शिव परिवार, राम दरबार और भारत माता की झांकियों ने खींचा ध्यान, मुरैना में निकली दक्ष प्रजापति जयंती यात्रा, मुरैना में दक्ष प्रजापति की 16वीं जयंती पर भव्य शोभायात्रा
मुरैना नगर। मुरैना शहर रविवार को भक्ति और आस्था के रंग में सराबोर हो गया। महाराज दक्ष प्रजापति की 16वीं जयंती के अवसर पर शहर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। कृषि उपज मंडी से शुरू होकर ये यात्रा पूरे शहर में भ्रमण करती हुई गोवर्धन गार्डन में संपन्न हुई। ढोल-नगाड़ों की गूंज, फूलों की बारिश और “जय दक्ष भगवान” के नारों से पूरा मुरैना गूंज उठा। सुबह 10 बजे से ही कृषि उपज मंडी में समाजबंधुओं का आना शुरू हो गया था। जिले के हर गांव, हर कस्बे से प्रजापति समाज के लोग अपने परिवार के साथ पहुंचे। महिलाओं ने रंग-बिरंगी साड़ियां पहनी थीं, पुरुषों के सिर पर साफा और हाथ में ध्वजाएं थीं। बच्चों के चेहरे पर उत्साह था। माहौल पूरी तरह धार्मिक हो चुका था। ठीक 11 बजे विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद शोभायात्रा की शुरुआत हुई। सबसे आगे बैंड और ढोल-नगाड़े चल रहे थे। उनके पीछे घोड़ों पर सवार युवा और हाथों में त्रिशूल लिए समाज के लोग चल रहे थे। यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता थी इसमें निकाली गईं धार्मिक झांकियां।
पहली झांकी शिव परिवार की थी। इसमें भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश और कार्तिकेय की मनोहारी झांकी सजाई गई थी। झांकी को फूलों से सजाया गया था और उसमें लाइटिंग की गई थी। लोग इसे देखकर हाथ जोड़कर नमन कर रहे थे।इसके बाद महाराज दक्ष प्रजापति की झांकी आई। सफेद वस्त्रों में सजे महाराज दक्ष की प्रतिमा को रथ पर रखा गया था। रथ के चारों तरफ समाज के बुजुर्ग चल रहे थे और मंत्रोच्चार कर रहे थे। लोगों ने रथ पर फूल और अक्षत चढ़ाए। तीसरी झांकी राम दरबार की थी। इसमें भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की झांकी थी। हनुमान जी का रोल निभा रहे एक बालक ने सबका ध्यान खींचा। वो बार-बार “जय श्री राम” का नारा लगा रहा था। भारत माता की झांकी भी आकर्षण का केंद्र रही। तिरंगे के रंग में सजी भारत माता की प्रतिमा के चारों तरफ बच्चे देशभक्ति गीत गाते चल रहे थे। माता सती की झांकी में सती के त्याग और बलिदान को दर्शाया गया था। हर झांकी के साथ लोग “जय हो” के नारे लगा रहे थे। यात्रा कृषि उपज मंडी से शुरू होकर बस स्टैंड, घंटाघर, कोर्ट रोड, स्टेशन रोड होते हुए पूरे शहर से गुजरी। मार्ग में जगह-जगह समाज के लोगों ने तोरण द्वार बनाए थे। घरों की छतों से महिलाओं ने पुष्पवर्षा की। दुकानदारों ने शीतल जल और शरबत की व्यवस्था की थी। जगह-जगह डीजे पर भजन बज रहे थे और युवा उन पर नाच रहे थे।
शोभायात्रा में न सिर्फ प्रजापति समाज बल्कि अन्य समाज के लोग भी शामिल हुए। हिन्दू धर्म के प्रति आस्था रखने वाले हर वर्ग के लोग झांकियों का दर्शन करने सड़क किनारे खड़े थे। कई जगह आरती की गई। प्रसाद वितरित किया गया। जिला प्रजापति समाज के अध्यक्ष ने कहा कि महाराज दक्ष प्रजापति सृष्टि के रचयिता माने जाते हैं। उनकी जयंती पर हर साल शोभायात्रा निकालकर हम समाज में एकता और धार्मिक चेतना का संदेश देते हैं। इस बार यात्रा में 16वीं जयंती होने के कारण विशेष तैयारी की गई थी।शोभायात्रा दोपहर करीब 2 बजे गोवर्धन गार्डन पहुंचकर संपन्न हुई। यहां एक विशाल सभा का आयोजन किया गया। मंच पर दक्ष प्रजापति की विशाल प्रतिमा स्थापित की गई थी। सभा को संबोधित करते हुए समाज के वरिष्ठ नेताओं ने कहा “महाराज दक्ष प्रजापति सृष्टि के रचयिता और प्रजापति समाज के आराध्य हैं। हमें उनके आदर्शों पर चलकर समाज में शिक्षा, एकता और संस्कार को बढ़ाना है।” वक्ताओं ने समाज के युवाओं से नशे से दूर रहने और शिक्षा पर ध्यान देने की अपील की। साथ ही बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश भी दिया। कार्यक्रम में जिले भर से आए संतों ने आशीर्वाद दिया। अंत में महाआरती और भंडारे के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। यातायात पुलिस ने रूट डायवर्ट किया था। महिला पुलिसकर्मी भी तैनात थीं। कहीं कोई अव्यवस्था न हो इसके लिए स्वयंसेवक भी जगह-जगह खड़े थे। करीब 4 घंटे तक चली ये शोभायात्रा दोपहर 3 बजे गोवर्धन गार्डन पहुंचकर संपन्न हुई। यहां महाआरती की गई। संतों ने प्रवचन दिए और समाज की एकता पर जोर दिया। प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। गोवर्धन गार्डन में विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया। हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। बच्चों के लिए झूले और मनोरंजन के स्टॉल भी लगाए गए थे। शोभायात्रा के दौरान पूरा शहर भक्तिमय हो गया था। हर गली में जयकारे गूंज रहे थे। बुजुर्ग कह रहे थे कि पिछले 16 सालों में ऐसी भव्य यात्रा पहले कभी नहीं हुई।
प्रजापति समाज के जिलाध्यक्ष ने कहा “ये सिर्फ जयंती नहीं है, ये हमारी एकता का प्रतीक है। 16 साल से हम हर साल इसे बड़े उत्साह से मनाते हैं। इस बार यात्रा और भी भव्य रही।” एक महिला ने कहा “हम हर साल इंतजार करते हैं इस दिन का। बच्चे, बूढ़े सब मिलकर आते हैं। झांकियां देखकर मन प्रसन्न हो जाता है।” युवाओं ने भी कहा कि ऐसी यात्राओं से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और इतिहास से जुड़ने का मौका मिलता है।
सोशल मीडिया पर भी यात्रा के वीडियो और फोटो वायरल हो रहे हैं। लोग कमेंट कर रहे हैं कि मुरैना की संस्कृति और एकता देखने लायक है। प्रशासन ने भी शोभायात्रा की सराहना की। कलेक्टर और एसपी ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से आयोजन संपन्न हुआ। ये मुरैना की गंगा-जमुनी तहजीब का उदाहरण है। देर शाम तक गोवर्धन गार्डन में भजन-कीर्तन का कार्यक्रम चलता रहा। महिलाएं पारंपरिक गीत गा रही थीं। बच्चे झूले झूल रहे थे। महाराज दक्ष प्रजापति की जयंती पर निकली इस शोभायात्रा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मुरैना में धर्म और समाज की जड़ें कितनी गहरी हैं। लोगों ने संकल्प लिया कि अगले साल 17वीं जयंती और भी बड़े स्तर पर मनाई जाएगी। जय दक्ष भगवान के नारों के साथ शहर देर रात तक भक्तिमय रहा।
मुरैना पुलिस ने यात्रा के लिए विशेष इंतजाम किए थे। पूरे रूट पर बैरिकेडिंग और CCTV कैमरे लगाए गए थे। ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया था। स्वास्थ्य विभाग की टीम और एंबुलेंस भी तैनात थी। कलेक्टर और एसपी ने भी गोवर्धन गार्डन पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने कहा “शांतिपूर्ण और भव्य तरीके से यात्रा संपन्न हुई। प्रशासन समाज के साथ है।” दक्ष प्रजापति जयंती की ये शोभायात्रा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं थी। ये मुरैना की सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था का संगम थी। शिव परिवार, राम दरबार और भारत माता की झांकियों ने न सिर्फ प्रजापति समाज बल्कि पूरे मुरैना शहर को भावविभोर कर दिया। ढोल की थाप और जयकारों के बीच निकली ये यात्रा ये संदेश दे गई कि आस्था और एकता से कोई भी समाज आगे बढ़ सकता है। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी का आभार व्यक्त किया और कहा कि अगले साल 17वीं जयंती और भी बड़े स्तर पर मनाई जाएगी।