“कितनी भी सत्ता मिल जाए, हम सेवा के रास्ते से नहीं भटकेंगे”, PM मोदी का सेवा यात्रियों को बड़ा संदेश, कहा सेवा ही हमारा धर्म है
पीएम मोदी ने यात्रियों से की सीधी बात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार 24 सितंबर 2026 को ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत एक खास पहल की। गुजरात के वडनगर से शुरू होकर वाराणसी तक जाने वाले सेवा यात्रियों के दल से पीएम ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए लंबी बातचीत की। इस दल में गुजरात के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के सैकड़ों युवा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे जो पूरे रास्ते स्कूलों, अस्पतालों, मंदिरों और गांवों में जाकर सेवा कार्य कर रहे हैं। पीएम ने सबसे पहले सभी यात्रियों का अभिवादन किया और कहा कि मैं आज आप सबको प्रणाम करके आपके पुण्य का आधा हिस्सा चुरा रहा हूं। उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्रों में लिखा है कि जब कोई तीर्थ या सेवा यात्रा से लौटता है तो उसे प्रणाम करने वाले को भी आधा पुण्य मिल जाता है। इसलिए मैं भी आज आप सभी को नमन करता हूं। पीएम की ये बात सुनकर सभी सेवा यात्रियों की आंखें भर आईं। माहौल भावुक हो गया। पीएम ने कहा कि ये यात्रा सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह जाना नहीं है, ये भारत की आत्मा से जुड़ने की यात्रा है।
सेवा ही धर्म, सेवा ही राजनीति – पीएम का मूल मंत्र
पीएम मोदी ने सेवा यात्रियों को सबसे बड़ा संदेश दिया कि हमारी राजनीति का आधार सेवा होना चाहिए। उन्होंने कहा देखिए, हम कितने भी बड़े पद पर पहुंच जाएं, कितनी भी सत्ता मिल जाए, हमारा रास्ता एक ही रहेगा और वो है सेवा का रास्ता। हम सेवा परमो धर्म के सिद्धांत पर चलेंगे। पीएम ने कहा कि आजकल लोग भाषण देकर, उपदेश देकर सेवा की बात करते हैं। लेकिन असली सेवा वो है जो चुपचाप की जाए। हमारा काम बोलना चाहिए। जब लोग हमें देखें तो उन्हें लगे कि ये लोग सत्ता के लिए नहीं, सेवा के लिए आए हैं। पीएम ने कहा कि चाहे हम दिल्ली में हों या गांव में, मंत्रालय में हों या बूथ पर, हर जगह हमारा एक ही काम है – आम आदमी की जिंदगी आसान करना। उन्होंने सेवा यात्रियों से कहा कि तुम लोग जो कर रहे हो वही असली भाजपा है, वही असली सरकार है। जनता के बीच जाकर उनके दुख-दर्द बांटना, उनके लिए काम करना, यही सबसे बड़ी पूजा है।
उपदेश नहीं, उदाहरण बनो – कर्म से दो संदेश
पीएम ने युवाओं को खास तौर पर कहा कि सेवा का प्रचार मत करो, सेवा को जीयो। उन्होंने कहा मैं आपसे अपील करता हूं कि आप भाषण मत दीजिए। आप काम कीजिए। जब आप किसी गरीब के घर जाकर उसके बच्चों को पढ़ाएंगे, जब आप किसी अस्पताल में जाकर मरीज का हाल पूछेंगे, जब आप किसी गांव में जाकर स्वच्छता अभियान चलाएंगे, तो लोग खुद-ब-खुद आपसे प्रेरणा लेंगे। पीएम ने कहा कि हमें सेवा का संदेश उपदेश से नहीं, अपने व्यवहार से देना है। लोग हमें देखें और कहें कि देखो ये नेता हैं, मंत्री हैं, फिर भी जमीन पर काम कर रहे हैं। तभी लोगों का हम पर भरोसा बढ़ेगा। पीएम ने बताया कि जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब भी वो हर महीने किसी न किसी गांव में रुकते थे और लोगों के साथ खाना खाते थे। उसी से उन्हें जमीन की सच्चाई पता चलती थी। उन्होंने कहा कि सत्ता आती-जाती रहती है लेकिन सेवा का भाव अगर चला गया तो सब खत्म हो जाएगा।
ऊंचे शिखर पर भी सेवा भाव बरकरार रखने की सीख
पीएम मोदी ने कहा कि जीवन में इंसान बहुत ऊंचाई तक पहुंचता है। मंत्री बनता है, सांसद बनता है, प्रधानमंत्री बनता है। लेकिन सबसे बड़ी परीक्षा तब होती है जब आपके पास ताकत आ जाती है। तब आप भूल जाते हैं कि आप कहां से आए थे। पीएम ने कहा कि मैं आप सभी से वादा चाहता हूं कि हम कितनी भी ऊंचाइयों पर पहुंच जाएं, हम सेवा भाव को नहीं भूलेंगे। हमारा डीएनए सेवा का है। उन्होंने कहा कि राजनीति में बहुत प्रलोभन आते हैं। लोग चापलूसी करते हैं, सुविधाएं मिलती हैं। लेकिन हमें याद रखना है कि हम जनता के सेवक हैं, मालिक नहीं। पीएम ने सेवा यात्रियों से कहा कि तुम लोग जब वाराणसी पहुंचोगे तो काशी विश्वनाथ के दर्शन करना। वहां बाबा से प्रार्थना करना कि हमें शक्ति देना ताकि हम आखिरी सांस तक लोगों की सेवा कर सकें।
पौधारोपण का अनोखा मंत्र, घड़े वाली तकनीक बताई
बातचीत के दौरान पीएम ने पर्यावरण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सेवा यात्रियों से कहा कि आप जहां-जहां जाएं वहां पौधे जरूर लगाएं। लेकिन सिर्फ पौधा लगाकर फोटो खिंचवाने से काम नहीं चलेगा। उसे बड़ा भी करना है। इसके लिए पीएम ने एक देसी जुगाड़ बताया। उन्होंने कहा मेरे पास एक बहुत सरल तरीका है। जब भी आप पौधा लगाएं तो उसके पास मिट्टी का एक घड़ा रख दीजिए। घड़े का मुंह ऊपर की तरफ रखिए और उसमें पानी भर दीजिए। महीने में एक बार घड़े में पानी डाल दीजिए। घड़े से धीरे-धीरे पानी रिसता रहेगा और पौधे की जड़ तक पहुंचेगा। इससे दो फायदे होंगे। पहला पानी की बचत होगी और दूसरा पौधा बहुत तेजी से बढ़ेगा। पीएम ने कहा कि हमारा टारगेट है कि हर सेवा यात्री कम से कम 10 पौधे लगाए और उन्हें जिंदा रखे। अगर हमारे 10 लाख कार्यकर्ता ये कर लें तो एक करोड़ नए पेड़ तैयार हो जाएंगे।
स्वास्थ्य और शिक्षा पर जोर, गांव-गांव तक पहुंचने का आह्वान
पीएम ने सेवा यात्रियों को काम का रोडमैप भी दिया। उन्होंने कहा कि आपकी यात्रा के तीन मुख्य फोकस होने चाहिए। पहला स्वास्थ्य। गांवों में जाकर लोगों को बताइए कि आयुष्मान कार्ड कैसे बनेगा, सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज कैसे मिलेगा। दूसरा शिक्षा। स्कूलों में जाकर बच्चों से मिलिए। उन्हें बताइए कि नशे से दूर रहना है, मोबाइल का सही इस्तेमाल करना है। तीसरा स्वच्छता। गांव में कचरा निपटान, शौचालय की सफाई, पानी की शुद्धता पर काम कीजिए। पीएम ने कहा कि मैं चाहता हूं कि जब आप वाराणसी पहुंचें तो वहां के 10 गांव गोद ले लें और एक साल तक उनकी जिम्मेदारी लें। सरकार की योजनाओं को आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाना ही असली सेवा है।