सहारनपुर PNB में 17 करोड़ का घोटाला: असली नोट गायब,नकली रखे गए, 3 अफसर सस्पेंड, हाउसकीपर पर FIR
सहारनपुर। पंजाब नेशनल बैंक की एक शाखा में हुए फर्जीवाड़े ने बैंकिंग सिस्टम की नींद उड़ा दी है। PNB की सोफिया मार्केट शाखा के करेंसी चेस्ट में करीब 17 करोड़ रुपये के असली नोट गायब कर दिए गए हैं। मामले में बैंक ने 3 बड़े अफसरों को सस्पेंड कर दिया है और पार्ट टाइम हाउसकीपर के खिलाफ चोरी का केस भी दर्ज हुआ है। SIT और पुलिस दोनों जांच में जुटी हैं।
सहारनपुर में PNB की सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट ऐसी ही व्यवस्था का हिस्सा है। रिपोर्टों के मुताबिक जिले में PNB की करीब 72 शाखाएं हैं और दो करेंसी चेस्ट हैं – एक सोफिया मार्केट घंटाघर क्षेत्र में तथा दूसरा गंगोह में। मौजूदा मामला सोफिया मार्केट वाले करेंसी चेस्ट से जुड़ा है।
पूरा मामला क्या है?
घटना PNB की सहारनपुर स्थित सोफिया मार्केट शाखा के करेंसी चेस्ट की है। यहां देशभर में सप्लाई के लिए नोट रखे जाते हैं। करेंसी चेस्ट का काम RBI के नोटों को स्टोर करना, बैंकों को सप्लाई करना और पुराने नोट RBI को वापस भेजना होता है। कुछ दिन पहले पार्ट टाइम हाउसकीपर विशाल कुमार को नोटों की गड्डियां व्यवस्थित करने का काम दिया गया था। इसी दौरान गड़बड़ी की आशंका सामने आई।
5 अगस्त को बैंक ने करीब 11.50 करोड़ रुपये की नकदी RBI जयपुर भेजी। जब RBI में गिनती हुई तो 4 लाख 30 हजार 900 रुपये कम निकले। इसकी सूचना मिलते ही PNB के सर्कल हेड कुमार टिबरेवाल ने तुरंत जांच के आदेश दिए। बैंक को उम्मीद थी कि भेजी गई रकम का रिकॉर्ड और वास्तविक कैश एक-दूसरे से मेल खाएंगे। लेकिन जयपुर में रकम की गिनती और मिलान के दौरान अंतर सामने आया। करीब ₹4,30,900 की कमी बताई गई। कुछ रिपोर्टों में यह आंकड़ा ₹4.36 लाख बताया गया है, इसलिए आधिकारिक जांच पूरी होने तक सटीक आंकड़े को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर मौजूद है। RBI से सूचना आने के बाद बैंक ने इंटरनल ऑडिट शुरू कराया। ऑडिट टीम जब सोफिया मार्केट करेंसी चेस्ट पहुंची तो बड़ा खुलासा हुआ। रिकॉर्ड में जो रकम दिखाई जा रही थी वो फिजिकल कैश से लगभग 17 करोड़ रुपये कम थी। और सबसे चौंकाने वाली बात ये थी कि कई गड्डियों में असली नोट निकालकर नकली नोट या कटे-फटे नोट रख दिए गए थे। तुरंत बैंक मैनेजमेंट ने पुलिस और RBI को सूचना दी। 8 अगस्त को सोफिया मार्केट थाने में FIR दर्ज हुई। बैंक ने प्रोटोकॉल के तहत 3 सीनियर अफसरों को सस्पेंड किया। इनमें करेंसी चेस्ट इंचार्ज, एक सीनियर मैनेजर और एक कैश ऑफिसर शामिल हैं।
हाउसकीपर विशाल कुमार की भूमिका
पुलिस ने पार्ट टाइम हाउसकीपर विशाल कुमार को मुख्य आरोपी बनाया है। आरोप है कि उसे 1 अगस्त से 4 अगस्त के बीच नोटों की गड्डियां शिफ्ट करने और अलमारी व्यवस्थित करने का काम दिया गया था। FIR में कहा गया है कि विशाल ने सुनसान समय का फायदा उठाया। CCTV में देखा गया कि वो कई बार चेस्ट के अंदर अकेला गया। कुछ गड्डियों की सील टूटी मिलीं। जांच में पता चला कि असली 500 और 2000 के नोट निकालकर उनकी जगह नकली नोट या अखबार की कतरनें रखी गई थीं। पुलिस के मुताबिक विशाल पिछले 2 साल से पार्ट टाइम पर था। उसका बैकग्राउंड वेरिफिकेशन ढीला था। वो रात में भी कई बार चेस्ट में गया। बैंक का नियम है कि कैश हैंडलिंग के समय कम से कम 2 लोग मौजूद हों, लेकिन कई बार प्रोटोकॉल फॉलो नहीं हुआ। विशाल को 9 अगस्त को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने कुछ बातें कबूलीं। उसने बताया कि उसे एक गिरोह ने संपर्क किया था। बदले में उसे 20 लाख देने का वादा था। पुलिस अब ये पता लगा रही है कि नकली नोट कहां से आए और गायब असली नोट कहां खपाए गए।
3 अफसर सस्पेंड क्यों हुए
PNB ने 3 अफसरों को सस्पेंड किया है। पहला करेंसी चेस्ट इंचार्ज। दूसरा सीनियर मैनेजर जो ऑडिट का जिम्मा देखता था। तीसरा कैश ऑफिसर जो रोज की एंट्री करता था। बैंक का कहना है कि प्राथमिक जांच में इन तीनों की लापरवाही सामने आई। नियम के अनुसार हर महीने करेंसी चेस्ट का फिजिकल वेरिफिकेशन होना चाहिए। लेकिन पिछले 4 महीने से ये नहीं हुआ। CCTV फुटेज भी 15 दिन बाद डिलीट हो जाती थी, बैकअप नहीं था। डबल लॉक सिस्टम था लेकिन एक चाबी हमेशा एक ही व्यक्ति के पास रहती थी। सबसे बड़ी चूक RBI को भेजी जाने वाली गड्डियों की रैंडम चेकिंग न होना। अगर 5 अगस्त को जयपुर में कमी न निकलती तो शायद ये घोटाला और महीनों चलता। बैंक सूत्रों का कहना है कि सस्पेंड अफसरों से पूछताछ जारी है। उन पर “आपराधिक साजिश और विश्वासघात” की धाराएं लग सकती हैं। बैंक ने इंटरनल विजिलेंस टीम भी बिठाई है।
17 करोड़ का आंकड़ा कैसे आया
अब सवाल है 17 करोड़ कहां गए? ऑडिट में पाया गया कि करेंसी चेस्ट में 500, 200 और 100 के नोटों की 3400 गड्डियां कम थीं। हर गड्डी में 100 नोट होते हैं। हिसाब लगाने पर कमी करीब 16.8 करोड़ बैठती है। जांच टीम ने जब बची हुई गड्डियां खोलीं तो 20% गड्डियों में गड़बड़ी मिली। ऊपर-नीचे 2-2 असली नोट और बीच में नकली नोट। कुछ में तो सादे कागज। ये तरीका पुराना है। बाहर से देखने पर गड्डी असली लगती है। RBI को भेजी गई 11.50 करोड़ की खेप में भी यही हुआ। जयपुर में मशीन से गिनती के समय वजन और थिकनेस में अंतर आया। मैन्युअल चेक में 43 गड्डियां फर्जी निकलीं। पुलिस का मानना है कि ये काम एक दिन में नहीं हुआ। पिछले 6-8 महीने से धीरे-धीरे नोट बदले जा रहे थे। हर बार छोटी रकम ताकि तुरंत पकड़ में न आए।
SIT और पुलिस जांच की दिशा
सहारनपुर पुलिस ने SIT बनाई है। SIT के साथ बैंक की फ्रॉड डिटेक्शन टीम भी काम कर रही है। जांच 4 एंगल पर है। पहला पैसा कहां गया। विशाल के बैंक अकाउंट, उसके रिश्तेदारों और संदिग्ध लेनदेन खंगाले जा रहे हैं। अभी तक 12 लाख कैश बरामद हुआ है। दूसरा नकली नोट कहां से आए। नकली नोट की क्वालिटी अच्छी थी। इसलिए आशंका है कि किसी प्रिंटिंग प्रेस का हाथ है। तीसरा अंदर के लोग। क्या सिर्फ हाउसकीपर अकेला था या अफसर भी शामिल थे? कॉल डिटेल और CCTV खंगाले जा रहे हैं। चौथा RBI की भूमिका। 5 अगस्त वाली खेप पकड़ी गई। लेकिन उससे पहले कितनी खेप गईं? पिछले 6 महीने का रिकॉर्ड चेक हो रहा है। SP सिटी ने कहा “ये संगठित अपराध है। जल्द और गिरफ्तारियां होंगी।” बैंक ने सभी करेंसी चेस्ट में तुरंत 100% ऑडिट के आदेश दिए हैं।
करेंसी चेस्ट सिस्टम में खामियां
ये मामला सिर्फ PNB का नहीं है। पूरे बैंकिंग सिस्टम के लिए चेतावनी है। करेंसी चेस्ट RBI के कंट्रोल में होते हैं लेकिन दिन-प्रतिदिन का संचालन बैंक करता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक 3 बड़ी खामियां हैं। पहली मैनपावर की कमी। पार्ट टाइम लोगों से कैश हैंडलिंग। दूसरी टेक्नोलॉजी। अभी भी कई चेस्ट में मैनुअल रजिस्टर चलते हैं। RFID या बारकोड ट्रैकिंग नहीं। तीसरी ऑडिट। इंटरनल ऑडिट साल में 2 बार होता है। इतने बड़े कैश के लिए ये काफी नहीं। RBI ने इस घटना के बाद सभी बैंकों को निर्देश दिए हैं। हर हफ्ते रैंडम चेक, CCTV 90 दिन तक सेव, डबल कस्टडी अनिवार्य, और हर गड्डी की स्कैनिंग। PNB ने भी कहा है कि अब सोफिया मार्केट चेस्ट में बायोमेट्रिक एक्सेस, 24×7 मॉनिटरिंग और थर्ड पार्टी ऑडिट होगा।
ग्राहकों और बैंकिंग पर असर
आम ग्राहक के लिए घबराने की बात नहीं है। बैंक ने साफ किया है कि ग्राहकों का एक रुपया भी डूबा नहीं है। ये पैसा बैंक का अपना कैश रिजर्व था। लेकिन भरोसे पर असर पड़ा है। सोफिया मार्केट शाखा में 2 दिन तक लंबी लाइन लगी। कई लोगों ने FD तुड़वाई। बैंक मैनेजर को आकर सफाई देनी पड़ी। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामले से डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिलेगा। लोग कैश से डरेंगे। सरकार भी कैशलेस की तरफ धकेल रही है। PNB के शेयर में भी 2% की गिरावट आई। लेकिन बैंक ने कहा “हम रिकवरी करेंगे। बीमा और सिक्योरिटी से नुकसान कवर होगा।” फिलहाल जांच जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि 15 दिन में पूरा नेटवर्क पकड़ में आ जाएगा। 17 करोड़ की वसूली और असली दोषियों की गिरफ्तारी ही अब सबसे बड़ा सवाल है। बैंकिंग इतिहास में ये पहला मामला नहीं है। लेकिन जिस तरह असली नोट निकालकर नकली रखे गए, वो तरीका नया है। इसलिए RBI और सभी बैंक अब अलर्ट हैं। सहारनपुर की इस घटना के बाद पूरे देश के करेंसी चेस्ट में हलचल है।