वाटर प्लांट में क्लोरिन गैस होने से नागपुर में मची भगदड़। पुलिस ओर NDRF की टीम मौजूद।
नागपुर/महाराष्ट्र। सोमवार रात करीब 1 बजे महाराष्ट्र के नागपुर शहर के गोंधरी इलाके में हड़कंप मच गया। महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में रखे 900 किलोग्राम क्षमता वाले क्लोरीन गैस सिलेंडर से गैस का रिसाव शुरू हो गया। जैसे ही गैस फैली पूरे गोंधरी क्षेत्र में भगदड़ मच गई। आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत और खांसी की शिकायतें आने लगीं। सूचना मिलते ही नागपुर पुलिस, फायर ब्रिगेड और NDRF की टीम मौके पर पहुंची। आनन-फानन में प्लांट में फंसे कर्मचारियों और आसपास रहने वाले लोगों को बाहर निकाला गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार 8-10 प्लांट कर्मचारी और 20-25 स्थानीय निवासी प्रभावित हुए हैं। अभी तक 40 से 52 लोगों को स्पर्श हॉस्पिटल और मेयो हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है। प्रशासन ने राहत की सांस लेते हुए कहा कि अभी तक किसी की मौत नहीं हुई है, सभी की हालत स्थिर है।
सुरक्षा के लिहाज से पूरे प्लांट परिसर को 5 से 6 दिन के लिए सील करने का आदेश दिया गया है। साथ ही प्लांट से 200 मीटर के दायरे में सुबह 11 बजे तक लोगों के आने-जाने पर रोक लगा दी गई है।
रात 1 बजे कैसे हुआ हादसा
गोंधरी नगर पंचायत के फागो पाटिल लेआउट और नाग मंदिर टेकरी के पास महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण का जल उपचार संयंत्र है। यहीं से नागपुर के कई इलाकों को पीने का पानी सप्लाई होता है। पानी को साफ करने के लिए यहां बड़े-बड़े क्लोरीन गैस सिलेंडर रखे जाते हैं। रात करीब 1 बजे ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों ने देखा कि 900 किलो वाले एक क्लोरीन सिलेंडर के वाल्व से गैस लीक हो रही है। पहले तो हल्की गंध आई, फिर कुछ ही मिनटों में सफेद धुएं जैसा बादल पूरे प्लांट में फैल गया। क्लोरीन गैस हवा से भारी होती है इसलिए वो जमीन के पास फैलने लगी।
जैसे ही कर्मचारियों को घुटन और आंखों में जलन महसूस हुई वो चिल्लाते हुए बाहर भागे। प्लांट के अलार्म बजे। आसपास के घरों में भी लोग उठ गए। गंध इतनी तेज थी कि 200-300 मीटर दूर तक लोग परेशान हो गए। कई लोग नींद से उठकर घर से बाहर निकल आए। कुछ देर में पूरे गोंधरी इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
पुलिस और NDRF ने कैसे संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही सबसे पहले स्थानीय पुलिस स्टेशन की टीम पहुंची। नागपुर पुलिस के जवान विजय सर के नेतृत्व में टीम ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस का पहला काम था लोगों को सुरक्षित निकालना। प्लांट के अंदर जो 8-10 कर्मचारी फंसे थे उन्हें मास्क लगाकर बाहर निकाला गया। कुछ कर्मचारियों को सांस लेने में दिक्कत थी इसलिए उन्हें तुरंत एंबुलेंस से स्पर्श हॉस्पिटल और मेयो हॉस्पिटल भेजा गया।
दूसरा काम था एरिया को सील करना। पुलिस ने प्लांट के चारों तरफ 200 मीटर का दायरा बनाकर बैरिकेड लगा दिए। गोंधरी की गलियों में आवाजाही बंद कर दी गई। लाउडस्पीकर से ऐलान किया गया कि लोग घरों से न निकलें, खिड़की-दरवाजे बंद रखें और गीले कपड़े से नाक-मुंह ढक लें।
इसके बाद फायर ब्रिगेड और NDRF की टीम पहुंची। NDRF के जवान केमिकल सूट पहनकर प्लांट के अंदर गए। क्लोरीन गैस को न्यूट्रलाइज करने के लिए उन्होंने कास्टिक सोडा को पानी में मिलाकर एक टैंक तैयार किया और उसमें लीक हो रहे सिलेंडर को डुबो दिया। इससे गैस का रिसाव धीरे-धीरे कम हुआ। फायर ब्रिगेड ने पानी का छिड़काव करके हवा में फैली गैस को नीचे बैठाने की कोशिश की। सुबह 5 बजे तक स्थिति काफी हद तक कंट्रोल में आ गई थी। NDRF के एक अधिकारी ने कहा “अगर 15-20 मिनट की देरी होती तो हालात और खराब हो सकते थे। रात का समय था इसलिए बाहर लोग कम थे, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।”
कितने लोग प्रभावित हुए, अस्पताल में क्या हाल
प्रशासन के अनुसार गैस लीक से लगभग 30-35 लोग सीधे प्रभावित हुए। इनमें प्लांट के कर्मचारी और आसपास रहने वाले बुजुर्ग और बच्चे शामिल हैं। स्पर्श हॉस्पिटल में 22 और मेयो हॉस्पिटल में 18 से 20 मरीज भर्ती हैं। ज्यादातर को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, गले में खराश और चक्कर की शिकायत है। डॉक्टरों ने बताया कि सभी को ऑक्सीजन और जरूरी दवाएं दी गई हैं। 4-5 लोगों को ऑब्जर्वेशन में रखा गया है बाकी की हालत ठीक है।
हॉस्पिटल के बाहर मरीजों के परिजनों की भीड़ लगी रही। एक महिला ने बताया “रात को अचानक आंखों में जलन हुई और सांस घुटने लगी। समझ नहीं आया क्या हुआ। पड़ोसियों ने बताया कि प्लांट में गैस लीक हुई है।” स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि अगले 24 घंटे तक प्रभावित लोगों की निगरानी की जाएगी। क्लोरीन गैस फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है इसलिए किसी को भी हल्के में नहीं लिया जा रहा।
क्लोरीन गैस कितनी खतरनाक है, क्यों हुआ लीक
क्लोरीन गैस का इस्तेमाल पानी को कीटाणु रहित करने के लिए किया जाता है। लेकिन ये बहुत जहरीली गैस है। अगर ये सांस के साथ शरीर में जाए तो फेफड़े, आंख और त्वचा को नुकसान पहुंचाती है। ज्यादा मात्रा में सूंघने से मौत भी हो सकती है।
प्रारंभिक जांच में पता चला कि सिलेंडर का वाल्व पुराना था। शायद मेंटेनेंस में लापरवाही हुई। रात को तापमान बदलने से प्रेशर बढ़ा और वाल्व से गैस निकलने लगी। महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के एक अधिकारी ने कहा “सिलेंडर की रेगुलर चेकिंग होती है, लेकिन शायद इस बार कुछ मिस हो गया। जांच के बाद ही असली कारण पता चलेगा।” पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे प्लांट शहर के बीच में नहीं होने चाहिए। गोंधरी घनी आबादी वाला इलाका है। 900 किलो का सिलेंडर यहां रखना ही रिस्क है।
प्रशासन के आदेश और आगे की तैयारी
घटना के बाद जिला कलेक्टर ने तुरंत बैठक बुलाई। 3 बड़े फैसले लिए गए।
पहला: प्लांट परिसर को 5 से 6 दिन के लिए पूरी तरह सील रखा जाएगा। जब तक NDRF और फायर टीम ये सुनिश्चित न कर दे कि कोई लीक नहीं है, तब तक कोई अंदर नहीं जाएगा।
दूसरा: प्लांट से 200 मीटर के दायरे में सुबह 11 बजे तक कर्फ्यू जैसे हालात रहेंगे। स्कूल और दुकानें बंद रखने के आदेश दिए गए हैं।
तीसरा: प्रभावित परिवारों को मुआवजा और मुफ्त इलाज दिया जाएगा। हेल्थ कैंप लगाया जाएगा।
नागपुर नगर निगम ने भी कहा कि अगले 2 दिन तक गोंधरी इलाके में पानी की सप्लाई टैंकर से की जाएगी। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा “नागपुर की घटना पर नजर है। NDRF और स्थानीय प्रशासन मुस्तैदी से काम कर रहे हैं। घबराने की जरूरत नहीं है।”
स्थानीय लोगों का क्या कहना है
गोंधरी के रहने वाले रमेश पाटिल ने कहा “रात को 1 बजे अचानक गंध आई। लगा कि कोई केमिकल फैक्ट्री में आग लग गई। बच्चे खांसने लगे। पुलिस ने आकर बाहर निकाला। शुक्र है बड़ी दुर्घटना नहीं हुई।”
एक अन्य निवासी सुनीता ने कहा “ये प्लांट यहां 10 साल से है। पहले कभी ऐसी समस्या नहीं हुई। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे खतरनाक सिलेंडर शहर से बाहर शिफ्ट करे।” कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर अफवाह भी फैलाने की कोशिश की कि “गैस से कई मौतें हुई हैं।” लेकिन पुलिस और प्रशासन ने साफ किया कि ऐसी कोई जानकारी नहीं है।
पहले भी हुए हैं ऐसे हादसे, सबक क्या है
भारत में क्लोरीन गैस लीक की ये पहली घटना नहीं है। 2020 में विशाखापट्टनम में स्टाइरीन गैस लीक से 12 लोगों की मौत हुई थी। 2019 में गुजरात में भी क्लोरीन लीक हुआ था। एक्सपर्ट कहते हैं कि हर वाटर प्लांट में गैस डिटेक्टर, अलार्म और इमरजेंसी किट होना जरूरी है। कर्मचारियों को हर 3 महीने में ट्रेनिंग देनी चाहिए। सिलेंडर को खुले और हवादार जगह पर रखना चाहिए। NDRF के अधिकारी ने कहा “हम हर शहर में मॉक ड्रिल करते हैं। नागपुर में भी 6 महीने पहले ड्रिल हुई थी। उसी की वजह से आज रिस्पॉन्स इतना तेज था।”
नागपुर की ये घटना एक चेतावनी है। विकास के साथ सुरक्षा भी जरूरी है। क्लोरीन जैसे खतरनाक केमिकल को हैंडल करने में जरा सी लापरवाही बड़ी त्रासदी बन सकती है। फिलहाल राहत की बात ये है कि समय पर कार्रवाई से बड़ा नुकसान टल गया। पुलिस, NDRF और फायर ब्रिगेड की मुस्तैदी की वजह से जान-माल का नुकसान नहीं हुआ।
अब जांच रिपोर्ट आने के बाद तय होगा कि लापरवाही किसकी थी। और महाराष्ट्र सरकार को चाहिए कि पूरे राज्य के वाटर प्लांट का सेफ्टी ऑडिट कराए। गोंधरी के लोग अभी सहमे हुए हैं। लेकिन प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि 2 दिन में हालात सामान्य हो जाएंगे। तब तक सावधानी ही बचाव है।