यूपी की 80 सीटों पर अटका पेच: अखिलेश ने बैठक छोड़, कांग्रेस को 20 सीट देने से किया इनकार
नई दिल्ली/चेन्नई। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद बना इंडिया ब्लॉक आज फिर चर्चा में है। वजह है समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव का गठबंधन की अहम बैठक से दूर रहना। दिल्ली में हुई इंडिया ब्लॉक की बैठक में 26 में से 22 दलों के नेता पहुंचे, लेकिन अखिलेश नहीं आए। उनके न आने के बाद से अटकलें तेज हैं कि क्या सब कुछ ठीक है या अंदर कुछ खिचड़ी पक रही है। इस बीच DMK के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “इंडिया ब्लॉक में सब ठीक है, बस कुछ मतभेद हैं जिन्हें बैठकर सुलझा लिया जाएगा।” लेकिन सवाल ये है कि अगर सब ठीक है तो अखिलेश बैठक से क्यों दूर रहे? सीट शेयरिंग, नेतृत्व और रणनीति को लेकर क्या चल रहा है इंडिया के अंदर?
अखिलेश यादव ने बैठक से दूरी क्यों बनाई
दिल्ली में हुई इंडिया ब्लॉक की बैठक का एजेंडा था 2026 के विधानसभा चुनावों और 2029 की लोकसभा की रणनीति। साथ ही सीट शेयरिंग के फॉर्मूले पर चर्चा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, ममता बनर्जी, शरद पवार, उद्धव ठाकरे सब मौजूद थे। लेकिन अखिलेश यादव नहीं आए। सपा की तरफ से रामगोपाल यादव गए थे। अखिलेश ने कारण बताया “पार्टी के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम।” लेकिन सूत्रों का कहना है कि असली वजह यूपी में सीट शेयरिंग को लेकर नाराजगी है। 2024 में इंडिया ब्लॉक में सपा ने 37 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को सिर्फ 6 सीटें मिली थीं। अब कांग्रेस चाहती है कि 2029 में उसे यूपी में 20-25 सीटें दी जाएं। अखिलेश इसके लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि “जिसकी जमीन, उसकी सीटें।”
एक और कारण बताया जा रहा है नेतृत्व का। बैठक में राहुल गांधी को गठबंधन का चेहरा बनाने पर जोर था। अखिलेश चाहते हैं कि क्षेत्रीय दलों को भी बराबर तवज्जो मिले। “दिल्ली से सब तय नहीं होगा” ये उनका साफ संदेश था। सपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा “अखिलेश जी बैठक में नहीं गए, इसका मतलब ये नहीं कि वो इंडिया से बाहर हैं। वो सिर्फ ये बताना चाहते हैं कि उनकी भी कीमत है।”
DMK ने क्या बताई अंदर की कहानी
DMK के वरिष्ठ नेता और तमिलनाडु के मंत्री दुरईमुरुगन ने चेन्नई में पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा “इंडिया ब्लॉक में कोई दरार नहीं है। हर गठबंधन में थोड़ी नोक-झोंक होती है।” उन्होंने अंदर की कहानी बताई। “देखिए, 26 दलों को एक साथ लाना आसान नहीं। सबकी अपनी महत्वाकांक्षा, अपनी जमीन है। अखिलेश जी यूपी के बड़े नेता हैं। उनका नाराज होना स्वाभाविक है। लेकिन वो इंडिया के साथ हैं। स्टालिन जी ने उनसे बात भी की है।” DMK नेता ने कहा कि असली मुद्दा सीट शेयरिंग का है। “बिहार में नीतीश कुमार, बंगाल में ममता, यूपी में अखिलेश। हर राज्य में एक बड़ा क्षेत्रीय दल है। कांग्रेस चाहती है कि उसे ज्यादा सीटें मिलें क्योंकि वो नेशनल पार्टी है। क्षेत्रीय दल कहते हैं कि उनकी जमीन पर कांग्रेस कमजोर है। ये टकराव हर गठबंधन में होता है।”
उन्होंने आगे कहा “स्टालिन जी का मानना है कि 2024 में हमने जो गलतियां कीं वो 2029 में नहीं दोहराएंगे। उस समय सीटों का ऐलान देर से हुआ। राज्यों में तालमेल नहीं था। इस बार 2 साल पहले से बैठकर तय करेंगे।” DMK ने ये भी कहा कि अखिलेश से नाराज नहीं हैं। “वो बैठक में नहीं आए तो क्या, फोन पर सबने बात की। ममता दीदी और शरद पवार जी भी उनसे बात करेंगे।
इंडिया ब्लॉक के अंदर 3 बड़े मुद्दे क्या हैं
DMK नेता की बात और सूत्रों से जो जानकारी मिली उसके अनुसार इंडिया के अंदर अभी 3 बड़े मुद्दे हैं।
पहला मुद्दा: नेतृत्व और चेहरा
2024 में इंडिया का चेहरा सामूहिक था। लेकिन अब सवाल है कि 2029 में प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार कौन होगा। कांग्रेस चाहती है राहुल गांधी। ममता बनर्जी कहती हैं “समय आने पर तय करेंगे।” केजरीवाल, अखिलेश और नीतीश भी इस रेस में हैं।
अखिलेश की नाराजगी का एक कारण ये भी है कि हर बैठक में राहुल को आगे रखा जाता है। उनका कहना है “गठबंधन है तो सब बराबर।”
दूसरा मुद्दा: सीट शेयरिंग का फॉर्मूला
यूपी, बिहार, बंगाल, महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों में सीटों को लेकर खींचतान है। कांग्रेस का तर्क है कि 2019 और 2024 में उसने बीजेपी को हराने के लिए क्षेत्रीय दलों को ज्यादा सीटें दीं। अब उसकी बारी है। लेकिन सपा, TMC, RJD का कहना है कि उनकी पार्टी जमीनी है। कांग्रेस शहरी और सोशल मीडिया तक सीमित है। “आपको 5 सीट दे देंगे तो हम 20 हार जाएंगे” ये अखिलेश का तर्क है।
तीसरा मुद्दा: विचारधारा और रणनीति
इंडिया में लेफ्ट, सेंटर और राइट ऑफ सेंटर सब हैं। मुद्दों पर एक राय नहीं बन पाती। कोई कहता है जाति जनगणना, कोई कहता है महंगाई, कोई कहता है संविधान बचाओ। DMK नेता ने कहा “हमारा कॉमन मिनिमम प्रोग्राम बनना बाकी है। वरना बीजेपी कहेगी कि इनका कोई एजेंडा ही नहीं।”
कांग्रेस का स्टैंड क्या है
कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि “इंडिया एकजुट है।” खड़गे ने कहा “अखिलेश जी हमारे साथ हैं। वो व्यस्त थे इसलिए नहीं आ सके।” लेकिन पर्दे के पीछे कांग्रेस भी दबाव बना रही है। राहुल गांधी ने हाल में कहा था “हमें कमजोर सीटें नहीं चाहिए। जहां हम मजबूत हैं वहां हमें लड़ना है।” कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि 2024 में सपा को 37 सीटें देकर गलती की। अब उसे 25 से ज्यादा नहीं देनी चाहिए।
बीजेपी क्या कर रही है, कैसे कर रही वार, क्षेत्रीय दलों का क्या कहना है
बीजेपी इस मौके को भुना रही है। अमित शाह ने कहा “इंडिया ब्लॉक ठगबंधन है। चुनाव से पहले ही टूट जाएगा।” भाजपा आईटी सेल ने #IndiaTutGaya ट्रेंड कराया। सोशल मीडिया पर मीम चल रहे हैं कि “अखिलेश ने दरवाजा बंद कर दिया।” बीजेपी की रणनीति साफ है। इंडिया में फूट डालो। यूपी में सपा और कांग्रेस को अलग-अलग लड़ा दो। बंगाल में TMC और कांग्रेस में दूरी बढ़ाओ।
TMC की ममता बनर्जी ने कहा “हम एक हैं। थोड़ी नाराजगी लोकतंत्र की खूबसूरती है।” शरद पवार ने कहा “मैं सबसे बात करूंगा। गठबंधन नहीं टूटेगा।” उद्धव ठाकरे ने कहा “बीजेपी को हराने के लिए हमें साथ रहना होगा।” लेकिन अंदर से सब जानते हैं कि सीटों का बंटवारा सबसे कठिन काम है।
2024 के नतीजों ने क्या सिखाया
2024 में इंडिया को 234 सीटें मिलीं। बीजेपी को 240। 32 सीटों का फर्क। अगर सीट शेयरिंग बेहतर होती तो शायद नतीजा अलग होता।
यूपी में सपा-कांग्रेस का गठबंधन हिट रहा। लेकिन पंजाब में कांग्रेस और आप अलग लड़े। बंगाल में TMC और कांग्रेस आमने-सामने। दिल्ली में आप और कांग्रेस की लड़ाई। इसीलिए DMK और बाकी दल चाहते हैं कि 2029 की तैयारी अभी से शुरू हो।
आगे क्या होगा, क्या टूटेगा गठबंधन
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इंडिया ब्लॉक तुरंत नहीं टूटेगा। क्योंकि सबको पता है कि अकेले बीजेपी को हराना मुश्किल है। लेकिन 2026 के अंत तक अगर सीटों पर सहमति नहीं बनी तो दिक्कत होगी। खासकर यूपी, बिहार और महाराष्ट्र में।
DMK नेता ने भरोसा दिलाया “स्टालिन जी, खड़गे जी और शरद पवार जी मिलकर इसे सुलझा लेंगे। अखिलेश जी भी मान जाएंगे।”
इंडिया ब्लॉक में सब ठीक है या नहीं, इसका जवाब हां और ना दोनों में है। हां, क्योंकि बीजेपी को हराने का संकल्प सबका एक है। ना, क्योंकि सत्ता की महत्वाकांक्षा और सीटों की लड़ाई अभी बाकी है। अखिलेश का बैठक से दूर रहना एक संकेत है। वो कह रहे हैं “हमें हल्के में मत लो।” DMK और बाकी दल इस संकेत को समझ रहे हैं।आने वाले 6 महीने तय करेंगे कि इंडिया 2029 में बीजेपी को चुनौती दे पाएगा या 2024 जैसा मौका फिर हाथ से निकल जाएगा। फिलहाल गठबंधन जिंदा है। लेकिन अंदर दरारें हैं जिन्हें सीमेंट करना बाकी है।