NSE IPO आज आखिरी दिन, देश का दूसरा सबसे बड़ा इश्यू, GMP बुरी तरह ₹255 से गिरकर ₹48 पर आया, क्या लगाना चाहिए पैसा?
नई दिल्ली। देश के शेयर बाजार का सबसे बड़ा नाम नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE का आईपीओ आज बंद हो रहा है। निवेशकों के पास इसमें पैसा लगाने का ये आखिरी मौका है। 22,569 करोड़ रुपये का ये इश्यू देश के इतिहास का अब तक का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ है। पहले नंबर पर अभी भी LIC का 21,000 करोड़ वाला इश्यू है लेकिन NSE ने उसे भी पीछे छोड़ दिया है। शुक्रवार यानी दूसरे दिन तक ये इश्यू 1.16 गुना सब्सक्राइब हो चुका था। यानी कुल मिलाकर बोली तो आ गई लेकिन जिस तरह की उम्मीद थी उस तरह का क्रेज नहीं दिखा। इस आईपीओ का प्राइस बैंड 1,700 से 1,785 रुपये प्रति शेयर रखा गया है। एक लॉट में 8 शेयर हैं। यानी अगर आप रिटेल कैटेगरी से अप्लाई करते हैं तो आपको कम से कम 14,280 रुपये लगाने होंगे। अलॉटमेंट 22 सितंबर 2026 को फाइनल होगा और शेयर 24 सितंबर को BSE पर लिस्ट होने की उम्मीद है।
दूसरे दिन तक का आंकड़ा देखें तो रिटेल निवेशकों ने इसमें बहुत ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। रिटेल के लिए 4.41 करोड़ शेयर रिजर्व थे और वो सिर्फ 72 प्रतिशत भरा। यानी रिटेल कैटेगरी अभी पूरी नहीं भरी है। वहीं नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स यानी HNI ने 1.68 गुना बोली लगाई। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी म्यूचुअल फंड, FII, बीमा कंपनियों ने 1.53 गुना सब्सक्राइब किया। इससे साफ है कि बड़े संस्थागत निवेशक तो आए लेकिन आम आदमी अभी रुका हुआ है। लेकिन सबसे बड़ी बात जो इस आईपीओ को लेकर चर्चा में है वो है इसका ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी GMP। इश्यू आने से एक हफ्ते पहले जब इसकी चर्चा शुरू हुई थी तब GMP 255 रुपये चल रहा था। मतलब लोग मान रहे थे कि लिस्टिंग पर शेयर 1,785 के बजाय 2,040 रुपये पर खुलेगा। शुक्रवार तक ये गिरकर 148 रुपये रह गया और आज सुबह ये सिर्फ 48 रुपये पर आ गया है। यानी अब ग्रे मार्केट मान रहा है कि लिस्टिंग सिर्फ 1,833 रुपये पर होगी जो ऊपरी प्राइस बैंड से सिर्फ 3 प्रतिशत ज्यादा है।GMP का इतना गिरना अपने आप में बहुत कुछ कहता है। इसका मतलब है कि मार्केट को इस इश्यू से बहुत बड़ी लिस्टिंग गेन की उम्मीद नहीं है। पहले लोग सोच रहे थे कि NSE का नाम है तो लिस्टिंग पर 20-25 प्रतिशत का उछाल आएगा। लेकिन अब वो उम्मीद 3-5 प्रतिशत पर सिमट गई है।
अब सवाल ये है कि ऐसे में क्या आपको इस आईपीओ में पैसा लगाना चाहिए या नहीं। ब्रोकरेज हाउस की राय मिली-जुली है लेकिन ज्यादातर पॉजिटिव हैं। LKP सिक्योरिटीज ने इसे सब्सक्राइब करने की रेटिंग दी है। उनका कहना है कि NSE भारत का सबसे बड़ा और सबसे भरोसेमंद एक्सचेंज है। डेरिवेटिव, कैश मार्केट, कमोडिटी, करेंसी हर चीज में NSE का दबदबा है। कंपनी का बिजनेस मॉडल बहुत मजबूत है। हर ट्रेड पर NSE को फीस मिलती है। मार्केट जितना बढ़ेगा NSE की कमाई उतनी बढ़ेगी। इसलिए लॉन्ग टर्म के लिए ये अच्छा बेट है। YES सिक्योरिटीज ने भी सब्सक्राइब करने की सलाह दी है लेकिन साथ में चेतावनी भी दी है। उन्होंने कहा कि 1,785 रुपये के ऊपरी प्राइस बैंड पर NSE का वैल्यूएशन FY26 की अनुमानित कमाई का 42.9 गुना बैठता है। ये काफी महंगा है। दुनिया के दूसरे बड़े एक्सचेंज जैसे NYSE, NASDAQ, HKEX का वैल्यूएशन 25 से 35 गुना के बीच है। ऐसे में NSE महंगा लग रहा है। दूसरा बड़ा रिस्क रेगुलेटरी का है। NSE पर SEBI की कई जांच चल रही हैं। को-लोकेशन स्कैम, डार्क फाइबर केस, ये सब अभी कोर्ट में हैं। अगर इनमें कोई बड़ा जुर्माना लगा तो कंपनी की कमाई पर असर पड़ेगा।
वैल्यूएशन को लेकर एक्सपर्ट्स बंटे हुए हैं। कुछ का कहना है कि NSE सिर्फ एक एक्सचेंज नहीं है। ये भारत की ग्रोथ स्टोरी का गेटवे है। भारत में डीमैट अकाउंट 16 करोड़ के पार पहुंच गए हैं। रिटेल निवेशक तेजी से बढ़ रहे हैं। ऑप्शन ट्रेडिंग दुनिया में सबसे ज्यादा भारत में होती है और वो भी NSE पर। ऐसे में आने वाले 10 साल में NSE की कमाई कई गुना बढ़ सकती है। अगर आप 5-10 साल के लिए पैसा भूल सकते हैं तो ये आईपीओ लेना चाहिए। दूसरी तरफ कुछ एक्सपर्ट कह रहे हैं कि 42.9 का PE बहुत ज्यादा है। NSE की ग्रोथ तो है लेकिन वो पहले जैसी 40-50 प्रतिशत वाली नहीं रहेगी। अब मार्केट मैच्योर हो रहा है। BSE से कंपटीशन बढ़ रहा है। सरकार ने ट्रांजेक्शन फीस कम करने के संकेत भी दिए हैं। ऐसे में मार्जिन पर दबाव आ सकता है। और सबसे बड़ी बात लिस्टिंग गेन। जब GMP 48 रुपये ही है तो लिस्टिंग पर आपको 500-1000 रुपये का फायदा भी मुश्किल से मिलेगा। उसके लिए 14,280 रुपये 10 दिन तक ब्लॉक करना समझदारी नहीं है।
रिटेल निवेशक क्या करें। अगर आपका मकसद सिर्फ लिस्टिंग गेन है तो शायद ये आईपीओ आपके लिए नहीं है। 3 प्रतिशत का प्रीमियम मिलने के लिए रिस्क लेना ठीक नहीं। लेकिन अगर आप NSE की ग्रोथ स्टोरी पर भरोसा करते हैं और 3-5 साल तक होल्ड कर सकते हैं तो अप्लाई कर सकते हैं। कंपनी का बैलेंस शीट मजबूत है। कर्ज लगभग ना के बराबर है। हर साल 10,000 करोड़ से ज्यादा का मुनाफा है। डिविडेंड भी अच्छा देती है। एक और बात जो ध्यान रखनी है वो है अलॉटमेंट। चूंकि रिटेल कैटेगरी अभी 72 प्रतिशत ही भरी है इसलिए अलॉटमेंट के चांस ज्यादा हैं। बड़े आईपीओ में अक्सर रिटेल को शेयर नहीं मिलता लेकिन यहां मिल सकता है। 24 सितंबर को लिस्टिंग होगी। उस दिन देखना होगा कि बाजार का मूड क्या है। अगर ग्लोबल मार्केट स्थिर रहा और घरेलू सेंटीमेंट पॉजिटिव रहा तो शायद 5-7 प्रतिशत की लिस्टिंग गेन मिल जाए। लेकिन अगर बाजार गिरा तो लिस्टिंग फ्लैट भी हो सकती है।
GMP का 255 से 48 पर आना यही दिखाता है। ब्रोकरेज पॉजिटिव हैं लेकिन वैल्यूएशन और रेगुलेटरी रिस्क की चेतावनी भी दे रहे हैं। फैसला आपका है। अगर लॉन्ग टर्म निवेशक हैं और भारत की ग्रोथ पर भरोसा है तो NSE को पोर्टफोलियो में रख सकते हैं। अगर शॉर्ट टर्म गेन चाहिए तो शायद इंतजार करना बेहतर होगा कि लिस्टिंग के बाद क्या होता है।