूबर की सुबह 11 बजे संसद भवन से विपक्षी नेताओं का जुलूस शुरू हुआ। सबसे आगे राहुल गांधी थे। उनके साथ मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, महबूबा मुफ्ती और अन्य नेता थे। हाथों में तिरंगा और “CEC इस्तीफा दो” के बैनर थे।
जैसे ही जुलूस संसद मार्ग पर पहुंचा, दिल्ली पुलिस ने बैरिकेड लगा दिए। पुलिस ने कहा “आगे जाने की अनुमति नहीं है।” राहुल गांधी ने कहा “हम लोकतंत्र की रक्षा के लिए आए हैं। हमें रोकिए मत।” बात नहीं बनी तो नेता वहीं सड़क पर बैठ गए और धरना शुरू कर दिया। “वोट चोर – गद्दी छोड़” के नारे लगे। कार्यकर्ता “लोकतंत्र बचाओ” के पोस्टर लेकर खड़े थे। धरना 5 घंटे तक चला। दोपहर में पुलिस ने पानी और शौचालय की व्यवस्था की। शाम 5 बजे पुलिस ने कहा “आपको हिरासत में लिया जा रहा है।” राहुल गांधी समेत 200 से ज्यादा नेताओं को बसों में भरकर किंग्सवे कैंप स्थित हिरासत केंद्र ले जाया गया। कुल 9 घंटे तक नेता हिरासत में रहे। रात 10 बजे उन्हें बिना किसी शर्त के रिहा कर दिया गया।
राहुल गांधी का बयान
रिहा होने के बाद राहुल गांधी ने मीडिया से बात की। उन्होंने कहा “हमें 9 घंटे तक गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया। हमारा अपराध क्या था? हमने सिर्फ चुनाव आयोग से सवाल पूछा।” राहुल ने कहा “आज देश में 2 भारत हैं। एक अमीरों का भारत और एक गरीबों का भारत। चुनाव आयोग गरीबों की आवाज दबा रहा है। हम ये लड़ाई तब तक लड़ेंगे जब तक EVM में पारदर्शिता नहीं आती।” उन्होंने ये भी कहा “CEC ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए। वो प्रधानमंत्री के इशारे पर काम कर रहे हैं।” प्रियंका गांधी ने कहा “बहनें, किसान, मजदूर सब परेशान हैं। लेकिन सरकार और चुनाव आयोग सुन नहीं रहे। इसलिए हमें सड़क पर आना पड़ा।” विपक्षी नेताओं ने ऐलान किया कि 20 अक्टूबर को देशभर में “लोकतंत्र बचाओ मार्च” निकाला जाएगा।
सरकार और चुनाव आयोग का जवाब
सरकार ने विपक्ष के प्रदर्शन को “राजनीतिक नौटंकी” बताया। गृह मंत्री ने कहा “चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है। उस पर सवाल उठाना लोकतंत्र पर सवाल उठाना है। राहुल गांधी हार के डर से ऐसा कर रहे हैं।” चुनाव आयोग के सूत्रों ने कहा “CEC किसी के दबाव में काम नहीं करते। EVM पूरी तरह सुरक्षित है। VVPAT का 5% मिलान पहले से होता है। अगर विपक्ष को शक है तो कोर्ट जाएं।” भाजपा प्रवक्ता ने कहा “2019 और 2024 में जब कांग्रेस जीती तब EVM सही थी। अब हार रहे हैं तो EVM खराब है। ये दोगलापन है।” कानून मंत्री ने कहा “धरना देना सबका अधिकार है। लेकिन संसद मार्ग बंद करना और कानून तोड़ना गलत है। पुलिस ने कानून के अनुसार कार्रवाई की।”
रक्षा, ट्रैफिक और आम जनता पर असर
प्रदर्शन के कारण सेंट्रल दिल्ली में पूरे दिन ट्रैफिक जाम रहा। संसद मार्ग, जनपथ, तिलक मार्ग और अशोका रोड पर बैरिकेडिंग थी। मेट्रो के पटेल चौक और केंद्रीय सचिवालय स्टेशन पर एंट्री बंद थी। स्कूलों की छुट्टी जल्दी करनी पड़ी। अस्पताल जाने वाले मरीजों को दिक्कत हुई। दुकानदारों ने कहा “2 दिन से कारोबार नहीं है। रोज प्रदर्शन होता है तो हम क्या करेंगे।” दिल्ली पुलिस ने 1000 से ज्यादा जवान तैनात किए थे। RAF और CRPF की टुकड़ियां भी थीं। ड्रोन से निगरानी की गई। सोशल मीडिया पर #RahulGandhi और #SaveDemocracy ट्रेंड करने लगा। 1 घंटे में 5 लाख ट्वीट हुए।
कानूनी पहलू
विपक्षी वकीलों का कहना है कि शांतिपूर्ण धरना संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मौलिक अधिकार है। “पुलिस ने बिना वारंट हिरासत में लिया। ये अवैध है।” एक वकील ने कहा। दिल्ली पुलिस का कहना है “धारा 144 लागू थी। फिर भी प्रदर्शन किया गया। इसलिए निवारक हिरासत में लिया गया। CrPC की धारा 151 के तहत ये कार्रवाई जायज है।” कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर 24 घंटे से ज्यादा हिरासत होती तो कोर्ट हस्तक्षेप करता। लेकिन 9 घंटे बाद रिहाई होने से मामला कमजोर है। विपक्ष ने अब सुप्रीम कोर्ट में PIL दायर करने की बात कही है। मांग है कि चुनाव आयोग को VVPAT का 100% मिलान करने का आदेश दिया जाए।
आगे का रोडमैप
इस प्रदर्शन के बाद विपक्ष ने 3 बड़े फैसले लिए हैं।
पहला 20 अक्टूबर को देशभर में जिला मुख्यालयों पर धरना।
दूसरा संसद के शीतकालीन सत्र में EVM का मुद्दा जोर-शोर से उठाना।
तीसरा चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ये मुद्दा 2027 के आम चुनाव तक गर्म रहेगा। राहुल गांधी इसे “लोकतंत्र बनाम तानाशाही” के रूप में पेश करना चाहते हैं। कांग्रेस के अंदर भी इसे लेकर उत्साह है। एक वरिष्ठ नेता ने कहा “2014 के बाद पहली बार राहुल सड़क पर इतने आक्रामक दिखे हैं। कार्यकर्ताओं में जोश है।” वहीं भाजपा इसे “हार की बौखलाहट” बता रही है। उनका कहना है “जनता मुद्दों पर वोट देती है, EVM पर नहीं।” आम जनता की राय बंटी हुई है। कुछ लोग कह रहे हैं “सवाल पूछना गलत नहीं।” कुछ कह रहे हैं “चुनाव हार गए तो रोना शुरू।” फिलहाल दिल्ली शांत है। लेकिन सियासी तापमान बढ़ा हुआ है। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग विपक्ष की मांगों पर क्या जवाब देता है और 20 अक्टूबर का प्रदर्शन कितना बड़ा होता है। राहुल गांधी ने जाते-जाते कहा “ये अंत नहीं है। ये शुरुआत है।”