कर्मचारियों की कमी से परेशान MP सरकार, 85 हजार रिक्त पदों पर निकलेगी भर्ती, ESB और MPPSC से होगी भर्ती, प्रमोशन वाले पद भी जुड़ेंगे
भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों में खाली पड़े करीब 85 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर ली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ निर्देश दिए हैं कि सिर्फ पहले से खाली पद ही नहीं, बल्कि अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रमोशन के बाद जो पद खाली होंगे उन्हें भी इस भर्ती अभियान में शामिल किया जाए। इसका मतलब है कि भर्ती का आंकड़ा 85 हजार से बढ़कर लगभग एक लाख तक पहुंच सकता है। सरकार का लक्ष्य है कि साल 2026 तक सभी पदों के लिए विज्ञापन जारी कर दिए जाएं और भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।
मध्य प्रदेश के सरकारी विभागों में कर्मचारियों की कमी की वजह से कामकाज प्रभावित हो रहा था। स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिस, राजस्व, महिला एवं बाल विकास जैसे अहम विभागों में स्टाफ की कमी के कारण फाइलें अटक रही थीं, सेवाएं लेट हो रही थीं और जनता को परेशानी उठानी पड़ रही थी। इसी को देखते हुए सरकार ने अब बड़े पैमाने पर भर्ती का फैसला किया है। इस पूरी प्रक्रिया को दो बड़े संस्थानों के जरिए आगे बढ़ाया जाएगा। पहला है कर्मचारी चयन मंडल यानी ESB और दूसरा है मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी MPPSC। ESB क्लर्क, पटवारी, शिक्षक, नर्स, लैब टेक्नीशियन जैसे ग्रुप C और D के पदों की भर्ती करेगा। वहीं MPPSC राज्य सेवा, वन सेवा, इंजीनियरिंग सेवा जैसे ग्रुप A और B के पदों के लिए परीक्षा आयोजित करेगा। दोनों संस्थाओं को निर्देश दिए गए हैं कि वो अपने कैलेंडर तैयार करें और चरणबद्ध तरीके से विज्ञापन जारी करें ताकि एक साथ सभी परीक्षाएं ना टकराएं।
भर्ती अभियान की सबसे खास बात ये है कि इसमें प्रमोशन के बाद खाली हुए पदों को भी जोड़ा जाएगा। मध्य प्रदेश में करीब 10 साल बाद अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया दोबारा शुरू हुई है। मुख्यमंत्री के मुताबिक पहले चरण की विभागीय पदोन्नति समिति यानी DPC के बाद लगभग एक लाख कर्मचारियों को प्रमोशन दिया जा चुका है। अब जब एक बाबू प्रमोट होकर अधिकारी बना है तो उसकी जगह खाली हुई है। जब एक शिक्षक प्रमोट होकर प्रिंसिपल बना है तो उसकी जगह खाली हुई है। ऐसे सभी पदों की विभागवार गणना कराई जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग सभी विभागों से डेटा इकट्ठा कर रहा है कि प्रमोशन के बाद कितने पद खाली हुए हैं। उन सभी पदों को भी 85 हजार में जोड़कर भर्ती की जाएगी। इसका फायदा सीधा युवाओं को मिलेगा। क्योंकि पहले सिर्फ रिटायरमेंट या इस्तीफे से खाली हुए पद ही भरे जाते थे। लेकिन अब प्रमोशन से बनी नई वैकेंसी भी जुड़ जाएंगी। इससे पदों की संख्या काफी बढ़ जाएगी। सरकार का अनुमान है कि अंतिम आंकड़ा एक लाख के आसपास पहुंच सकता है।
भर्ती सिर्फ ESB और MPPSC तक सीमित नहीं रहेगी। सरकार ने MP ऑनलाइन के माध्यम से भी भर्तियां करने का फैसला किया है। हाल ही में महिला एवं बाल विकास विभाग में MP ऑनलाइन के जरिए 2548 पदों पर भर्ती की गई है। इसमें 781 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और 1767 आंगनबाड़ी सहायिका के पद शामिल थे। इसी तरह स्वास्थ्य विभाग में ANM, GNM, पंचायत एवं ग्रामीण विकास में ग्राम रोजगार सहायक, कृषि विभाग में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी जैसे पदों की भर्ती भी MP ऑनलाइन से होगी। इससे प्रक्रिया तेज होगी और छोटे-छोटे पदों के लिए बार-बार परीक्षा कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकार का प्लान है कि 2026 तक पूरे भर्ती चक्र को पूरा कर लिया जाए। पहले चरण में उन पदों के विज्ञापन आएंगे जो सबसे ज्यादा जरूरी हैं और जिनकी कमी से काम सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। जैसे डॉक्टर, नर्स, शिक्षक, पुलिस कांस्टेबल, पटवारी। इसके बाद दूसरे चरण में तकनीकी और प्रशासनिक पदों की भर्ती होगी। हर विभाग को अपनी जरूरत के हिसाब से प्रस्ताव भेजने को कहा गया है।
शिक्षा विभाग में सबसे ज्यादा पद खाली हैं। स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसलिए यहां 30 हजार से ज्यादा पद भरे जाने की उम्मीद है। स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टर, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट के करीब 15 हजार पद खाली हैं। पुलिस विभाग में कांस्टेबल और SI के 12 हजार पद, राजस्व विभाग में पटवारी और तहसीलदार के 8 हजार पद, पंचायत एवं ग्रामीण विकास में 10 हजार पद, महिला एवं बाल विकास में 5 हजार पद। बाकी बचे पद अन्य विभागों में बंटेंगे। योग्यता, आयु सीमा, आवेदन प्रक्रिया और परीक्षा की तारीखें हर पद के लिए अलग-अलग होंगी। वो सभी जानकारी संबंधित विभागों के विज्ञापन में दी जाएगी। लेकिन सरकार ने ये जरूर कहा है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध होगी। पेपर लीक और धांधली को रोकने के लिए ESB और MPPSC को सख्त निर्देश दिए गए हैं। ऑनलाइन आवेदन, ऑनलाइन परीक्षा, CCTV वाली परीक्षा और रिजल्ट की जल्दी घोषणा। ये सब प्राथमिकता में रहेगा।
इस भर्ती से प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवाओं को सीधा फायदा होगा। पिछले कुछ सालों में MPPSC और ESB की परीक्षाएं लेट होने की वजह से कई अभ्यर्थी ओवरएज हो गए थे। अब नई वैकेंसी आने से उन्हें फिर से मौका मिलेगा। साथ ही नई डिग्री लेने वाले युवाओं के लिए भी ये सुनहरा अवसर है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि जब एक लाख लोगों को सरकारी नौकरी मिलेगी तो उसका असर पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। इन लोगों की सैलरी बाजार में खर्च होगी। इससे मांग बढ़ेगी और छोटे व्यापारियों को भी फायदा होगा। साथ ही सरकारी सेवाओं की क्वालिटी भी सुधरेगी क्योंकि स्टाफ पूरा होगा।
विपक्ष ने भी इस घोषणा का स्वागत किया है लेकिन साथ में कहा है कि सरकार को समय सीमा तय करनी चाहिए। बार-बार भर्ती टलने से युवाओं का भरोसा टूटता है। इसलिए जो कैलेंडर बने उसे सख्ती से फॉलो किया जाए। अभी अभ्यर्थियों को क्या करना चाहिए। अगर आप सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं तो अभी से शुरू हो जाइए। ESB और MPPSC की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करके रखें। पिछले साल के पेपर हल करें। सिलेबस देखकर तैयारी करें। क्योंकि विज्ञापन आते ही आवेदन की आखिरी तारीख बहुत कम समय की होती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ये भर्ती सिर्फ आंकड़ा नहीं है। ये प्रदेश के विकास की नींव है। जब हर विभाग में पूरा स्टाफ होगा तभी योजनाएं जमीन पर उतरेंगी। शिक्षा बेहतर होगी, स्वास्थ्य बेहतर होगा, कानून व्यवस्था बेहतर होगी।
कुल मिलाकर मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी का सबसे बड़ा अभियान शुरू होने वाला है। 85 हजार से शुरू होकर ये आंकड़ा एक लाख तक जा सकता है। प्रमोशन से खाली पद भी जुड़ेंगे। 2026 तक पूरी प्रक्रिया पूरी करने का टारगेट है। युवाओं के लिए अब मेहनत का समय है। तैयारी कर लीजिए क्योंकि मौका दस्तक दे रहा है।